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मजावड़ी पंचायत में बेटी के जन्म पर मनेगा जश्न

विनोद शर्मा/कपिल सोनी. उदयपुर/गोगुन्दा. बिटिया के जन्म पर मातम मनाने वाले सभ्य समाज को आदिवासी बहुल गोगुंदा की मजावड़ी पंचायत ने नई राह दिखाने का प्रेरक काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिए जयापुर गांव (वाराणसी, उत्तर प्रदेश) से कदमताल कर रही इस पंचायत ने अनूठी पहल की है। यहां किसी परिवार में बेटी का जन्म होगा तो पूरी पंचायत उसकी खुशियां मनाएंगी।

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बिटिया के जन्म पर मातम मनाने वाले सभ्य समाज को आदिवासी बहुल गोगुंदा की मजावड़ी पंचायत ने नई राह दिखाने का प्रेरक काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिए जयापुर गांव (वाराणसी, उत्तर प्रदेश) से कदमताल कर रही इस पंचायत ने अनूठी पहल की है। यहां किसी परिवार में बेटी का जन्म होगा तो पूरी पंचायत उसकी खुशियां मनाएंगी। माता-पिता से स्कूल परिसर में पौधा लगवाने के साथ विशेष ग्रामसभा में नवजात और मां का सम्मान किया जाएगा।सरपंच कपिलदेव पालीवाल ने बताया कि वह अपनी पंचायत को आदर्श बनाना चाहते हैं इसके लिए ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं कि बेटा-बेटी में फर्क नहीं है। इस जश्न का मकसद बेटियों में सुरक्षा की भावना भी जगाना है।
गणतंत्र दिवस से किया श्रीगणेश
पंचायत ने यह कदम 26 जनवरी के दिन उठाया। राजकीय विद्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सरपंच ने इसी माह जन्मी दीपिका के माता-पिता को मंच पर बुलवाया। फिर इनके हाथों से पौधा लगवाया तो एकबारगी ग्रामीणों को समझ नहीं आया। सरपंच ने बताया कि यह पंचायत में बेटी बचाओ अभियान का श्रीगणेश है, जिसे बालिका वन नाम दिया है। इसके बाद गांव में जिस किसी के घर बेटी जन्मेगी, माता-पिता के हाथों पौधा लगवाया जाएगा। इस तरह पंचायत क्षेत्र के हर विद्यालय परिसर में पौधे लगाएंगे। इनकी देखभाल कर वन क्षेत्र सहित उन स्थानों पर रोपेंगे, जहां पेड़ कम हैं। इन पौधों वाली जगह बालिका वन कहलाएगी। इतना ही नहीं, साल में दो बार होने वाली विशेष ग्राम सभा में क्षेत्र में जन्मी बेटियों के माता-पिता को सम्मानित किया जाएगा।
जयापुर में क्या खास
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गोद लिए जयापुर में भी बेटी के जन्म पर पौधे लगाने और खुशी मनाने की परम्परा है। ग्राम प्रधान दुर्गावती देवी ने इसकी शुरुआत की थी। यह जानकर खुद प्रधानमंत्री वहां पहुंचे थे। उन्होंने इस कदम की तारीफ कर जयापुर को गोद लेने को अपनी उपलब्धि बताई थी।
जो समर्थ नहीं, उनकी बेटियों को मैं पढ़ाऊंगा
सरपंच ने इस दौरान पंचायत क्षेत्र में खास घोषणा भी की। वह यह कि जो ग्रामीण अपनी बच्ची को पढ़ाने में असमर्थ हैं, वे लिखित में देंगे तो सरपंच अपने खर्च पर उनको पढ़ाएंगे। पालीवाल ने बताया, पढ़ाई से जुड़ा हर छोटा-बड़ा खर्च खुद उठाएंगे। उन्होंने नवजात के बालिका सुरक्षा बीमा व एक साल के पढ़ाई का खर्च उठाने की भी घोषणा की है। मकसद बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना है।