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चार एकड़ में बने विशाल मंदिर में स्थापित की सबसे वजनी 24 हजार किलो की मूर्ति

17 हजार किलो अष्टधातु कमल पर विराजमान हुए श्री आदिनाथ, अमरकंटक सर्वोदय तीर्थ में पंचकल्याणक 25 से, आचार्यश्री का मंगलप्रवेश

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17 हजार किलो अष्टधातु कमल पर विराजमान हुए श्री आदिनाथ,

अमरकंटक. एमपी की जीवनरेखा मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में चार एकड़ के परिसर में विशाल मंदिर बनाया गया ह। सर्वोदय श्री आदिनाथ जैन मंदिर का में 24 हजार किलो की मूर्ति स्थापित की गई है। मंदिर का निर्माण 20 साल से चल रहा है। मंदिर में लगी प्रतिमा को विश्व की सबसे वजनी अष्टधातु प्रतिमा माना जा रहा है। यहां भगवान आदिनाथ की 24 फीट ऊंची प्रतिमा 24 हजार किलो वजनी अष्टधातु से ढली 17 हजार किलो अष्टधातु की कमल आसन पर विराजमान है यानी 41 हजार किलो अष्टधातु की भगवान की पूर्ण प्रतिमा स्थापित की है। अष्टधातु प्रतिमा को उन्नाव में ढाला गया। इसे आचार्यश्री विद्यासागर ने 6 नवंबर 2006 को स्थापित किया था।

यहां 25 मार्च से 2 अप्रैल तक पंचकल्याणक होगा। सर्वोदय तीर्थ व पंचकल्याणक समिति के प्रचार प्रमुख वेदचन्द जैन ने बताया कि कबीर चबूतरा से हजारों श्रावक छह किमी पदविहार कर पहुंचे। उनके साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी उत्साह से पैदल चल रहीं थीं। मंगलवार को आचार्यश्री विद्यासागरजी 1 किमी से ज्यादा लंबे कारवां के साथ ससंघ अमरकंटक पहुंचे। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के साथ पंचकल्याणक में मुनि प्रसादसागर, चंद्रप्रभसागर, निरामयसागर भी रहेंगे। प्रतिष्ठा विनय भैयाजी बंडा वाले करवाएंगे।

आचार्यश्री विद्यासागर ने यहां कहा कि अमरकंटक में साधना का उपयुक्त वातावरण है। यहां ध्यान लगाना नहीं पड़ता स्वतः लग जाता है। यहां निर्मित जिनालय के निर्माण में मानवों के साथ देवों ने भी योगदान दिया है। यह विशालकाय मंदिर कृत्रिम है और देवों ने योगदान दिया है इसलिए अकृत्रिम भी है। दृढ़ संकल्पी ही यहां आता है। आदिनाथ की प्रतिमा वर्षों से प्रतीक्षा कर रही है। यहां की गुलबकावली का रस नयनों की ज्योति बढ़ाता है।

चार एकड़ में मंदिर
मंदिर 4 एकड़ में फैला है। गुंबद की ऊंचाई 144 फीट है। सिंहद्वार 51 फीट ऊंचा और 42 फीट लंबा है। निर्माण में राजस्थान की गुलाबी बलुआ पत्थर लगाया है। मंदिर में सीमेंट व लोहे का इस्तेमाल नहीं किया है। 23 अप्रैल 2007 को उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत ने इसका शिलान्यास किया था।

कब.क्या
25 मार्च- ध्वजारोहण
26 मार्च- गर्भ कल्याणक पूर्व
29 मार्च- तपकल्याणक
1 अप्रैल- गजरथ फेरी
2 अप्रैल- महामस्तकाभिषेक