
भोपाल. मध्यप्रदेश में निमोनिया बच्चों पर कहर बनकर टूटा है. यहां जानलेवा निमोनिया के कारण पिछले साल की तुलना में इस बार तीन गुना ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. हाल ये है कि पांच साल तक की उम्र के बच्चों की मौतों के मामले में प्रदेश देश के सबसे खराब राज्यों में शामिल हो गया है।
मध्यप्रदेश में निमोनिया से होने वाली बच्चों की मौतें कई गुना बढ़ गई- मध्यप्रदेश में निमोनिया से होने वाली बच्चों की मौतें कई गुना बढ़ गई हैं। प्रदेश में बीते साल 2020-21 में जहां निमोनिया से करीब साढ़े नौ हजार मौतें हुई वहीं इस साल 26 हजार बच्चे दम तोड़ चुके हैं. ये आंकड़े तब हैं जबकि शिशु मृत्यु दर को सुधारने के नाम पर सराकर करोड़ों रुपए हर साल खर्च कर रही है।
इस साल 25,987 बच्चों ने निमोनिया के कारण जान गंवाई - सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल प्रदेश में निमोनिया से कुल 9559 बच्चों की मौतें हुई थीं। जबकि इस साल 25,987 बच्चों ने निमोनिया के कारण जान गंवाई है।
प्रदेश के कई जिलों में बच्चों को निमोनिया में दिए जानेवाले जेंटामाइसिन इंजेक्शन ही नहीं हैं- सबसे बुरी बात तो यह है कि प्रदेश के कई जिलों में बच्चों को निमोनिया में दिए जानेवाले जेंटामाइसिन इंजेक्शन ही नहीं हैं. इसके इलाज में लगनेवाले अमोक्सीसीलीन सीरप की भी कई जिलों में शॉर्टेज है।
जिन जिलों में निमोनिया से बच्चों की ज्यादा मौतें हुईं उनमें राजधानी भोपाल और प्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर भी शामिल - एनएचएम के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के करीब दो दर्जन जिलों में निमोनिया से बच्चों की मौतों के मामले बढ़े हैं। पिछले साल के मुकाबले जिन जिलों में निमोनिया से बच्चों की ज्यादा मौतें हुईं उनमें राजधानी भोपाल और प्रदेश की व्यवसायिक राजधानी इंदौर भी शामिल है. इनके अलावा मंडला, टीकमगढ़, शहडोल, धार, सागर, ग्वालियर, सीहोर, सतना, विदिशा, सिंगरौली, रीवा, कटनी जिलोंं में ज्यादा संख्या में बच्चों की मौतें हुई हैं.
Published on:
12 Feb 2022 09:54 am
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