
bigger threat than Bhagirathpura case in bhopal (फोटो- Patrika.com)
Bhagirathpura case: इंदौर के भागीरथपुरा में जिस तरह का गंदा पानी पीकर 20 लोग अकाल मौत का शिकार हुए है। इसी तरह भोपाल में भी बैक्टीरियल इनफेक्शन वाला पानी लोगों के घरों तक सप्लाई हो रहा है। पत्रिका की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि शहर के 85 वार्ड के 25 फीसदी हिस्से में अब भी ग्राउंड वाटर सप्लाई हो रहा है जबकि 65 प्रतिशत इलाको में 40 साल पुरानी पाइपलाइन से पानी की सप्लाई की जा रही है।
इस कार्यकाल में भाजपा के पूर्व गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता, मौजूदा मंत्री कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा तक महापौर रह चुके हैं लेकिन इस मुद्दे को उतनी तवज्जो नहीं मिली जितनी मिलनी चाहिए थी। मौजूदा महापौर मालती राय एवं जलकार्य प्रभारी रविंद्र यति पार्षद के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष भी है लेकिन पार्षदों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। (MP News)
ई-कोलाइट बैक्टीरिया (E-coli bacteria) से प्रदूषित पानी पीकर इंदौर में लोगों की जान गई थी। यह बैक्टीरिया मल मूत्र के जरिए पानी में शामिल होता है। शहर में नालों के किनारे उगाई जाने वाली सब्जी भाजी और अन्न की सिंचाई में इसी तरह के प्रदूषित पानी का इस्तेमाल हो रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पेश सबूतों में राजधानी की सीवेज फार्मिंग को साबित किया गया है।
भोपाल शहर की ब्रिज विहार कॉलोनी में शुक्रवार को नगर निगम ने बकाया टैक्स वसूली के लिए नल कनेक्शन काट दिए। यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे से प्रभावित इस क्षेत्र में भूजल अत्यधिक प्रदूषित है। शुक्रवार सुबह जब निगम का अमला जेसीबी के साथ कनेक्शन काटने पहुंचा, तो स्थानीय लोगों और गैस पीड़ित संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
रहवासियों का आरोप है कि निगमकर्मियों ने पाइपलाइन सुधारने का झूठ बोलकर कनेक्शन काटना शुरू किया था। विरोध बढ़ता देख निगम को अपने कदम पीछे खींचने पड़े और दोपहर बाद सभी कनेक्शन दोबारा जोड़े गए। दरअसल, नगर निगम वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले संपत्ति और जल कर की बकाया वसूली के लिए सख्त रुख अपना रहा है। एक दिन पहले ही मानसरोवर कॉम्प्लेक्स में कुर्की की कार्रवाई की गई थी। हालांकि, संवेदनशील इलाकों में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के पानी रोकने की इस कोशिश ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए है।
पर्यावरणविद् सुभाष सी पांडे ने बताया कि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, एमपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट और मेरी रिसर्च में भी यह सच सामने आ चुका है। इंदौर में तो ई-कोलाई बैक्टीरिया ही मिला है, लेकिन यहां इससे भी ज्यादा गंभीर समस्या है। आदमपुर खंती (Adampur Khanti) और आसपास के गांवों में भूजल के अंदर आयरन (Iron), क्रोमियम (Chromium) भी मिले हैं, जिनसे कैंसर (Cancer) जैसी बीमारी होती है।
भोपाल में जहां भी पाइप लाइनें जर्जर हो चुकी हैं वहां इन्हें बदलने के लिए निर्देश दिए हैं। फंड की कमी के चलते कहीं कोई काम प्रभावित नहीं हो रहा है।- मालती राय, महापौर
आदमपुर छावनी, हरिपुरा, पड़रिया, शांति नगर, अर्जुन नगर, कोलुआ, खानूगांव और वाजपेयी नगर के ग्राउंड वाटर में कैंसर, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों की वजह बनने वाला बैक्टीरिया मिला है। यहां की आबादी पांच हजार है। पीने के पानी में बैक्टीरिया की पुष्टि खुद भोपाल नगर निगम की रिपोर्ट से हुई है। इस पानी में आयरन की मात्रा 10 या 20 गुना नहीं, बल्कि पूरे 100 गुना ज्यादा है। (MP News)
Published on:
10 Jan 2026 01:21 am
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