
कोटा-इटावा के बीच बनेगा 404 किमी लंबा अटल प्रोग्रेस-वे (Photo Source- Patrika)
Atal Progress-Way : कोटा से इटावा के बीच 404 कि.मी लंबे अटल प्रोग्रेस-वे अब पुराने रूट अलाइनमेंट पर ही बनाने की योजना है। राज्य शासन से संकेत मिलने के बाद नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (NHAI) ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित 90 गांवों की पूर्व में चिह्नित की गई जमीन का सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा, श्योपुर के 48 और भिंड के 23 गांव भी इसमें शामिल हैं, जिनके सत्यापन होना है।
तीन साल पहले चिन्हित की गई जमीनों का दोबारा सत्यापन कराने के पीछे कारण ये है कि, इस गैप के दौरान किसानों ने अधिग्रहण के लिए चिह्नित जमीनों को कहीं बेच तो नहीं दिया। सत्यापन के बाद जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों के नाम उनके गांव और रकबा प्रकाशित किया जाएगा।
दावे-आपत्ति के बाद किसानों के बैंक खातों में उनसे ली गई जमीन का पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा। अटल प्रोग्रेस-वे का पुराना रूट अलाइनमेंट 90 गांव से होकर गुजरेगा। इसमें सबलगढ़ के 11 गांव, जौरा के 29 गांव, मुरैना के 15 गांव, अंबाह के 10 गांव, पोरसा के 25 गांव की जमीन शामिल हैं।
6 साल पहले 2020 में जब इस प्रोजेक्ट का सर्वे किया गया तो किसानों की जमीन का अधिग्रहण किए जाने के लिए उनकी सूची तैयार की गई थी। भूमि अधिग्रहण होता उससे पहले केंद्र सरकार ने अटल प्रोग्रेस-वे का रूट अलाइनमेंट चेंड कर दिया। लेकिन, नए रूट अलाइनमेंट के बाद किसानों में असंतोष दिखने लगा, क्योंकि नए रूट अलाइनमेंट में किसानों की ज्यादा जमीनें जा रही थी। इस दौरान सबलगढ़ से पोरसा के बीच किसानों में कड़ा विरोध भी देखने को मिला, जिसके चलते पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई अप्रैल 2023 में तत्काल प्रभाव से रुकवा दी।
इसके बाद 3 साल ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में रहा, लेकिन अब एक बार फिर ये धरातल पर आया है। केंद्र सरकार के भूतल परिवहन मंत्रालय की पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 हजार 645 करोड़ रुपए लागत के अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराने के आदेश दिए हैं।
इसमें अभी तक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण किसानों को उनकी जमीन लेने के बदले कलेक्टर गाइडलाइन का दो गुना मुआवजा देगा। पुराने रूट अलाइनमेंट में कम जाएगी किसानों की जमीन अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण पुराने रूट अलाइनमेंट पर कराए जाने की दशा में 90 गांव के 2089 किसानों की महज 488.01 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी।
वहीं, अगर नए रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे का निर्माण होता तो 96 गांव के 14137 किसानों की 935.3 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जाती। अंतर साफ स्पष्ट है कि पुराने रूट अलाइनमेंट पर अटल प्रोग्रेस-वे बनाने से 12 हजार किसानों की 450 हेक्टेयर से अधिक जमीन बच रही है, जो आजीवन उनकी केती के इस्तेमाल में आती रहेगी।
अटल प्रोग्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर मप्र किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी का कहना है कि किसानों को उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा देने के आदेश मुख्यमंत्री को तत्काल प्रभाव से करने चाहिए। किसान दो गुना मुआवजा में तो अपनी जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए कतई नहीं देंगे। आंदोलन पहले भी हुआ था और अब फिर से सड़कों पर उतरेंगे किसान।
कोटा से 78 किलोमीटर दूरी के बाद प्रोग्रेस-वे की श्योपुर से प्रदेश में एंट्री होगी। श्योपुर के 48 गांव से ये हाइवे गुजरेगा। यहां के छीताखेड़ी, जालेरा, जुवाड़, सिरसोद, जैनी समेत 26 गांव ऐसे हैं, जो कि बीहड़ क्षेत्र में मौजूद हैं या उससे बिल्कुल सटे हुए हैं। इन क्षेत्रों में अच्छे पहुंच मार्ग भी अभी नहीं हैं।
श्योपुर के बाद मुरैना के सबलगढ़, जौरा, मुरैना, अंबाह, पोरसा से होते हुए 90 गांव से ये हाईवे जुड़ेगा। जिनमें 43 गांव ऐसे हैं जो कि चंबल के बीहड़ क्षेत्र से जुड़े हैं या उसमें ही मौजूद हैं। यहां गढुला, बंथर, अटार, गरजा, डंडोली, गूंज, रछेड़, धोर्रा समेत अन्य गांव बीहड़ के कारण विकास की मुख्य धारा से आज भी पिछड़े हुए हैं।
मुरैना के पोरसा के रायपुर के बाद प्रोग्रेस-वे भिंड से जुड़ेगा। यहां के 25 गांव से होते हुए इसे उप्र के इटावा से जोड़ा जाएगा। शुरुआत में प्रोग्रेस वे भिंड शहर से सटे बरही और रानीपुरा गांव से गुजरेगा। इसके बाद अटेर क्षेत्र के 23 गांव से प्रोग्रेस-वे गुजरना है। भिंड के 13 गांव ऐसे हैं जो बीहड़ में मौजूद हैं या उससे सटे हुए।
अटल प्रोग्रेस-वे को राजस्थान से मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश तक ले जाया जाएगा। 404 किलोमीटर लंबा ये प्रोग्रेस वे राजस्थान में कोटा के सीमाल्या गांव से शुरू होगा और फिर श्योपुर, मुरैना से भिंड होते हुए इटावा तक पहुंचेगा। वहां इटावा के ननवा गांव से प्रोग्रेस-वे को बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। पूरे मार्ग में करीब 150 गांव प्रोग्रेस-वे से कवर होंगे और इमनें से 85 गांव ऐसे हैं जो चंबल के बीहड़ कहलाते हैं या उन बीहड़ों से सटे हैं।
Updated on:
26 Mar 2026, 11:29 AM IST
Published on:
26 Mar 2026, 11:29 AM IST
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