
राजधानी के पश्चिमी हिस्से में बायपास बनाने की मंजूरी कैबिनेट से मिलते ही शहरवासियों की 15 साल पुरानी उम्मीदों को पंख लग गए। करीब 10 साल बाद शहर में दूसरे बायपास की मंजूरी मिली। मंडीदीप से ठीक पहले यह बायपास शुरू होगा जो कोलार रोड क्षेत्र को क्रास करते हुए रातीबड़ खजूरी सड़क और फिर फंदा के सेंटर पॉइंट पर इंदौर रोड से मिल जाएगा। करीब 41 किमी लंबे बायपास को बनाने में 2981 करोड़ का खर्च आएगा, जो दो से तीन साल में पूरा हो जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा जबलपुर, नर्मदापुरम, मंडीदीप की तरफ से आने वाले वाहन भोपाल में प्रवेश नहीं करेंगे, वे भोपाल से पहले ही टर्न हो जाएंगे। फिलहाल इंदौर रोड जाने के लिए बड़े वाहनों को 52 किलोमीटर का बायपास पार करना होता है। इस रिंग रोड पर एक ब्रिज, दो फ्लाइओवर और 15 अंडरपास बनेंगे।
हुजूर में ज्यादातर हिस्सा, लाभ नर्मदापुरम रोड को
प्रोजेक्ट के तहत सबसे ज्यादा 85% सड़क हुजूर ग्रामीण में बनेगी। बायपास कोलार, नीलबड़, रातीबड़, खजूरी, फंदा से निकलेगी, लेकिन सबसे ज्यादा लाभ नर्मदापुरम, रायसेन रोड से जुड़े क्षेत्रों को होगा। कोलार व हुजूर के लिए मौजूदा सीहोर रोड के साथ बैरागढ़ से इंदौर रोड आवाजाही का रास्ता पहले से ही है। रेलवे लाइन पर नर्मदापुरम रोड को कोलार की ओर बढ़ाने नया सिक्सलेन आरओबी बनेगा।
जानिए पैसे का गणित
राजधानी के दूसरे बायपास के लिए कैबिनेट ने 2981 करोड़ की मंजूरी दी है। इसमें भू अर्जन में 427 करोड़। पर्यावरण प्रबंधन में 15 करोड़ का खर्च प्रस्तावित है। ब्याज समेत मूल सड़क निर्माण की लागत 1743 करोड़ आएगी। प्रोजेक्ट कॉस्ट की 40 प्रतिशत राशि पांच किश्तों में दी जाएगी। इसमे 697 करोड़ का भुगतान निर्माण के दौरान होगा। शेष 60 फीसदी राशि सड़क बनने के बाद 1784 करोड़ एन्यूटी के जरिए 15 वर्षों में मिलेगी। इसके अलावा पर्यावरण की अनुमति, यूटिलिटी शिफ्टिंग आदि पर भी राशि खर्च होगी, इसीलिए अनुमानित लागत 2981 करोड़ आंकी गई है।
प्रदेश की दूसरी बड़ी रिंग रोड
इस बायपास के बनने से राजधानी की रिंग रोड 93 किमी लंबी हो जाएगी, जो प्रदेश की दूसरी बड़ी रिंग रोड होगी। हालांकि इंदौर में करीब 145 किमी लंबी रिंग रोड प्रस्तावित है। यह देश की दूसरी सबसे बड़ी रिंग रोड होगी। देश की सबसे बड़ी 156 किलोमीटर की रिंग रोड हैदराबाद में एनएचएआइ ने बनाई है।
क्या-क्या बनेगा
1 रेलवे ब्रिज, 2 फ्लाइओवर और 15 अंडरपास के अलावा एक सिक्सलेन आरओबी व दो बड़े जंक्शन बनेंगे।
कितनी जरूरत होगी जमीन की: इस रिंग रोड के लिए करीब 600 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। इसमें जंगल की करीब 75 एकड़ से ज्यादा जमीन आएगी। 525 एकड़ से ज्यादा जमीन निजी लोगों की है।
पहला बायपास 2013 में
राजधानी का पहला बायपास उत्तर-पूर्व क्षेत्र में है। चार लेन के इस बायपास का निर्माण 2013 में हुआ था। यह भोपाल-औबेदुल्लागंज से शुरू होकर रायसेन रोड, विदिशा, बैरसिया और ब्यावरा रोड को पार करते हुए भोपाल-देवास मार्ग को भौरी में जोड़ता है। इसकी कुल लंबाई 52 किमी है।
85 गांवों में खुलेंगे विकास के रास्ते
यह बायपास हुजूर विस क्षेत्र के अधिकांश क्षेत्रों को कवर करेगा। इससे भोपाल से देवास ज्वाला माई का दर्शन आसान हो जाएगा। यह इंदौर-देवास से नर्मदा मैया के लिए धार्मिक कॉरिडोर का काम करेगा। भोपाल के कोलार, नीलबड़-रातीबड़ के अलावा मंडीदीप व सीहोर जिले को मिलाकर कुल 85 गांवों को इससे फायदा होगा।
Published on:
01 Sept 2023 06:35 pm
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