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Good News: ग्वालियर मेले में वाहन खरीदने पर टैक्स में 50 फीसदी छूट, आदेश जारी

कोरोना के बाद छूट मिलने से इस बार ज्यादा होगा कारोबार...। मेला छूटका लाभ लेकर लाखों रुपए तक बचत करते हैं लोग...।

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भोपाल

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Manish Geete

Dec 22, 2022

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ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर मेले में वाहन खरीदने वालों को रोड टैक्स में 50 फीसदी की छूट दी जाएगी। यह छूट 25 दसिंबर तक मेले से वाहन लेने वालों को मिल जाएगी। राज्य सरकार ने मेले में टैक्स में छूट की अधिसूचना जारी कर दी है।

मध्यप्रदेश के परिवहन मंत्रालय ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिए गए हैं। परिवहन विभाग ने छूट का अंतिम प्रारूप बनाकर अधिसूचना प्रकाशन भी कर दिया है। अब रोड टैक्स में 50 फीसदी की छूट मिलने से मेले में करोड़ों का कारोबार हो सकेगा। क्योंकि ग्वालियर के इस मेले में बड़ी संख्या में सभी कंपनियों के वाहन आते हैं और यहां से कोई भी वाहन खरीद सकता है। इस मेले में छूट का इंतजार काफी लोग करते हैं।

वर्ष 2020-21 में 41 दिन ग्वालियर व्यापार मेला लगा था। उस समय कोविड-19 के कारण मेला बीच में ही खत्म करना पड़ गया था। 41 दिन में मेले से 857 करोड़ के 16 हजार 823 दोपहिया और चार पहिया वाहन बिके थे। इससे परिवहन विभाग को 43.83 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। खरीदारों को भी छूट के कारण 43.83 करोड़ की छूट मिली थी। जबकि इसके अगले साल 2021 में कोविड के संक्रमण के कारण ग्वालियर मेला लगा ही नहीं था। इस कारण भी वाहनों पर छूट नहीं दी गई थी और बड़ी संख्या में लोग इसका इंतजार कर रहे थे।

50 लाख की गाड़ी पर बचेगा पांच लाख टैक्स

यदि मेले से 50 लाख की गाड़ी खरीदते हैं, तो पांच लाख की छूट रोड टैक्स पर मिल जाएगी। इसके अलावा दस लाख तक पेट्रोल वाहन खरीदने पर 40 हजार और डीजल वाहन खरीदने पर 50 हजार तक की बचत ग्वालियर मेले में हो सकेगी। वहीं 20 लाख का पेट्रोल वाहन पर एक लाख और डीजल वाहन पर 1.20 लाख रुपए बचा सकते हैं। छूट की अधिसूचना जारी होते ही अब आटोमोबाइल सेक्टर में बूम देखने को मिलेगा। कई और आटोमोबाइल कंपनियां भी मेला छूट दे सकेंगी।

117 वर्ष पहले हुई थी शुरुआत

ग्वालियर के व्यापार मेले को शुरू हुए अभी 117 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। परंपरा और आधुनिकता के संगम वाले इस व्यापार मेले की शुरूआत 1905 में सागरताल से हुई थी। उस समय पूरी रियासत अकाल से पीडि़त थी। कारोबार चौपट हो गए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन शासक स्व. माधवराव सिंधिया ने इसका शुभारंभ किया था। सागरताल में जब मेले ने साकार रूप लिया,तब शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि पशु मेले के रूप में शुरू हुआ यह मेला करोड़ों का कारोबार करने लगेगा।

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