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रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण शहर नहीं आ पाए 50 प्रजाति के पक्षी , 12 हजार किलोमीटर का करते हैं सफर

हर साल प्रवासी पक्षी 10-12 हजार किमी का सफर तय कर भोजन व आवास के लिए यहां आते थे....

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migratory Bird

भोपाल। सर्दी के मौसम में हर साल भोज वेटलैंड में लाखों प्रवासी पक्षी आते हैं, लेकिन इस बार ये कहीं-कहीं ही दिख रहे हैं। बताय जाता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण करीब 50 प्रजाति इस ओर रुख ही नहीं कर पाए। वहीं, जिन प्रजातियों के पक्षी यहां दिखाई दे रहे हैं, उनकी संख्या महज 10 प्रतिशत के आसपास ही है। भोपाल के जलीय क्षेत्रों में कॉमन कूट, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, पिनटेल, नॉर्दर्न शोवलर, ब्रह्मिनी शेल्डक आदि की संख्या कुछ क्षेत्रों में 100-500 तक ही है, जबकि पिछले वर्षों में ये 25 से 30 हजार तक होते थे। हर साल प्रवासी पक्षी 10-12 हजार किमी का सफर तय कर भोजन व आवास के लिए यहां आते थे।

सेंट्रल एशियन फ्लाई वे का उपयोग

भोपाल बर्ड्स कंजर्वेशन सोसायटी के मोहम्मद खालिद ने बताया कि सेंट्रल एशिया फ्लाई वे 30 से भी अधिक देशों में फैला है। इसमें भारत के साथ रूस, अफगानिस्तान, बहरीन, चीन, ईरान, मंगोलिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब, श्रीलंका, बांग्लादेश, भूटान, कुवैत, मालदीव आदि देश आते हैं। सेंट्रल एशिया फ्लाई वे का उपयोग कर 279 माइग्रेटरी पक्षी आते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पक्षी सेंट्रल एशिया फ्लाईवे का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, जिससे वेटलैंड सूना पड़ा है।

ये पक्षी आते थे

यहां भोज वेटलैंड यानी बड़ा और छोटा तालाब, केरवा डैम, कलियासोत डैम, अजनाल डैम, शाहपुरा झील, हताईखेड़ा डैम में ये पक्षी आशियाना बनाते थे। सेंट्रल एशिया फ्लाई वे का उपयोग कर नॉर्थेर्न पिनटेल, नॉर्थेर्न शोवलर, कॉमन टील, यूरेशियन विजियन, गार्गेनि, गड़वाल, ग्रे लेग गूस, ईस्टर्न एम्पेरिअल ईगल, स्टेपी ईगल, कॉमन पोचार्ड, केंटिश प्लोवर, लिटिल रिंग प्लोवर, वुल्ली नैक स्टोर्क, कॉमन केस्ट्रेल, कॉमन कूट और रेड क्रेस्टेड पोचार्ड आते थे। इनमें से ग्रे लेग गूस, गड़वाल, यूरेशियन विजियन, नॉर्थेर्न शॉवलर, कॉमन टील आदि को सेंट्रल एशिया कंजर्वेशन कार्यक्रम में रखा गया है।

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