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चुनाव में मतदान करेंगे 68 थर्ड जेंडर, जानें पहले किस हैसियत से वोटिंग करते थे किन्नर

रोचक बात यह है कि पहले किन्नर थर्ड जेंडर के रूप में वोटिंग नहीं करते थे

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उज्जैन। नगरीय निकायों के स्थानीय निर्वाचन के लिये कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष सिंह की अध्यक्षता में स्टेंडिंग कमेटी की बैठक बृहस्पति भवन में आयोजित की गई। यहां सभी राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों को निर्वाचन कार्यक्रम सम्बन्धी जानकारी दी गई. जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष सिंह ने यह भी बताया कि जिले में कुल 6 लाख 62 हजार 544 मतदाता नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों का निर्वाचन करेंगे। इनमें 3 लाख 32 हजार 295 पुरूष और 3 लाख 30 हजार 181 महिला मतदाता शामिल हैं। खास बात यह है कि इन चुनावों में 68 थर्ड जेण्डर यानि किन्नर भी अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे.

रोचक बात यह है कि पहले किन्नर थर्ड जेंडर के रूप में वोटिंग नहीं करते थे. उन्हें यह अधिकारी सन 2014 में मिला था. इससे पहले किन्नर चुनावों में वोट तो डालते थे लेकिन वे या तो पुरुष श्रेणी में या महिला की श्रेणी में अपने मताधिकार का उपयोग कर पाते थे. 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात की मान्यता दी कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पुरुष, महिला या यानि थर्ड जेण्डर के रूप में स्वयं को आइडेंटिफाई करने का अधिकार है।

किन्नरों पर सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला था। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने तीसरे वर्ग के रूप में ट्रांसजेंडर को मान्यता दी. इसके साथ किन्नरों को ऐसा दर्जा देने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर को सामाजिक रूप से पिछड़ा समुदाय बताया और कहा कि उन्हें आरक्षण दिया जाना चाहिए। उनकी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए केंद्र एवं राज्यों को निर्देश दिए. सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 14, 16 और 21 का हवाला देते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर देश के नागरिक हैं. शिक्षा, रोजगार एवं सामाजिक स्वीकार्यता पर उनका समान अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस अहम फैसले में कहा कि किन्नरों को विशेष दर्जा दिया जाना चाहिए। इस समुदाय को बच्चे गोद लेने का अधिकार देने की भी बात कही गई थी।