
'अस्त्र'
भोपाल। विधानसभा चुनाव को लेकर छह अक्टूबर से जारी आचार संहिता के बाद से राजधानी में गंभीर अपराधों में अचानक से कमी आ गई है। पिछले 10 दिनों में गंभीर अपराधों (हत्या, लूट, डकैती, हत्या की कोशिश) में 95 फीसदी की कमी आई है।
अपराधों में आई रेकॉर्ड कमी को देख पुलिस भले ही अपनी छाती चौड़ी कर रही हो, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। इसके पीछे की एक बड़ी वजह सफेदपोश नेताओं का 'नो रिस्क' एक्शन प्लान भी है। गुंडे-बदमाशों को साफ कह दिया कि वे चुपचाप बैठे रहें, गड़बड़ करने पर कोई मदद नहीं की जाएगी।
ऐसे में अधिकतर गुंडे-बदमाश दुबक कर बैठे हैं। थाने में सूचीबद्ध होने के बाद भी इन पर जिला बदर, एनएसए, अन्य कोई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ऐसे में अधिकतर गुंडे-बदमाश दुबक कर बैठे हैं। थाने में सूचीबद्ध होने के बाद भी इन पर जिला बदर, एनएसए, अन्य कोई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।
अपराध कम होने की यह वजह
साल भर में इतनी कार्रवाई नहीं करती पुलिस जितनी महज 24 दिन में की...
- बाउंड ओवर: 5643 बाउंड ओवर भराए। बाउंड ओवर डाउन करने पर 32 के खिलाफ कार्रवाई।
- अवैध हथियार: 203 अवैध हथियार पकड़े।
- वारंट तामील: करीब 35 सौ वारंटी, 1687 वारंट तामील हुए।
- जिला बदर, एनएसए: 73 जिला बदर, 07 एनएसए के आदेश हुए।
(नोट:6 से 31 अक्टूबर तक के भोपाल पुलिस के आंकड़े )
चोरी-जुए-सट्टे में नहीं लगी लगाम
आचार संहिता के बाद चोरी, जुएं-सट्टे की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई। इसके पीछे की वजह यह कि पुलिस गश्त से अधिक उन गुंडे-बदमाशों की धरपकड़ में जुटी है, जिनसे कथिततौर पर चुनाव प्रभावित होने का अंदेशा है। इसी तरह जुएं-सट्टे के फड़ में कोई दबिश नहीं दी जा रही।
आचार संहिता के दौरान अपराध में कमी आने की दो बड़ी वजह हैं। पहली-पुलिस की सक्रियता। जिससे गुंडे-बदमाशों में डर पैदा हो जाता है। दूसरा-अपराधियों को यह पता चल जाना कि आचार संहिता में उनके आका (नेता व अन्य रसूखदार) मदद नहीं कर पाएंगे।
- सलीम खान, रिटायर्ड, सीएसपी
आचार संहिता के बाद से पुलिस की गुंडे-बदमाशों पर कार्रवाई जारी है। मौजूदा समय में गंभीर अपराधों में भारी कमी आई है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
- जयदीप प्रसाद, आईजी
Updated on:
2 Nov 2018, 11:13 AM IST
Published on:
2 Nov 2018, 11:13 AM IST
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