13 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मासूमों को हैवानियत से बचाने के लिए एमपी पुलिस की सबसे बड़ी मुहिम, स्कूल, कॉलेजों में ‘गुड टच-बैड टच’ केसों की तलाश शुरू

निजी स्कूल वाहन में नर्सरी की छात्रा से हैवानियत के बाद आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के बाद एमपी पुलिस अब बचपन बचाने के लिए अब तक की सबसे बड़ी मुहिम में जुट गई है...

2 min read
Google source verification
mp_police_in_action_to_children_safety.jpg

भोपाल। निजी स्कूल वाहन में नर्सरी की छात्रा से हैवानियत के बाद आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के बाद एमपी पुलिस अब बचपन बचाने के लिए अब तक की सबसे बड़ी मुहिम में जुट गई है। पुलिस की महिला एवं बाल अपराध सेल शहर के 1300 आंगनबाड़ी केंद्रों, 200 सरकारी प्राइवेट स्कूलों और 50 निजी कॉलेजों के हजारों बच्चों को गुड और बैड टच की जानकारी देने के साथ ही इससे जुड़े केस भी तलाश रही है। इस दौरान खुलासा हुआ कि स्कूली बच्चों में से 50 फीसदी को यह पता ही नहीं कि गुड और बैड टच क्या होता है। काउंसलिंग में पुलिस ने बच्चों को जानकारी देने के साथ ही माता-पिता को तत्काल सूचना देने की समझाइश दी है।

आप भी रहें अलर्ट

- मां-बाप अपने बच्चों को जननांग और विशेष अंग के बारे में जानकारी दें।

- स्कूल बस, गार्डन या कहीं और बच्चियों को कोई गोद में बिठाने की कोशिश करे तो बच्चे मां-बाप को इसकी जानकारी दें।

- गाल पर माथे पर कोई चूमने या गले लगाने की कोशिश करे तो माता-पिता को जरूर बताएं।

- अगर बच्चा गुमसुम रहता है, कोई बात नहीं करता है तो मामला गड़बड़ है।

- बच्चा किसी विशेष जगह जैसे स्कूल ट्यूशन क्लास या रिश्तेदार के यहां जाने से कतराए तो बात करें।

- माता-पिता इस बात का ख्याल रखें कि बच्चा अपनी गोपनीय बातें दोनों में से किससे करने में सुविधा महसूस करता है।

- बच्चे के स्मार्टफोन की ऑनलाइन हिस्ट्री चेक करें। पता चल जाएगा बच्चा इन दिनों क्या देख सुन रहा है।

की जा रही है रिपोर्ट तैयार
आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल-कॉलेज में छात्र-छात्राओं और बच्चों से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं वे जाने-अनजाने में किसी घटना का शिकार तो नहीं बन रहे हैं। बच्चों से बातचीत के बाद रिपोर्ट तैयार की जा रही है। ताकि भविष्य में समस्याओं के निराकरण की ठोस योजना बनाई जा सके।
मकरंद देउस्कर, पुलिस कमिश्नर