
भोपाल। हम सभी एक ही चेतना के अंश है। पशु-पक्षी, जीव-जंतु, पेड़-पौधे सभी में एक ही चेतना विद्यमान है। सनातन दर्शन में साकार उपासक, निराकार उपासक, आस्तिक, नास्तिक जैसे विभिन्न विचारों को स्वीकार किया गया। कण-कण में ईश्वर का वास है। मेरा-तेरा छोटे दिल वालों की बात है, बड़े दिल वाले पूरे विश्व को एक समान मानते हैं। भौतिकता की अग्नि में दग्ध मानवता को शाश्वत शांति का संदेश यदि कोई दे सकता है तो केवल अद्वैत वेदांत दर्शन दे सकता है।
ये विचार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार शाम को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव पर आयोजित एकात्म पर्व कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हम पीडि़त मानवता की सेवा करने का संकल्प लें।
मानव दिव्य है और दिव्यता का प्रकटीकरण हमारे जीवन में होना चाहिए- आरिफ मोहम्मद खान
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि से चलकर यहां आया हूं। उनकी दीक्षाभूमि से मुझे आमंत्रण मिला, यह मेरा सौभाग्य है। वेदांत दर्शन एक वैश्विक दर्शन है जो मानव मात्र के लिए उपयोगी है। सनातन दर्शन में यह कहा गया है कि मानव दिव्य है और दिव्यता का प्रकटीकरण हमारे जीवन में होना चाहिए। खान ने कहा कि ये संत ही हैं जिन्होंने नैसर्गिक सिद्धांतों को खोजा और इस भूमि की धुरी को टिका कर रखा। आचार्य शंकर ने भारत की चार दिशाओं में चार मठ स्थापित किए और उन चारों मठों को चार वेदों से चार महावाक्य दिए जो कहते हैं कि जीव दिव्य चैतन्य है। आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारत का अधिकार है कि इसे विश्व गुरु होना ही चाहिए। भारत ज्ञान और विज्ञान की परंपरा के लिए संपूर्ण विश्व में जाना जाता है और ओमकारेश्वर प्रकल्प इसी दिशा में एक सराहनीय पहल है।
हिंदू धर्म वे ऑफ लाइफ नहीं है, बल्कि विजन ऑफ ट्रुथ है- परमात्मानंद सरस्वती
मुख्य वक्ता व आचार्य शंकर न्यास के न्यासी स्वामी परमात्मानंद सरस्वती ने सारस्वत उद्बोधन में कहा कि वर्तमान विश्व में अधिकांश समस्याएं हमारे व्यक्ति केंद्रित होने के कारण उत्पन्न हुई हैं। भारतीय दर्शन सदैव सिद्धांत केंद्रित रहा है। जब विभिन्न मत-मतांतरों में एकता लाने की आवश्यकता हुई, तब आचार्य शंकर का प्रादुर्भाव हुआ और उन्होंने करुणा पूर्ण रूप से सभी मतों को संस्कारित कर वैदिक दर्शन अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रचार किया। हिंदू धर्म 'वे ऑफ लाइफ' नहीं है, बल्कि 'विजन ऑफ ट्रुथ है', हम सत्य के पुजारी हैं। यह दर्शन चार पुरुषार्थों पर आधारित है, जिसमें धर्म सभी का मूल है। स्वामी परमात्मानंद ने कहा कि धर्म का अर्थ रिलीजन नहीं होता है। रिलीजन आस्था विशेष को कहते हैं और धर्म कर्तव्य विशेष को कहते हैं। अंत में उन्होंने ओंकारेश्वर प्रकल्प के महत्व को बताते हुए कहा कि यह प्रकल्प आधुनिक युग का नालंदा सिद्ध होगा।
दो विद्वजनों को किया गया सम्मानित
इस अवसर पर मार्कंडेय आश्रम ओंकारेश्वर के स्वामी प्रणवानंद, स्वामी वेदतत्त्वानंदपुरी उपस्थित थे। मध्यप्रदेश में अद्वैत वेदांत के लोकव्यापीकरण में योगदान के लिए आचार्य स्वामी प्रणवानंद सरस्वती व डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर के प्राध्यापक प्रो. अंबिका दत्त शर्मा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कर्नाटक शैली के प्रख्यात बाल गायक सूर्यगायत्री व राहुल वेल्लाल द्वारा आचार्य शंकर रचित स्तोत्रों के गायन से हुई। कार्यक्रम का समापन संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला द्वारा आभार ज्ञापन के साथ हुआ।
Updated on:
07 May 2022 11:34 am
Published on:
07 May 2022 11:31 am
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