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Adventure: सांस लेने में दिक्कत, धंसने लगे थे पैर, हर कदम पर था खतरा और रोमांच

ट्रैवल एक्सपीरियंसः उत्तराखंड में पांच दिन की यात्रा, बोग्याल, रूपकुंड और पातर बेदनी की पर्वत श्रंखलाओं में मिले कई रहस्य और कथाएं...।

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भोपाल

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Manish Geete

Aug 30, 2022

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रोमांच और नई जगहों को जानने के शौक ने उत्तराखंड की उन पहाड़ियों में पहुंचा दिया, जो रोमांच से भरपूर मानी जाती है। यहां बेदनी बोग्याल, रूपकुंड, गहरौली पाताल सहित कई जगहों तक पहुंचना अपने आप में किसी सपने के सच हो जाने जैसा था। इन पहाड़ियों में कई किस्से भी बिखरे मिले।

हरीश परविंदर और स्वामिभान सहित युवाओं के एक ग्रुप ने यहां के रोमांच को हमसे साझा किया। उन्होंने बताया भोपाल में ही यहां आने और वहां के खतरों के बारे में तफ्सील से बता दिया गया था। बस और ट्रेन फिर अपने वाहनों से पहाड़ियों तक पहुंचे। अल्मोड़ा से होते हुए इन पर्वत श्रंखलाओं से होता हुए ग्रुप रोमांच के बीच दाखिला हुआ। इनमें एक साथी स्वामिभान शुक्ला ने बताया कि पहाड़ों पर हम काफी ऊपर तक पहुंच चुके हैं।

यहां एक स्थान और उसके नाम को लेकर एक कहानी सुनने को मिली। एक छोटे से एवलांच से गुजरते हुए एक मोड़ घूमे और सामने एक स्थान रूपकुंड दिखा। इसके नाम के पीछे भी दिलचस्प कहानी है। कहते हैं कैलाश के रास्ते पर मां पार्वती को प्यास लगी थी। भोले नाथ ने एक स्थान पर त्रिशूल गड़ा दिया और पानी प्रकट हुआ था। मां पानी पीने के लिए झुकीं तो उसमें अपना रूप निहारा। इसी के चलते इस जगह का नामकरण कर दिया गया।

चढ़ाई लगातार जारी थी। रूपकुंड की पहाड़ियों में रोमांच की खोज करते हुए 12 हजार से अधिक फीट की ऊंचाई तक पूरा दल आ चुका था। स्वामिभान ने बताया कि सभी का हाल ऐसा था मानों पैर पिंडली तक धँस रहे हो। कई बार तो कदम गलत पड़ने लगे। बेदनी तक रास्ता समतल था। यहां से निकले तो उतार पर आए। कई और अनुभव हर एक के साथ थे। ट्रेक तो एक था लेकिन कहानियां सबकी अलग रही। अभी सोचता हूं तो उस रोमांच से सिहर जाता हूं।

यहां भगवान शिव का कंधा और झूलते केश भी

स्वामिभान ने बताया आगे बढ़े तो पातर और बेदनी पर मौसम खराब हो गया। यहीं एक स्थान ज्युरंगली भी पड़ता है। इसके नाम अर्थ पूछा तो बताया गया कि इसका अर्थ भगवान शिव का कन्धा और उस पर झूलते केश होता है।