
Chandrayaan-3
सूर्य की पृथ्वी से दूरी 150 मिलियन किमी है। इतनी दूरी होने के बाद भी मात्र 50 डिग्री के तापमान में सड़क का डामर पिघलने लगता है और मानव जीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसे में आदित्य-एल-1 कैसे कम करेगा। वह सूर्य से कितनी दूरी पर होगा। लोगों के मन के यह सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों को इन्हीं सवालों के जवाब जानने की कोशिश की है हमने आइआइएसईआर भोपाल में सहायक प्रोफेसर एवं अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. मयूरेश सुर्निस से।
क्या हासिल होगा सूर्य की स्टडी से?
डॉ. मयूरेश सुर्निस ने बताया कि अंतरिक्ष यान सात पेलोड लेकर जाएगा। ये पेलोड फोटोस्फीयर (प्रकाशमंडल), क्रोमोस्फीयर (सूर्य की दिखाई देने वाली सतह से ठीक ऊपरी सतह) और सूर्य की सबसे बाहरी परत (कोरोना) का जायजा लेंगे। सूर्य में होने वाली विस्फोटक प्रक्रियाएं पृथ्वी के नजदीकी स्पेस एरिया में दिक्कत कर सकती हैं। बहुत से उपग्रहों को नुकसान हो सकता है।
कितनी दूरी से होगा सूर्य का अध्ययन
डॉ. मयूरेश ने बताया कि यह एक स्टडी प्रोजेक्ट है। इसरो का आदित्य-एल-1 पंद्रह लाख किलोमीटर की दूरी से सूर्य का अध्ययन करेगा। सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के एल के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित करने की योजना है। सूर्ययान लैग्रेंजियन पॉइंट 1 (एन1) के चारों ओर एक हेलो ऑर्बिट में तैनात रहेगा। एन-1 पॉइंट की धरती से दूरी 1.5 मिलियन किमी है, सूर्य की पृथ्वी से दूरी 150 मिलियन किमी है।
यह है प्लान
●इसरो श्रीहरिकोटा से 2 सितंबर को आदित्य एल-1 लॉन्च करेगा।
●आदित्य-एल1 पूरी तरह स्वदेशी प्रयास है, यह 4 महीने में पहुंचेगा।
●सूरज के एल1 पॉइंट की धरती से दूरी 1.5 मिलियन किलोमीटर।
विपरीत परिस्थितियों में कैसे सुरक्षित रहेगा
उन्होंने बताया कि आदित्य-एल-1 को यदि किसी भी तरह का नुकसान होने की वार्निंग मिलती है, तो इसरो वैज्ञानिक उसे कमांड देंगे जिससे यान में लगे मैग्नेट फिल्टर के आवरण से वह खुद को ढक कर सुरक्षित करेगा। इससे उसे नुकसान नहीं होगा।
Published on:
31 Aug 2023 04:44 pm
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