
AIIMS Bhopal (फोटो सोर्स : @AIIMSBhopal)
AIIMS Bhopal: एम्स, भोपाल के ब्लड बैंक से हाल ही में हुई प्लाज्मा चोरी का संबंध प्लाज्मा यूनिटों की अवैध बिक्री से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह से है। अब तक गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों से पूछताछ से यह संकेत मिलता है कि चोरी किया गया प्लाज्मा दूसरे राज्यों में भी भेजा गया था। यह मामला पहली बार 28 सितंबर को सामने आया था, जब एम्स के सुरक्षाकर्मियों को अस्पताल के ब्लड बैंक में कार्यरत 26 वर्षीय आउटसोर्स कर्मचारी अंकित केलकर के बैग में दो प्लाजुमा यूनिट मिले थे।
अस्पताल प्रबंधन ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें कथित तौर पर अंकित को एक ही दिन में कई बार प्लाज्मा यूनिट चुराते हुए दिखाया गया था। इसके बाद ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. ज्ञानेंद्र प्रसाद की शिकायत के बाद, बागसेवनिया पुलिस ने मामला दर्ज किया था। पुलिस की जांच से पता चला कि अंकित कई हफ्तों से प्लाज्मा चुराकर बैरागढ़ के एक निजी अस्पताल में काम करने वाले अपने दोस्त अमित जाटव को बेच रहा था। दोनों को दो दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के बाद, पुलिस ने अमित के एक दोस्त लकी को हिरासत में लिया।
लकी ने कबूल किया कि उसने अंकित और अमित से 500 से 1,000 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से प्लाज्मा(AIIMS Bhopal) यूनिट खरीदी और अपने भाई दीपक को दीं, जिसने कथित तौर पर उन्हें 5,000 रुपए प्रति यूनिट तक की ऊंची कीमत पर बेचा।
नासिक में रहने वाला दीपक पहले लकी और एक स्थानीय डॉक्टर के साथ सीहोर में एक पैथोलॉजी लैब और ब्लड बैंक चलाता था। दोनों ने चिकित्सा क्षेत्र में अपने पुराने संपर्कों का इस्तेमाल चोरी किए गए प्लाज्मा को विभिन्न राज्यों के क्लीनिक और लैब में पहुंचाने के लिए किया होगा। एसीपी रजनीश कश्यप कौल ने बताया कि दीपक को गिरफ्तार करने के लिए एक पुलिस टीम नासिक भेजी गई है। रैकेट का दायरा और चोरी का प्लाज्मा कहां पहुंचाया गया, इसका खुलासा दीपक की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही होगा।
Updated on:
11 Oct 2025 08:05 am
Published on:
11 Oct 2025 08:05 am
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