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गोविंद सक्सेना/सोनू श्रीवास्तव, विदिशा. आदर्श गांव बनाने के लिए तत्कालीन विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने त्योंदा को गोद लिया था। उन्होंने भूमिपूजन कार्यक्रम में कहा था, अब दुनिया त्योंदा को खोजेगी। यदि त्योंदा को अच्छा नहीं बना सके तो सरकार में रहने से क्या मतलब। पहली किस्त में सवा करोड़ रुपए मिले तो लगा इस गांव की काया पलट जाएगी, लेकिन उनके मंत्रिमंडल से हटते ही विकास के काम भी धीमे हो गए। अकबर ने अर्से से मध्यप्रदेश का रुख नहीं किया। इससे राशि होने के बाद भी कई कामों की शुरुआत ही नहीं हो पाई है।
हालांकि, त्योंदा ओडीएफ घोषित हो चुका है, लेकिन पिछले कुछ महीने से लोगों की उम्मीदें टूटने लगी हैं। यह भी कम दिलचस्प नहीं है कि विदिशा लोकसभा क्षेत्र विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का है। मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद अकबर उन्हीं के अधीनस्थ राज्यमंत्री थे, इसलिए उन्होंने विदिशा के त्योंदा का चयन किया था। प्रशासन से इसके विकास के लिए प्रस्ताव मांगे थे। प्रशासन ने प्रस्ताव बनाकर भेजे तो 1.24 करोड़ रुपए पहले चरण में स्वीकृत हुए थे। गांव के तीन दौरे किए और अप्रैल 2018 में कई निर्माण कार्यों का शिलान्यास भी किया था।
- सांस्कृतिक भवन, कंप्यूटर लैब फाइलों में
सरकार और प्रशासन ने त्योंदा के विकास में तेजी दिखाई थी। इससे 24 लाख की लागत के तीन आंगनबाड़ी भवन तय समय में बनकर तैयार हो गए। 50 लाख रुपए की लागत से प्रस्तावित सांस्कृतिक भवन, छात्राओं के लिए बनने वाली कंप्यूटर लैब और पुस्तकालय का निर्माण फाइलों में दबकर रह गया। प्रशासन ने आदर्श ग्राम के लिए जो सुविधाएं प्रस्तावित की थीं, उनमें से अधिकांश अभी शुरू भी नहीं हो सकी हैं। पहले चरण का काम ही अधूरा है तो आगे की राशि का भी अता-पता नहीं है।
- सड़क और नाली निर्माण अधूरा
गांव में सड़क और नाली का निर्माण अधूरा है। कुछ वार्डों के लिए सड़क बन गई है, लेकिन एक-दूसरे को जोड़ा नहीं गया है। नाली निर्माण नहीं होने से गंदा पानी रास्तों में भरा रहता है। कूड़ेदान नहीं रखे जाने से गंदगी मैदान और सड़कों में बिखरी रहती है। खेल मैदान का भी विकास नहीं हो पाया है। इससे बच्चों को ऊबड़-खाबड़ जगह में खेलना पड़ रहा है।
- बगर्रू बांध के भरोसे सिंचाई
त्योंदा गांव 20 किलोमीटर दूर स्थित बगर्रू बांध के भरोसे है। नहर से पानी खेतों तक पहुंच रहा है, लेकिन पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पाने के कारण ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ रहा है। पेयजल की सुविधा पहले से है। नल-जल योजना से हर दिन सप्लाई हो रही है।
- दवाई के लिए विदिशा की दौड़
गांव में स्वास्थ्य केंद्र होने के बाद भी उपचार के लिए विदिशा की दौड़ लगानी पड़ती है। इसकी बड़ी वजह है डॉक्टर की स्थायी व्यवस्था नहीं होना है। सबसे अधिक समस्या महिलाओं को होती है, वादे के बाद भी महिला चिकित्सक की पदस्थापना नहीं की गई है।
- त्योंदा (जिला विदिशा)
घर- 765
जनसंख्या- 3884
पीएम आवास- 54 स्वीकृत। 50 बनकर तैयार।
** आदर्श ग्राम में प्रस्तावित सुविधाओं का हाल
- ये काम हुए
सौ प्रतिशत परिवारों के लिए शौचालय का निर्माण हुआ।
श्मशान का निर्माण होना था, हो गया।
25 लाख रुपए से स्वसहायता समूहों के प्रशिक्षण के लिए आजीविका केंद्र खोला गया है।
- इन सुविधाओं का इंतजार
सुलभ शौचालय का निर्माण नहीं हुआ।
प्रत्येक 20 परिवारों के लिए कूड़ेदान की व्यवस्था होना थी, नहीं हो सकी।
गांव में सीमेंट-कांक्रीट रोड और नाली बनना थीं, कुछ बनीं।
बालिकाओं के लिए अलग से हायर सेकंडरी स्कूल नहीं बन सका।
मंदिर का आंशिक सौंदर्यीकरण हुआ।
किले का विकास नहीं किया गया।
खेल मैदान का विकास नहीं हो सका।
डाकघर का भवन बनना था, नहीं बन सका, अब भी किराए के भवन में लगता है डाकघर।
पंचायत का विश्राम गृह बनना था, नहीं बन सका।
अस्पताल में महिला डॉक्टर की पदस्थापना नहीं हो सकी।
हाट बाजार के लिए स्थान का निर्धारण नहीं हो सका।
प्रमाणित बीज क्रय के लिए दुकान नहीं खुल सकी।
आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित होने के बाद शाला और बच्चों के स्तर में भी सुधार हुआ है। बच्चों की संख्या बढ़ी है, अधिकारियों का आना-जाना बढऩे से बच्चों को प्रोत्साहन मिला है।
- योगेश चतुर्वेदी, शिक्षक, शाउमावि त्योंदा
आदर्श ग्राम योजना के तहत 1.24 करोड़ रुपए पहले चरण में स्वीकृत हुए थे। उससे तीन आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन बन चुके हैं। सांस्कृतिक भवन नहीं बन सका है। कम्प्यूटर लैब बन रही है।
- प्रशांत श्रीवास्तव, सरपंच, त्योंदा
Published on:
26 Jan 2019 05:17 am
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