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यहां है 300 साल पुरानी हस्तलिखित वाल्मीकि रामायण, अब इस ‘पांडुलिपि संग्रहालय’ में सजेंगी कृतियां, होंगे शोध

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) में कई ऐसी पांडुलिपियां हैं जो विश्व में और कहीं भी नहीं है। यह पांडुलिपियां विवि की लाइब्रेरी में संरक्षित तो हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल इतिहास की जानकारी के लिए नहीं हो पा रहा है...

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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) में कई ऐसी पांडुलिपियां हैं जो विश्व में और कहीं भी नहीं है। यह पांडुलिपियां विवि की लाइब्रेरी में संरक्षित तो हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल इतिहास की जानकारी के लिए नहीं हो पा रहा है। विद्यार्थियों को भी इनका लाभ मिल सके। इसके लिए विश्वविद्यालय में पांडुलिपि संग्रहालय बनाने की तैयारी की जा रही है। इस संग्रहालय में ऐसे लोग भी अपने ग्रंथों को दान कर सकेंगे, जिनके पास हस्तलिखित सैकड़ों वर्ष पुरानी पांडुलिपियां हैं। संग्रहालय कहां तैयार किया जाएगा, किस तरह का होगा इसकी रूपरेखा विवि की कमेटी द्वारा जल्द तैयार की जाएगी। वर्तमान में बीयू के केंद्रीय पुस्तकालय में लगभग 85,000 पुस्तकें और कुछ ऐसी पांडुलिपियां हैं जो 200 से तीन वर्ष पुरानी है। विश्वविद्यालय संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। राज भवन मध्य प्रदेश, उच्च शिक्षा विभाग और एनआइसी दिल्ली द्वारा लगातार सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

85 ग्रंथ और पांडुलिपियों का संग्रह

बीयू देश की एक मात्र यूनिवर्सिटी है, जहां वाल्मीकि रामायण की हस्तलिखित प्रति मौजूद है। करीब 300 साल पुरानी है। इसके अलावा श्रीमद्भागवत गीता, भवानी कवच, श्रृंगार सप्तशती, गंगा स्तोत्र, देवी रहस्य शिव सहस्त्रनाम, वेत्रतती अष्टक, कुमारसंभव, अथ मकरंद विवर्ण, रत्नमाला, भाषा भारत सार, हरिवंशप्रारंभसहतीलक, गोवर्धन सप्तशती, श्रृगार सप्तशती सहित अन्य ग्रांथ मौजूद हैं। यह सभी पांडुलिपियां 200 से 250 साल पुरानी हैं।

नैक ने ग्रंथों को सुरक्षित करने की दी थी सलाह

राष्टीय मूल्यांकन एवं प्रत्ययन परिषद (नैक) की टीम ने 28 मार्च को बीयू की लाइब्रेरी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान टीम ने लाइब्रेरी को डिजिटल करने एवं 300 साल पुरान ग्रंथों को सुरक्षित करने का सुझाव दिया था।

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आम लोग भी देख सकेंगे संग्रहालय

यह संग्रहालय केवल छात्र-छात्राओं के लिए ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी होगा। कोई भी लाइब्रेरी में आकर धार्मिक ग्रांथों को पढ़ और देख सकेगा। लोग चाहें तो यहां ग्रंथ दान भी कर सकते हैं।

जल्द तैयार की जाएगी रूपरेखा

विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में कई दुर्लभ ग्रंथ हैं। कई पांडुलिपियां हैं। विश्वविद्यालय द्वारा वर्षों से इनका संरक्षण किया जा रहा है। इन ग्रंथों का लाभ छात्र और आम लोगों को भी मिल सके इसलिए विश्वविद्याल में पांडुलिपि संग्रहालय बनाया जाएगा। इसलिए रूपरेखा जल्द तैयार की जाएगी।

- प्रो. एसके जैन, कुलपति, बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी

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