6 जून 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राज्यसभा के लिए मीनाक्षी नटराजन पर कांग्रेस का दांव क्यों? पूर्व प्रधानमंत्री के करीबी को दी थी मात

Rajya Sabha Elections 2026: कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह की राज्यसभा सीट से पूर्व लोकसभा सांसद और राहुल गांधी की करीबी माने जाने वाली मीनाक्षी नटराजन को उच्च सदन भेजने का निर्णय लिया है।

2 min read
Google source verification

भोपाल

image

Akash Dewani

Jun 06, 2026

Rajya Sabha Elections 2026

Why is Congress chose choosing Meenakshi Natarajan for Rajya Sabha (फोटो-Meenakshi Natrajan X Handle)

Rajya Sabha Elections 2026: मध्य प्रदेश में जून में राज्यसभा की 3 सीटें खाली हो रहीं हैं। खाली हो रही इन सीटों में से एक सीट कांग्रेस की है जिसके लिए पार्टी ने अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। कांग्रेस ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की राज्यसभा सीट से पूर्व लोकसभा सांसद और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की करीबी माने जाने वाली मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natrajan) को उच्च सदन भेजने का निर्णय लिया है। प्रदेश में कांग्रेस के तमाम चेहरों के बीच पार्टी आलाकमान ने मिनाक्षी नटराजन चुना गया। नटराजन साल 2009 में पूर्व प्रधानमंत्री के करीबी और भाजपा के कद्दावर नेता को लोकसभा चुनाव हराने के बाद सुर्ख़ियों में आई थी। अब कांग्रेस उन्हें राज्यसभा के रास्ते वापस दिल्ली की राजनीति लाने की कोशिश कर रही है।

2009 में रोका था भाजपा का विजयरथ

मिनाक्षी नटराजन, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की टीम की मानी जाती है। नटराजन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) राष्ट्रीय अध्यक्ष और युवा कांग्रेस (IYC) की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं लेकिन उनकी राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी जीत साल 2009 में आई। दरअसल, मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की मंदसौर लोकसभा सीट पर भाजपा कब्जा जमा रखा था। यहां 'मालवा के गांधी' के नाम प्रसिद्ध लक्ष्मीनारायण पांडे लगातार 6 बार से सांसद थे।

कांग्रेस ने 1989 से लेकर 2004 के लोकसभा चुनाव तक कई बड़े नेताओं को टिकट दिया लेकिन सभी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Former PM Atal Bihari Vajpayee) के करीबी लक्ष्मीनारायण पांडे से हार का सामना करना पड़ा। 20 सालों तक लगातार हारने के बाद कांग्रेस ने रणनीति बदली और राहुल गांधी की टीम से उज्जैन के नागदा में जन्मी गांधीवादी नेत्री मिनाक्षी नटराजन को मंदसौर के रण में उतारा। 2009 लोकसभा चुनाव में यह रणनीति काम कर गई और मीनाक्षी की जीत ने कांग्रेस को भाजपा के विजयरथ को रोकने में मदद की। उन्होंने 30819 वोटों से भाजपा कद्दावर नेता को शिकस्त दी थी।

मिनाक्षी नटराजन ही क्यों?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मीनाक्षी नटराजन ने पूर्व में बड़े भाजपा नेता को मात दी है। इस पर कांग्रेस उन्हें राज्यसभा भेजकर ये दिखाना चाहती है कि जो नेता पार्टी के लिए इतनी बड़ी जीत लेकर आया हो और जिसकी छवि साफ होने के साथ जो पार्टी के मूल सिद्धांतों (गांधीवाद) से जुड़ी हो उन्हें इस तरह छोड़ा नहीं जा सकता है। उनके योगदान का फल उन्हें मिलना चाहिए। इसके अलावा कांग्रेस नटराजन के नाम से पीढ़ीगत बदलाव का भी संकेत देना चाहती है जिसके तहत पार्टी का नया नेतृत्व तैयार किया जाए। इसके अलावा ग्रैंड ओल्ड पार्टी महिला कार्ड खेलकर एक पॉजिटिव मैसेज भी देने चाहती है।

राहुल गांधी के अभियान के तहत पार्टी से जुड़ी, पसंद आई गांधीवादी जीवनशैली

बता दें कि, राहुल गांधी ने साल 2007 में इंडियन युथ कांग्रेस और NSUI का महासचिव बनाए जाने के बाद साल 2008 में जमीनी स्तर के युवाओं को कांग्रेस में शामिल करने के अभियान के तहत उज्जैन के नागदा शहर से मिनाक्षी नटराजन को अपनी टीम में शमिल किया थे। उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी (AICC) का सचिव बनाया गया था।नटराजन की 'गांधीवादी' जीवनशैली ने राहुल सहित गांधी परिवार के अन्य सदस्यों का ध्यान आकर्षित किया था।