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10 साल बाद भोपाल को दूसरे बायपास की मंजूरी, 15 साल से लगी थी आस

भोपालवासियों की 15 साल पुरानी उम्मीदों को पंख लग गए हैं। 10 साल बाद शहर को दूसरे बायपास की मंजूरी मिली है। दो से तीन साल में इसका निर्माण पूरा हो जाने के बाद एक तरह से राजधानी में कुल 93 किमी लंबी रिंग रोड हो जाएगी।मी का रिंग रोड हैदराबाद में एनएचएआई ने बनाया है।

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भोपाल. राजधानीवासियों की 15 साल पुरानी उम्मीदों को पंख लग गए हैं। 10 साल बाद शहर को दूसरे बायपास की मंजूरी मिली है। दो से तीन साल में इसका निर्माण पूरा हो जाने के बाद एक तरह से राजधानी में कुल 93 किमी लंबी रिंग रोड हो जाएगी। जबकि इंदौर में करीब 145 किमी लंबी रिंग रोड प्रस्तावित है। यह देश की दूसरी सबसे बड़ी रिंग रोड होगी। जबकि, देश का सबसे बड़ा 156 किमी का रिंग रोड हैदराबाद में एनएचएआई ने बनाया है।

पहला बायपास 2013 में
राजधानी का पहला बायपास उत्तर-पूर्व क्षेत्र है। चार लेन के इस बायपास का निर्माण 2013 में हुआ था। यह भोपाल-औबेदुल्लागंज 46 से शुरू होकर रायसेन रोड, विदिशा, बैरसिया और ब्यावरा रोड को क्रॉस करते हुए भोपाल-देवास मार्ग को भौरी जोड़ पर मिलता है। इसकी कुल लंबाई 52 किमी है।
जानिए पैसे का गणित
राजधानी के दूसरे दक्षिण पश्चिम-भोपाल बायपास के लिए कैबिनेट ने तीन हजार करोड़ की मंजूरी की है। इसमें भू अर्जन में 427 करोड़। पर्यावरण प्रबंधन में 15 करोड़ का खर्च प्रस्तावित है। ब्याज समेत मूल सड़क निर्माण की लागत 1743 करोड़ आएगी। 1784 करोड़ एन्यूटी के जरिए 15 वर्षों में जुटाया जाएगा। प्रोजेक्ट कॉस्ट की 40 प्रतिशत राशि पांच किश्तों में दी जाएगी। शेष 60 फीसदी राशि सड़क बनने के बाद 15 वर्षों तक मिलेगी। इस तरह 40 प्रतिशत यानी 697 करोड़ का भुगतान निर्माण अवधि के दौरान होगा। इसके अलावा पर्यावरण की अनुमति, यूटिलिटी शिफ्टिंग आदि पर भी राशि खर्च होगी। इसीलिए अनुमानित लागत 2981 करोड़ आंकी गयी है। हालांकि बजट ३००० करोड़ मंजूर हुआ है। हाइब्रिड एन्यूटी मोड पर बनाएंगे
85 गांवों में विकास के रास्ते खुलेंगे
यह बायपास हुजूर विधानसभा के अधिकांश क्षेत्रों को कवर करेगा। इससे भोपाल से देवास ज्वाला माई का दर्शन आसान हो जाएगा। यह इंदौर-देवास से नर्मदा मैया के लिए धार्मिक कॉरिडोर का काम करेगा। भोपाल के कोलार, नीलबड़-रातीबड़ के अलावा रायसेन के मंडीदीप और सीहोर जिले को मिलाकर कुल ८५ गांवों को इससे फायदा होगा।

कहां से कोलार सिक्सलेन से होता हुआ
कहां तक- होशंगाबाद रोड और भोपाल-इंदौर रोड को जोड़ेगा
फायदा-जबलपुर-नर्मदापुरम से इंदौर-मुंबई जाने की दूरी 25 किमी कम होगी

क्या क्या बनेगा
1 रेलवे ब्रिज, 2 फ्लाइओवर और 15 अंडरपास के अलावा एक सिक्स लेन आरओबी व दो बड़े जंक्शन बनेंगे। प्रोजेक्ट के बीच में भोपाल-इटारसी रेलवे लाइन आएगी।
कितनी जरूरत होगी जमीन की
इय रिंग रोड के लिए करीब 600 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी। इसमें फॉरेस्ट की करीब 75 एकड़ से ज्यादा जमीन आएगी। 525 एकड़ से ज्यादा जमीन निजी लोगों की है।
2 साल की समय सीमा तय

इस बायपास को पहले पीडब्ल्यूडी ने बनाने की प्लानिंग की थी। अब इसे बनाने की एमपीआरडीसी को जिम्मेदारी दी गयी है। डीपीआर एलएन इंफ्रा ने बनाया है।