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अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस : सप्रे संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में बोले पुरातत्व एवं संग्रहालय आयुक्त

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आएंगे सभी संग्रहालय

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अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस : सप्रे संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में बोले पुरातत्व एवं संग्रहालय आयुक्त

भोपाल। अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर शुक्रवार को शहर के संग्रहालयों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। मानव संग्रहालय में खजाने की खोज व प्रदर्शनी, सप्रे संग्रहालय में व्याख्यान, ट्राइबल म्यूजियम में चित्रकला प्रतियोगिता, रीजनल साइंस सेंटर में मेरा संग्रह प्रदर्शनी, क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय में क्ले मॉडलिंग कार्यशाला और राज्य संग्रहालय में वल्र्ड म्यूजियम बेस्ड फोटो एग्जीबिशन का आयोजन किया गया।

राज्य संग्रहालय में विश्व के प्रसिद्ध संग्रहालयों पर केंद्रित प्रदर्शनी की शुरुआत हुई। एग्जीबिशन में 20 देशों के संग्रहालयों की 100 से ज्यादा फोटो एग्जीबिट की गई है। इसमें विश्व के सबसे पुराने संग्रहालय यूरोप के फोटोज भी शामिल है। इंग्लैंड में बने संग्रहालय की स्थापना 1753 में की गई थी। वहीं, 1759 में इसे जनता के लिए खोला गया था।

एग्जीबिशन में राज्य संग्रहालय, मानव संग्रहालय के साथ दिल्ली का राष्ट्री संग्रहालय, प्रिंस ऑफ वेल्स, मुंबई और भारतीय संग्रहालय कलकत्ता की चुनिंदा फोटो भी लगाई गई है। भारत में सबसे पहले कलकत्ता में 1872 में संग्रहालय शुरु हुआ था। ये एग्जीबिशन में 24 मई तक चलेगी। लंदन स्थित ब्रिटिश संग्रहालय में सात लाख से ज्यादा कृतियों को संग्रहित किया गया है। यहां विश्वभर से लाई गईं कृतियों को जगह दी गई है। लगभग ढाई दशक तक इस संग्रहालय के विस्तार का काम चला। अब इसके कई स्थानों पर क्षेत्रीय संग्रहालय भी शुरू हो चुके हैं। इस संग्रहालय को वहां के संस्कृति, प्रचार और खेल विभाग से आर्थिक सहायता मिलती है। वहीं रूस के सेंट पीट्र्सबर्ग के राज्य हर्मिटेज संग्रहालय की स्थापना 1764 में कैथरिन ने की थी। इसे आम जनता के लिए 1852 में खोला गया। यहां विश्व प्रसिद्ध तीन हजार से ज्यादा कृतियां रखी गई हैं। 6 मंजिला संग्रहालय में रूसी शासकों से मिली वस्तुओं को भी स्थान दिया गया है।

संग्रहालय का मूल ध्येय है ज्ञान की वृद्धि और प्रसार : अत्रे

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डा. सुभाष अत्रे ने बताया कि 18वीं शताब्दी में संग्रहालय की अवधारणा विकसित हुई। जिसे 19वीं सदी में आधुनिक रूप मिला। इससे पहले निजी संग्रहों तक ही संग्रह की भावना मौजूद थी। ‘ज्ञान की वृद्धि और प्रसार’ संग्रहालय का मूल ध्येय है। भारत में सर विलियम जोन्स को एशियाटिक सोसायटी की स्थापना और जिसके अंतर्गत उन्हें इम्पीरियल म्यूजियम कायम करने का श्रेय जाता है। कार्यक्रम में संग्रहालय के संस्थापक व संयोजक विजयदत्त श्रीधर, डॉ. मंगला अनुजा, राकेश दीक्षित, कृष्ण गोपाल व्यास, चंद्रकान्त नायडू, डॉ. शिवकुमार अवस्थी समेत अन्य प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

वैकल्पिक तरीकों पर भी करें विचार

‘हाइपर कनेक्टिविटी इन म्यूजियम्स-नीड्स एंड चैलेन्जेस इन इंडियन कॉटेक्स्ट’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान, नई दिल्ली की प्रो. मानवी सेठ ने कहा कि वर्तमान आधुनिक परिवेश में लोगों तथा समुदायों के बीच आपसी संवाद स्थापित करने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है इसलिए दुनियाभर के विविध संग्रहालय लोगो के साथ जुडने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर रहे है। लेकिन संग्रहालयों को इसके साथ-साथ संग्रहालयों से अछूते दर्शकों को जोडऩे के लिए वैकल्पिक तरीकों पर भी विचार करना होगा।

जनजातीय जीवन और खेलों को बच्चों ने चित्रों में उकेरा

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर ‘बच्चों की दृष्टि में जनजातीय संग्रहालय’ विषय पर केन्द्रित चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसका शुभारम्भ अक्षय कुमार सिंह संचालक, संस्कृति संचालनालय ने किया। इस अवसर पर अक्षय कुमार सिंह ने प्रतिभागी बच्चों को चित्रकला के परिप्रेक्ष्य में कई बातें भी बताईं। एक दिवसीय चित्रकला प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने जनजातीय जनजीवन, संस्कार, खेलों और देवताओं सहित कई सन्दर्भों पर केन्द्रित चित्र बनाए। इस प्रतियोगिता में तीन आयु वर्ग समूह 6 से 9 वर्ष, 9 से अधिक और 12 वर्ष से कम, 12 से अधिक और 16 वर्ष कम आयु के बच्चों ने भाग लिया।

माटी के मगरमच्छ और हाथी में दिखी बच्चों की क्रिएटिविटी

क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय में शुक्रवार को ‘मिट्टी से जीव-जतुओं के मॉडल बनाओ कार्यशाला’ का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं जैसे परवरिश - द म्यूजियम स्कूल, नित्यसेवा संस्था, बचपन संस्था, अमिट संस्था, अरण्य संस्था से 58 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान संग्रहालय के वैज्ञानिक-बी, मानिक लाल गुप्त ने सभी प्रतिभागियों को बताया कि आज सम्पूर्ण विश्व में अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जा रहा है। इसी उपलक्ष्य में यह संग्रहालय सबसे बड़े स्थलीय प्राणी हाथी एवं जलीय मगरमच्छ को बनाना सिखा रहा है। वर्कशॉप में कला शिक्षक परीक्षित धुर्वे और संग्रहालय के प्रादर्श निर्माता अरविन्द्र अनुपम के मार्गदर्रून में विद्यार्थियों ने मिट्टी से मगरमच्छ, हाथी आदि जीव-जंतुओं के मॉडल बनाए। इसके बाद गर्मी पर आधारित फिल्म फ्रिज दिखायी गई। साथ ही वन्यजीवों एवं पर्यावरण पर आधारित अनेक फिल्में भी दिखायी गईं।