
अटल बिहारी वाजपेयी ने चीनी के दामों पर सरकार को घेरा था - : फोटो सोर्स : AI Grok
Sugar Prices : शक्कर के बढ़ते दामों के कारण देशभर के लोग हलाकान हैं। एमपी में भी अधिकांश जगहों पर चीनी 62 रुपए प्रति किलो के भाव से बिक रही है। शक्कर की कीमत करीब एक माह में ही 20 रुपए बढ़कर 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थी। सरकारी प्रयासों से दामों पर कुछ अंकुश लगा और फुटकर में भाव करीब 8 रूपए किलो घटे पर कुछ दिनों में इसमें फिर वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है। महंगी हुई शक्कर पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बेतुका बयान देते हुए कहा… भाव और बढ़ जाए, मुझे क्या! राज्य के कुछ अन्य मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने भी शक्कर की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बचाव किया था। ऐसे में उन्हीं की पार्टी के दिग्गज नेता, देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी का एक बयान वायरल हो रहा है जिसमें वे चीनी के बढ़ते दामों पर संसद में तत्कालीन सरकार को घेरते नजर आ रहे हैं। वे अपने चिर परिचित अंदाज में कह रहे हैं- चीनी की मार हमेशा मीठी नहीं होती…
स्टाक और आपूर्ति पर सरकार द्वारा निगरानी बढ़ाए जाने के बाद शक्कर के दाम कुछ कम हुए हैं पर अब त्योहारी सीजन आ रहा है। जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी से लेकर नवरात्रि और दीपावली जैसे महापर्व आ रहे हैं। बाजार की मिठाई के साथ ही घरों में पकवान बनने से शक्कर की खपत और मांग बढ़ेगी। ऐसे में त्योहारों के दौरान शक्कर के दाम में दोबारा उछाल भी आ सकता है। इससे उपभोक्ता आशंकित हैं।
चीनी के दामों में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी पर विपक्षी दल हमलावर हैं जबकि केंद्र सरकार और बीजेपी कई तरह के तर्क देकर बचाव कर रही है। इसी गहमागहमी में सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो 90 के दशक का है जिसमें बीजेपी नेता अटल बिहारी वाजपेयी की संसद में उदबोधन की एक क्लिप दिखाई गई है। इसमें वे चीनी के बढ़ते दामों को लेकर अपने चिरपरिचित अंदाज में तत्कालीन कांग्रेस सरकार को घेरते नजर आ रहे हैं।
वीडियो में अटल बिहारी वाजपेयी कह रहे हैं -
चीनी 20 रुपए तक पहुंची, ये क्यों हुआ, क्या सरकार को पता नहीं था कि गन्ने का उत्पादन कम होगा, चीनी कम पड़ेगी। क्या आयात की पहले से व्यवस्था नहीं होनी चाहिए थी! आयात कौन करेगा, यह भी तय नहीं हुआ… एक मंत्रालय दूसरे को दोष देता रहा …एक मंत्री अपने सचिव को सार्वजनिक रूप से डांट लगाता है, प्रधानमंत्री का सचिवालय क्या करता है कुछ पता नहीं है… अध्यक्ष महोदय, चीनी के दाम खुले बाजार में जिस तरह से बढ़े हैं उसमें करोड़ों का वारा न्यारा हुआ है। चीनी के उद्योगपतियों ने कमाया है और व्यापारियों ने भी लाभ उठाया है …
चीनी का घोटाला पहली बार नहीं हुआ है… 1989 में हिमाचल के हमारे पंडित सुखरामजी… वो अभी तक चीनी की मार भूले नहीं हैं…चीनी की मार हमेशा मीठी नहीं होती है कभी कभी चीनी बहुत कड़वी हो जाती है…और आज देश में ऐसी स्थिति पैदा हो गई है… यह बहुत गंभीर मामला है…
Updated on:
30 Aug 2026 01:53 pm
Published on:
30 Aug 2026 01:44 pm
