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प्रदेश में इन डक्टर्स के नर्सिंग होम खोलने पर लगी पाबंदी, डॉक्टर्स विजिट पर भी रोक

सरकार ने बदला 48 साल पुराना नर्सिंग होम एक्ट, नर्सिंग होम के रजिस्ट्रेशन की फीस बढ़ी।
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भोपाल। मध्य प्रदेश में कोरोना काल में नर्सिंग होम को लेकर मिली शिकायतों और अन्य पैथियों में इलाक करने की पढ़ाई कर चुके डॉक्टर्स को लेकर बड़ा फैसला किया है। सरकार ने नर्सिंग होम एक्ट में बदलाव करते हुए आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा पैथी के चिकित्सक के एलोपैथी का नर्सिंग होम पर रोक लगा दी है।

हालाकि नए संसोधन के तहत एलोपैथी के डॉक्टर्स भी आयुष का नर्सिंग होम नहीं खोल सकेंगे। प्रदेश में 13 अक्टूबर को राजपत्र में इसकी अधिसूचना भी प्रकाशित हो चुकी है। अब यह अधिनियम प्रदेश में लागू हो गया है। नर्सिंग होम एक्ट में संसोधन में एक रेसीडेंट डॉक्टर को लेकर भी नियम बनाया गया है अब ये केवल एक अस्पताल में ही अपनी सेवाएं दे सकेगें।

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संसोधित नर्सिंग होम एक्ट के तहत नर्सिंग होम के पंजीयन की फीस में भी बढ़ोत्तरी कर दी गई है पहले 10 बिस्तर के अस्पताल के लिए पहले 600 रुपये फीस थी, जो 3000 रुपये देनी होगी। अब डॉक्टर, नर्स या अन्य कर्मचारी की जानकारी पंजीयन में देने के बाद, नौकरी बदलने पर भी तुरंत जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को देनी होगी। सौ बिस्तर या इससे कम बेड वाले नर्सिंग होम के लिए 25 प्रतिशत बिस्तर आक्सीजन वाले रखने अनिवार्य होंगे। 20 या उससे कम बिस्तर वाले अस्पताल कम से कम एक रेजीडेंट चिकित्सक रखना होगा। अब ओपीडी के आधार पर 50 से ज्यादा मरीज होने पर एक और अतिरिक्त डॉक्टर रखना होगा।

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नर्सिंग होम एक्ट 1973 में अभी तक यह स्पष्ट नहीं था। इसकी वजह से ही प्रदेश में एक डाक्टर का कई अस्पतालों में मरीजों को देखता था। अब संसोधन के बाद प्रदेश के कई अस्पताल ऐसे हैं जिनमें डॉक्टर्स विजिटिंग के आधार पर सेवाए दे रहे थे अब ऐसे सभी अस्पताल बंद हो जाएंगे। प्रदेश में अस्पताल के पंजीयन के रिन्यू कराने के साथ ही रेजिडेंट डॉक्टर्स का नाम देना होगा। अगर राजधानी भोपाल की बात करें तो एक रेसीडेंट डाक्टर का नाम 6 से लेकर 12 अस्पतालों में दर्ज है।

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