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Education Loan - उच्च शिक्षा के मामले में युवाओं के सपने अधूरे रहने की नौबत है। वजह है एजुकेशन लोन का न मिलना। गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवन यापन करने वाले परिवारों के बच्चों सहित अन्य वर्ग के छात्रों को भी उच्च शिक्षा के लिए
एजुकेशन लोन का सहारा लेना पड़ता है। चिंता की बात यह है कि मध्यप्रदेश MP में केंद्र सरकार की विभिन्न ऋण योजनाओं के अंतर्गत किए जा रहे आवेदनों में से करीब 50 प्रतिशत आवेदन विभिन्न कारणों से रिजेक्ट हो रहे हैं। यानि लोन नहीं मिल रहा।
शिक्षा मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश आंकड़ों के बाद इस तथ्य का खुलासा हुआ है। मध्यप्रदेश को लेकर आंकड़े सामने आए हैं कि बीते तीन वर्ष में 22728 बच्चों की ओर से एजुकेशन लोन के आवेदन किए गए। इनमें से 10181 आवेदन रिजेक्ट हो गए। सिर्फ 12547 छात्रों को एजुकेशन लोन मिल पाया। 8065 छात्रों ने आवेदन वापस लिए या बैंकों ने बंद किए।
1.
खराब क्रेडिट हिस्ट्री: अगर आवेदक छात्र या सह- आवेदक जैसे माता- पिता का सिबिल स्कोर कम है या पहले से लोन का रिकॉर्ड खराब है तो आवेदन रिजेक्ट हो जाता है।
2.
को-एप्लीकेंट की आय कम: बैंकों में देखा जाता है कि जो
व्यकि्त लोन चुकाएगा उसकी आय स्थिर और पर्याप्त है या नहीं।
3.
मान्यता प्राप्त संस्थान नहीं होना: जिस कॉलेज से पढ़ाई करना चाहते हैं, वह अगर मान्यता प्राप्त नहीं है या उसकी प्लेसमेंट हिस्ट्री ठीक नहीं है तो लोन का आवेदन खारिज हो सकता है।
मध्यप्रदेश से प्राप्त 22,728 आवेदनों में से ज्यादा आवेदन 4.50 लाख सालाना आय वाले परिवारों के बच्चों ने किए। 15135 में से 7927 को ही एजुकेशन लोन मिला। बाकी 7208 आवेदन विभिन्न कारणों से रिजेक्ट कर दिए गए। 4.50 लाख से 8 लाख की सालाना आय वाले 4496 छात्रों ने आवेदन किया। 2632 को लोन मिला। 8 लाख+ सलाना आय वाले परिवारों के 3097 आवेदनों में से 1988 को लोन दिया गया।
2025-26 में 6.48 लाख से ज्यादा आवेदन बैंकों में भेजे गए। 3,47,831 आवेदकों को ऋण स्वीकृत किया गया। 3,01,140 आवेदन तीन कारणों से खारिज किए गए। इनमें 4.57 लाख से ज्यादा सालाना चार लाख आय वाले परिवार द्वारा किए गए। 2,38,952 के मंजूर हुए। 83 प्रतिशत से अधिक शिक्षा ऋण 8 लाख तक की सालाना पारिवारिक आय वाले छात्रों को मंजूर हुए।
Published on:
25 Mar 2026 06:21 am
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