
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जिला रोजगार कार्यलय के काम करने के तरीके से पूरे जिले भर के बेरोजगार परेशान हैं। रोजगार कार्यलय हाल में मात्र पंजीयन कराने की जगह बन कर रह चुका है, जहां बेरोजगारों की सुनने वाला कोई नहीं है। अभी वर्तमान में लोग जिला रोजगार कार्यलय के ऊपर इल्जाम लगाने से कतरा नहीं रहे हैं।
लोगों का आरोप है की, रोजगार कार्यालय आज मात्र कुछ समय के अंतराल में कुछ मैसेजेस ही भेजता है जिसका बेरोजगारों को खासा लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। इन्ही सब कारणों तथा आरोपों को लेकर पत्रिका संवाददाता जिला रोजगार अधिकारी के एस मालवीय से इन सब मुद्दों पर विशेष चर्चा की। आप भी देखें जिला भोपाल के रोजगार कार्यालय का हाल.....
प्रश्न- लम्बे समय से सरकारी नौकरी के लिए बेरोजगारों को जिला रोजगार कार्यालय से कोई कॉल नहीं आते क्या कारण है?
उत्तर- रोजगार कार्यालय से सरकारी नौकरी में सीधी भर्ती के लिए नाम भेजने की व्यवस्था अब खत्म हो चुकी है। सारी भर्ती प्रोफेशनल बोर्ड से होती हैं। यहां एक दो विभाग में कभी-कभी संविदा नियुक्तियों को लेकर मांग आती है।
प्रश्न- फिर रोजगार कार्यालय में बेरोजगारों का पंजीयन कराने से क्या लाभ?
उत्तर- शासकीय नौकरी में सिर्फ पंजीयन मांगा जाता है। ये व्यवस्था अब ऑनलाइन है। ऐसे में युवा ऑनलाइन पंजीयन करा लेते हैं। नौकरी न मिलने से यहां अब पहले जैसी भीड़ नहीं होती।
प्रश्न- तो फिर रोजगार कार्यालय पंजीकृत बेरोजगारों के लिए क्या करता है?
उत्तर- हम साल में चार से पांच बार प्राइवेट कंपनियों को बुलाकर रोजगार मेला लगाते है। इसमें जितने लोगों को कंपनी वालों को जरूरत लगती है, केम्पस सिलेक्शन में वह उन्हे नौकरी का ऑफर देते है।
प्रश्न- तकनीकी शिक्षा को छोड़ दें तो साधारण ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट पास बेरोजगारों के लिए नौकरी कभी निकलेगी ही नहीं। फिर इन कोर्स को शासन क्यों चला रहा है।
उत्तर- मेरा मानना है कि अधिकांश काम ऑनलाइन होने व मशीनों पर चलने के लिए मेन पॉवर की आवश्यकता कम हो रही है। जहां तक कोर्स चलाने का काम है, वह फैसला शासन के अधिकार क्षेत्र की बात है।
प्रश्न- सीधी भर्ती भले बोर्ड से हो, लेकिन पंजीकृत बेरोजगारों को बैकलाग की भर्ती में तो रोजगार कार्यालय से नाम मांगे जाने चाहिए। क्या सरकारी विभागों में बैकलाग के पद भी समाप्त हो चुके हैं?
उत्तर- बैकलाग के पद कई विभागों में पहले से पेंटिंग है, लेकिन डिमांड भेजने का अधिकार सरकार के पास है, हम तो कर्मचारी है, जैसा आदेश मिलता है, उस पर काम करना पड़ता है।
प्रश्न- बेरोजगारों के भविष्य को लेकर क्या किया जा रहा है?
उत्तर- कई सरकारी विभागों में कई काम ठेके पर दिए जा रहे हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां इससे ज्यादा पैसा दे रही हैं। हम एक-दो माह में कंपनियों से संपर्क कर उन्हें बुलाते हैं, रोजगार मेला लगाकर केम्पस सिलेक्शन से बेरोजगारों को लाभ मिल रहा है। इसमें भी क्लेरिकल ऑफर कम मिलते हैं।
Published on:
26 Mar 2018 07:14 am
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