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गांव में मिलेगा डीजल, ऑयल और रसोई गैस, भारत पेट्रोलियम दे रही 100 से ज्यादा एजेंसी

आउटलेट तक डीजल, गैस सहित अन्य सामग्री पहुंचाने का काम एजेंसी के जरिए होगा

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अशोक गौतम. भोपाल. मध्यप्रदेश में अब गांव गांव में डीजल, ऑयल और रसोई गैस जैसे जरूरी पेट्रोलियम पदार्थ मिलेंगे. डीजल, ऑयल और रसोई गैस की एजेंसी प्रदेश की महिलाओं को मिलेगी. इसके लिए भारत पेट्रोलियम कंपनी देवास, उज्जैन, राजगढ़ और बैतूल में 100 से ज्यादा महिला समूहों को एजेंसी चलाने की ट्रेनिंग भी दे रही है. देवास में तो करीब 35 समूहों ने आउटलेट तैयार कर कारोबार शुरू भी कर दिया है.

एजेंसी लेने समूहों को करीब 20-25 हजार रुपए जमा करने होंगे। पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री पर कंपनी उन्हें कमीशन देगी। आउटलेट तक डीजल, गैस सहित अन्य सामग्री पहुंचाने का काम एजेंसी के जरिए होगा। भुगतान समूहों को नहीं करना होगा। एक सिलेंडर बेचने पर दस रुपए, ऑयल पर 30 फीसदी और डीजल बेचने पर 50 पैसे प्रति लीटर कमीशन दिया जाएगा।

जैसे-जैसे समूह कारोबार को बढ़ाते जाएंगे वैसे-वैसे कोटा भी बढ़ता जाएगा। फिलहाल अधिकतम कोटा 1000 लीटर डीजल तक रहेगा। रसोई गैस का कोटा 500 सिलेंडर के करीब रखा गया है। भविष्य में पेट्रोल पंप चलाने लाइसेंस देने पर भी सरकार कोटा तय करेगी, लेकिन पंप संचालित करने की निविदा में शामिल होना पड़ेगा।

गांवों में अभी अवैध रूप से डीजल मिलता है. यह कई गुना ज्यादा कीमत पर बेचा जाता है. आधिकारिक एजेंसी खुल जाने से ग्रामीणों को इस अवैध महंगे डीजल की तुलना में उचित कीमत यानि सस्ता डीजल प्राप्त हो सकेगा.

देवास की महिला स्व सहायता समूह बागली की सीमा बड़ोदिया बताती हैं कि— मैं प्रतिदिन तीन से चार सिलेंडर बेचती हूं। इसके अलावा हर हफ्ते करीब 50 से 60 लीटर डीजल बेचती हूं। अन्य पेट्रोलियम पदार्थ भी बेचती हूं। यह कारोबार जनवरी से कर रही हूं। जैसे-जैसे एजेंसी का प्रचार-प्रसार बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे लोगों का आना भी बढ़ेगा।

इधर मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के सीईओ एलएम बेलवाल के मुताबिक चार जिलों में महिला स्व सहायता समूहों को भारत पेट्रोलियम कंपनी डीजल, गैस सहित अन्य पेट्रोलियम पदार्थ बेचने की एजेंसी दे रही है। उन्हें कंपनी के जरिए ट्रेनिंग दिलाई जा रही है। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।

पेट्रोलियम कंपनियों का मानना है कि एजेंसियां दूर होने से उज्ज्वला के कई उपभोक्ता सिलेंडर भरवाने नहीं जाते। अगर गांव के आसपास उसी दाम पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए तो उन्हें उसे भरवाने में दिक्कत नहीं होगी। लोगों की परिवहन लागत कम होगी। कंपनियां डीलरों के जरिए समूहों के आउटलेट की मांग के अनुसार आपूर्ति करेंगी। देवास के बागली और खातेगांव ब्लॉक में डीजल, गैस टंकी, रेगुलेटर, चूल्हा और लुब्रिकेडेट आयल की बिक्री और सप्लाई भी शुरू कर दी गई है।

पेट्रोलियम कंपनियां सब एजेंसियों को पांच-दस और बीस लीटर डीजल से भरे अलग-अलग केन उपलब्ध कराएंगी। केन में कंपनी की सील लगी होगी, जिससे किसी तरह की मिलावट और तौल में गड़बड़ी को लेकर संदेह पैदा न हो। केन खाली होने के बाद कंपनी का तय डीलर उसे वापस ले जाएगा और उसके बदले में डीजल से भरे नए केन को फिर से सब एजेंसी तक पहुंचाने का काम करेगी। फिलहाल इन समूहों को पेट्रोल बेचने की अनुमति नहीं दी गई है।

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