
श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में शामिल होने की चाहत लिए मध्यप्रदेश, देश और विदेश से भक्त यहां पहुंचते हैं। नए साल में भी लाखों लोग महाकाल के दर्शन करने पहुंचे। अब तक 10 लाख लोग महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। इन दिनों महाकालेश्वर में भक्तों की भीड़ और उनकी भस्मआरती की इच्छा पूरी की जा रही है। इसके लिए मंदिर समिति ने हर दर्शनार्थी के लिए भस्म आरती में शामिल होने का नया तरीका अपनाया और चलित भस्म आरती शुरू की। इन दिनों भस्म आरती में शामिल होने के लिए बुकिंग फुल होने के बावजूद चलित आरती के कारण हर भक्त भस्म आरती की इच्छा पूरी कर पा रहा है। लेकिन क्या आपको श्री महाकालेश्वर की भस्म आरती के नियम और उनके रहस्य पता है, अगर नहीं तो, जरूर पढ़ें ये रोचक खबर...
पहला रहस्य है भस्म आरती की ये कहानी
राजा और किसान के बेटे की कहानी दरअसल भस्म आरती की कहानी शिवलिंग की स्थापना से ही देखी जाती है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में राजा चंद्रसेन हुआ करते थे। वे भगवान शिव के बहुत बड़े उपासक थे। एक दिन राजा चंद्रसेन के मुख से मंत्रों का जाप सुनकर एक किसान का बेटा भी उनके साथ पूजा करने गया, लेकिन सिपाहियों ने उसे राजा के साथ बीच में ही रोक दिया और दूर भेज दिया।
जंगल में पूजा करने लगा किसान का बेटा
अब किसान का बेटा जंगल के पास जाकर पूजा करने लगा और वहां उसे अहसास हुआ कि दुश्मन राजा उज्जैन पर आक्रमण करने जा रहे हैं और उसने प्रार्थना के दौरान ही ये बात पुजारी को बता दी। किसान के बेटे की बताई ये बात एक आग की तरह फैल गई और उस समय राजा चंद्रसेन के विरोधी राक्षस दूषण का साथ लेकर उज्जैन पर आक्रमण कर रहे थे। दूषण को भगवान ब्रह्मा का वरदान प्राप्त था कि वो दिखाई नहीं देगा।
डरी-सहमी प्रजा की पुकार से प्रकट हुए शिव
उस वक्त पूरी प्रजा ही भगवान शिव की अराधना में व्यस्त हो गई और अपने भक्तों की ऐसी पुकार सुनकर महाकाल प्रकट हुए। महाकाल ने दूषण का वध किया और उसकी राख से ही अपना शृंगार किया। उसके बाद वे यहीं रह गए।
चिता की राख से की जाने लगी आरती
देश के बारह ज्योतिर्लिंगों (shree mahakaleshwar jyotirlinga ujjain) में प्रमुख भगवान श्री महाकालेश्वर की भस्म आरती की परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी है। माना जाता है कि राक्षस की चिता की राख से भगवान के शृंगार करने के बाद से श्री महाकालेश्वर की भस्म आरती की परम्परा बनी। कई भक्तों का कहना है कि वर्षों तक भगवान शिव की भस्म आरती के लिए श्मशान से लाई जाने वाली चिता की राख से ही आरती की जाती रही।
दूसरा रहस्य- अब शिवपुराण के अनुसार होती है श्री महाकालेश्वर की भस्म आरती
शिवपुराण के अनुसार कपिला गाय के गोबर के कंडे के साथ शमी, पीपल, पलाश, बेर के पेड़ की लड़कियां, अमलतास और बरगद के पेड़ की जड़ को एक साथ जलाया जाता है। इसके बाद ही वो राख बनती है, जिससे हर सुबह भगवान शिव (shree mahakaleshwar) की भस्म आरती की जाती है। भगवान महाकाल के दिन की शुरुआत सुबह 4 बजे इसी आरती से होती है।
तीसरा रहस्य- ड्रेस कोड क्यों?
इस आरती को देखने के लिए पुरुषों को केवल धोती पहननी पड़ती है, वहीं महिलाओं को आरती के दौरान सिर पर घूंघट रखना पड़ता है। ऐसा माना जाता है, उस समय भगवान शिव निराकार रूप में होते हैं और महिलाओं को भगवान के इस रूप के दर्शन करने की अनुमति नहीं होती।
कैसे पहुंचें?
ट्रेन से
दिल्ली, मुंबई(Mumbai), कोलकाता (Kolkata) या चेन्नई (Chennai) जैसे शहर से आप ट्रेन लेकर उज्जैन सीटी जंक्शन या विक्रम नगर रेलवे स्टेशन पहुंचकर यहां से लोकल बस या टैक्सी लेकर श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचा सकते हैं।
एयर वेज से
अगर आप हवाई सफर से श्री महाकालेश्वर पहुंचना चाहते हैं तो, महारानी अहिल्या बाई होल्कर एअरपोर्ट उज्जैन का सबसे निकटतम हवाई अड्डा है। यहां से आप लोकल टैक्सी या बस लेकर मंदिर पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
अगर आप बस या निजी वाहन से जाना चाहते हैं, तो आपको बता दें कि उज्जैन देश के लगभग हर राज्य से जुड़ा हुआ है।
ठहरने की व्यवस्था
महाकालेश्वर मंदिर के आसपास ठहरने के लिए कई धर्मशाला हैं। महाकाल धर्मशाला या फिर सूर्य नारायण व्यास धर्मशाला जहां आप ठहर सकते हैं। इसके अलावा मंदिर के आसपास कई होटल्स हैं जहां आप 500-600 रुपए तक के रूम बुक करवा सकते हैं।
इन ढाबों पर मिलेगा टेस्टी और फ्रेश फूड
महाकालेश्वर मंदिर के आसपास ऐसे कई ढाबे हैं, जहां आप खाना खाने के लिए जा सकते हैं। जोशी दही बाबा हाउस या फिर डमरू वाला रेस्टोरेंट जैसे कई ढाबे और रेस्टोरेंट में आपको टेस्टी, फ्रेश और सात्विक खाना आसानी से मिल जाएगा।
Updated on:
04 Jan 2024 11:39 am
Published on:
04 Jan 2024 10:45 am
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