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PGDCA और DCA कोर्स की घटेगी फीस, क्रिस्प से होगा करार

विद्यार्थियों को राहत : भोज विवि की बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय...

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Bhoj university

Bhoj university

भोपाल। मप्र भोज मुक्त विवि में संचालित पीजीडीसीए और डीसीए पाठ्यकम की फीस में कमी की जाएगी। यही नही यहां पर अध्ययनरत विद्यार्थियों को जॉब ओरिएंटेड कोर्स कराने के लिए विवि प्रबंधन क्रिस्प से करार करेगा। सोमवार को विवि में आयोजित बोर्ड की बैठक में ये निर्णय लिए गए।

जानकारी के अनुसार वर्तमान में विवि में संचालित एक वर्षीय कम्प्यूटर डिप्लोमा पाठ्यक्रम पीजीडीसीए और डीसीए की वार्षिक शुल्क 11,500रुपए है।

विवि प्रबंधन के अनुसार अन्य संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रमों की तुलना में यहां फीस अधिक होने की बात छात्रों द्वारा बताई गई है। छात्र हित को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने फीस में लगभग 2,000 रुपए की कमी करने का निर्णय लिया है, वहीं विद्यार्थियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कम्प्यूटर रिपेयरिंग, एसी रिपेयरिंग जैसे पाठ्यक्रम के लिए क्रिस्प से करार किया जाएगा।

दीक्षांत समारोह के लिए 30 लाख का बजट
28 सितंबर को आयोजित किए जाने वाले विवि के दीक्षांत समारोह के आयोजन के लिए 30 लाख रुपए के बजट का प्रस्ताव भी बोर्ड की बैठक में रखा गया, जिसके लिए बोर्ड ने अनुमति दे दी है।

बाउंड्रीवॉल के बजाय बना दी सड़क, कम्प्यूटर खरीदी के चेक भी रख लिए
भोज विवि के निलंबित चल रहे डायरेक्टर प्रवीण जैन पर लगे आधा दर्जन से अधिक आरोपों की जांच कर रही दो सदस्यीय समिति ने सोमवार को विवि में बैठक कर दो बिंदुओं पर सुनवाई की। इसमें पहला आरोप बाउंड्रीवाल के लिए जारी किए गए 70 लाख रुपए से सड़क बनवाने और दूसरा आरोप कम्प्यूटर खरीदी के लिए दिए गए लाखों रुपए के चेक अपने पास रखने का था।

मामले की सुनवाई कर रही समिति ने विवि के लेखापाल विशाल अथाटी और इंजीनियर राजेश पटेल के बयान दर्ज किए। जानकारी के अनुसार समिति ने विवि प्रबंधन को आश्वस्त किया है कि प्रवीण जैन पर लगे आरोपों की जांच अक्टूबर माह तक पूरी कर ली जाएगी।

दस्तावेज चोरी की एफआइआर: जैन पर स्वयं की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज और सेवा पुस्तिका चुराने, अन्य मूल दस्तावेज गायब करने को लेकर चूनाभट्टी थाने में एफआइआर दर्ज की गई थी।

जैन को बचाने की स्क्रिप्ट लिख गए कुलपति कान्हेरे
मध्य प्रदेश भोज मुक्त विवि के निलंबित डायरेक्टर प्रवीण जैन पर लगे तमाम आरोप सिद्ध होने एवं फर्जी नियुक्ति के संबंध में विधिक अभिमत आ जाने के बावजूद विवि के तत्कालीन कुलपति आरआर कान्हेरे द्वारा कार्रवाई न कर जैन को बचाने में भरपूर मदद की। कार्रवाई को लेकर लगातार बरती गई लापरवाही जानबूझकर की गई है।

उल्लेखनीय है कि विवि के निलंबित डायरेक्टर प्रवीण जैन की नियुक्ति के संबंध में विधिक अभिमत लिया जा चुका है जिसमें यह पाया गया है कि उसकी नियुक्ति गलत तरीके से हुई है। विधिक अभिमत आए हुए भी तीन माह से अधिक बीत चुके हैं। इस संबंध में राजभवन के भी स्पष्ट निर्देश हैं कि जैन के विरुद्ध विधिक अभिमत लेकर कार्रवाई विवि स्वयं करे , लेकिन विवि ने कोई कार्रवाई नही की।

इस संबंध में कुलपति आरआर कान्हेरे का कहना था कि धारा 33 हटने के बाद कार्रवाई का अधिकार बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट को है। सोमवार को बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की बैठक भी हो गई, लेकिन विवि ने कार्रवाई के लिए प्रस्ताव ही नही रखा, जिसने स्पष्ट कर दिया कि विवि कार्रवाई करना ही नही चाहता है। हालांकि कार्रवाई न करने को लेकर तमाम तरह चर्चाएं हैं।