
Bholenath bel patra story - भोलेनाथ को इसलिए सबसे ज्यादा प्रिय है बेलपत्र, जानिए पीछे की कहानी
भोपालः सावन का महीना शुरू हो चुका है और सभी शिवभक्त भोले की भक्ति में लीन हैं। ऐसे में कहा जाता है श्रावण मास में सबसे ज्यादा बेलपत्र यानी बिल्वपत्र ( Belpatra ) का महत्व बढ़ जाता है। हालांकि, लोग इसे आस्था या लोगों के बताए अनुसार देवपूजन ( Sawan Month Somvar ) के दौरान इस्तेमाल ज़रूर करते हैं, लेकिन अब भी कई लोगों को इसके बारे में बहुत कम ही ज्ञान है। बेलपत्र के उत्पन्न होने की पवित्र कथा बहुत प्रसिद्ध है। आज हम आपको उसी कथा से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।
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[typography_font:14pt;" >ये है बेलपत्र से जुड़ी कहानी
स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती के पसीने की बूंद मंदराचल पर्वत पर गिर गईं, जिनके कारण पर्वत पर बेल का पेड़ निकल आया। क्योंकि, माता पार्वती के पसीने से बेल का पेड़ जीवंत हुआ तो ये भी स्वभाविक है कि, इस पेड़ में माता पार्वती के सभी रूप बसते हैं। वो पेड़ की जड़ में गिरिजा के स्वरूप में, इसके तनों में माहेश्वरी के स्वरूप में और शाखाओं में दक्षिणायनी व पत्तियों में पार्वती के रूप में रहती हैं। फलों में कात्यायनी स्वरूप और फूलों में गौरी स्वरूप बसता है और इस सभी रूपों के अलावा, मां लक्ष्मी का रूप समस्त वृक्ष में ( Lord Shiva likes Bel Patra ) निवास करता है।
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[typography_font:14pt;" >सभी तीर्थों के दर्शन का मिलता है पुण्य
इसी बेलपत्र में माता पार्वती का प्रतिबिंब होने के कारण इसे भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है और भगवान शिव भी इस बेल पत्र के चढ़ावे से प्रसन्न होते हैं और प्रसन्न होकर भक्त की मनोकामना पूर्ण करते हैं। कहते हैं जो व्यक्ति किसी तीर्थस्थान पर नहीं जा सकता है अगर वो श्रावण मास ( Sawan Mass ) में बिल्व के पेड़ के मूल भाग की पूजा करके उसमें जल अर्पित करता है तो उसे सभी तीर्थों के दर्शन करने का पुण्य प्राप्त होता है।
Published on:
27 Jul 2019 05:16 pm
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