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बुलेट प्रूफ होगी भोपाल की मेट्रो ट्रेन, गोलियों का भी नहीं पड़ेगा प्रभाव

एमपी की राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन का काम बहुत तेजी से चल रहा है। भोपाल मेट्रो ट्रेन का रैक सितंबर पहले सप्ताह में आने की उम्मीद है। अभी ट्रेन की कोच पर विशेष तौर पर ग्राफीन के साथ टाइटेनियम जैसी धातु की परत चढ़ाई जा रही है।

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राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन

एमपी की राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन का काम बहुत तेजी से चल रहा है। भोपाल मेट्रो ट्रेन का रैक सितंबर पहले सप्ताह में आने की उम्मीद है। अभी ट्रेन की कोच पर विशेष तौर पर ग्राफीन के साथ टाइटेनियम जैसी धातु की परत चढ़ाई जा रही है। यह रैक को हल्का रखकर उसकी मजबूती बढ़ाएगी। खास यह है कि इससे कोच बुलेट प्रूफ बन जाएगा यानि भोपाल की मेट्रो ट्रेन पर गोलियों का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मेट्रो ट्रेन का कोच 2.9 मीटर चौड़ा व 22 मीटर लंबा होगा। बड़ोदरा के सावली प्लांट में ये रैक तैयार हो गए हैं। इंदौर का रैक 22 अगस्त को रवाना होगा, जबकि भोपाल का रैक 15 से 20 सितंबर के बीच भोपाल पहुंचेगा। अभी इसका एक कोच जिसे मॉकअप या मॉडल कोच कहा जा रहा है स्मार्ट पार्क में लोकार्पण के इंतजार में है।

मेट्रो ट्रेन कारपोरेशन के एमडी मनीष सिंह ने बताया कि मेट्रो की रैक अत्याधुनिक तकनीक से युक्त होगी। इसके निर्माण में उपयोग धातु ट्रेन को हल्का रखने के साथ भरपूर मजबूती देगा। जल्द ही लोग इसे देखेंगे।

क्या है ग्राफीन
ग्राफीन अणु की मोटाई वाली सामान्य कार्बन की पतली परत है। यह एक अणु की सपाट परत है। इसकी 1 स्क्वायर मीटर की शीट का वजन मात्र 0.77 ग्राम होता। लचीलापन बहुत ज्यादा होता है। ग्राफीन और टाइटेनियम के मिश्रण वाली कोच हल्की होने के साथ मजबूत होगी। एक तरह से ग्राफीन कोच को बुलेट प्रूफ बनाएगी। यानी यह अभेद्य होगी।

मेट्रो ट्रेन अत्याधुनिक तकनीक से युक्त होगी। ऑन बोर्ड सेंसर से रियल टाइम एनालिसिस, मॉनीटरिंग की सुविधा होगी। समस्या के पहले सेंसर से ये डिटेक्ट हो जाएगी। समय रहते सुधार होगा। इससे ट्रेन की लेटलतीफी बचेगी। यह तकनीक ट्रेन की 100 फीसदी सटीक लोकेशन बताएगी।

इसके अलावा भोपाल मेट्रो रेलवे ट्रैक की मॉनीटरिंग मैनुअली ट्रैकमैन से न होकर इसमें ड्रोन तकनीक का उपयोग होगा। ड्रोन ट्रेक पर लगातार नजर रखेगा।