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एमपी में बिना मंजूरी के बने मकानों पर हुआ बड़ा फैसला

बिना मंजूरी के बने मकानों के संबंध में एमपी में बड़ा फैसला लिया गया है हालांकि इसपर प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अंतिम मुहर लगना बाकी है। इसके अनुसार मध्यप्रदेश में ऐसे अवैध आवास निर्माण को वैध किया जा सकता है जोकि बिना अनुमति के 30 प्रतिशत अधिक निर्मित कर लिए गए हैं। ऐसे अवैध निर्माणों को सरकार द्वारा समझौता शुल्क लेकर वैध किए जाने की तैयारी की जा रही है।

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बिना मंजूरी के बने मकानों के संबंध में एमपी में बड़ा फैसला

देश में मकान निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। नए निर्माण के पहले विधिवत अनुमति लेने का प्रावधान है लेकिन कई लोग इसका पालन नहीं करते। लाखों लोग बिना मंजूरी के ही मकान बना लेते हैं। एमपी में भी ऐसे लाखों मकान है जिन्हें बिना किसी अनुमति के लिए बना लिया गया है। हालांकि ऐसे लोगों को हमेशा कानून का खौफ भी सताते रहता है। मकान मालिका को डर लगा रहता है कि कहीं सरकार इनपर बुलडोजर न चला दे।

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बिना मंजूरी के बने मकानों के संबंध में एमपी में बड़ा फैसला लिया गया है हालांकि इसपर प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अंतिम मुहर लगना बाकी है। इसके अनुसार मध्यप्रदेश में ऐसे अवैध आवास निर्माण को वैध किया जा सकता है जोकि बिना अनुमति के 30 प्रतिशत अधिक निर्मित कर लिए गए हैं। ऐसे अवैध निर्माणों को सरकार द्वारा समझौता शुल्क लेकर वैध किए जाने की तैयारी की जा रही है।

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प्रदेश में अभी बिना अनुमति 10 प्रतिशत तक अवैध निर्माण को समझौता शुल्क देकर वैध किए जाने का प्रावधान लागू है। अब इसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने की तैयारी चल रही है। सीएम मोहन यादव भी भवन अनुज्ञा और कंपाउंडिंग की नियम प्रक्रिया को सरल करने के निर्देश दे चुके हैं।

जानकारी के अनुसार राज्य में पहले बिना अनुमति 30 प्रतिशत अधिक आवास निर्माण को वैध करने का ही प्रावधान लागू था लेकिन बाद में इसे दस प्रतिशत कर दिया गया था। इसे फिर 30 प्रतिशत करने के संबंध में पिछले सरकार के मंत्री भूपेंद्र सिंह ने नोटशीट भेज दी थी हालांकि तब निर्णय नहीं हो सका था। सीएम मोहन यादव ने जब नगरीय विकास एवं आवास विभाग की समीक्षा करते हुए नियम-प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए तब इसे फिर आगे लाया गया।

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प्रदेश के वित्त विभाग ने यह प्रस्ताव तैयार कर लिया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इससे न केवल आमजनों को राहत मिलेगी बल्कि नगरीय निकायों को करोड़ों रुपये की आय भी होगी। लोगों को उनका अवैध मकान ढहाने के डर से हमेशा के लिए मुक्ति भी मिल जाएगी।

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