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संविदा कर्मचारियों को रेग्युलर करने के दिशा-निर्देश जारी! ये लाभ भी मिलेंगे

संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के दिशा-निर्देश जारी! ये लाभ भी मिलेंगे...

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संविदा कर्मचारियों को रेगुलर करने के दिशा-निर्देश जारी! ये लाभ भी मिलेंगे

भोपाल। MP में पिछले दिनों चले लगातार विरोध प्रदर्शनों का असर अब सामने आना शुरू हो गया है। इसी के चलते अब विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों में निर्मित संविदा के पद चरणबद्ध तरीके से नियमित पदों में परिवर्तित किए जाएंगे।

इसके साथ ही हर विभाग में भर्ती किए जाने वाले पदों में से 20 प्रतिशत पद संविदा पर नियुक्त अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए आरक्षित रहेंगे। इस संबंध में राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से नये नीति-निर्देश जारी कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार इसके बावजूद संविदा महासंघ इससे सहमत नहीं आ रहा है और अपनी मांगों को पूरा करने के लिए 20 जून आंदोलन करने पर अड़ा हुआ है।

ये निर्देश विभिन्न शासकीय विभागों एवं मप्र रोजगार गारंटी परिषद, राज्य/जिला स्वास्थ्य समिति एवं मप्र सर्वशिक्षा अभियान मिशन में संविदा पर नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित पदों पर नियुक्ति देने के अवसर प्रदान करने के लिए जारी किए गए हैं।

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इतने पद रहेेंगे आरक्षित: इनके अनुसार, अब सभी विभाग स्वीकृत संविदा के पदों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी में बाटेंगे। जिसके तहत हर विभाग में बीस प्रतिशत पद संविदा पर नियुक्त कर्मियों के लिए आरक्षित रहेंगे।

ये होंगे पात्र : वे कर्मचारी या अधिकारी जिन्हें संविदा पद पर काम करने का पांच वर्ष का अनुभव हो गया है, वे ही नियमित होने के पात्र होंगे। इसके अलावा नियमित पद के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता भी होनी चाहिए।

ऐसे होगा चयन : संविदा कर्मियों के लिए आरक्षित किये गए सीधी भर्ती के नियमित पदों पर पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के माध्यम से चयन किया जाएगा। इसके तहत जिसने जितने वर्ष संविदा के पद पर काम किया गया है, उसे उतने वर्ष की आयु सीमा में छूट मिलेगी, लेकिन 55 वर्ष से अधिक आयु के लोग पात्र नहीं होंगे।

इन पर लागू नहीं होगा : लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाने वाले प्रथम और द्वितीय श्रेणी के पदों पर बीस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं होगा, परन्तु जितने वर्ष संविदा में काम किया है उतने वर्ष की इन पदों के लिए आयु सीमा में छूट मिलेगी।

वेतनवृध्दि का लाभ : नये दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जब तक संविदा कर्मी नियमित पदों पर नियुक्त नहीं किए जाते हैं तब तक उन्हें हर साल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृध्दि के आधार पर वेतनवृध्दि का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा संविदा कर्मियों का मासिक पारिश्रमिक नियमित पद के वेतनमान के 90 प्रतिशत के बराबर होगा।

ये भी मिलेगा लाभ : संविदा कर्मियों को एक साल में तेरह दिन के आकस्मिक अवकाश, 15 दिन का अर्जित अवकाश तथा दस दिन का लघुकृत अवकाश दिया जायेगा। संविदा पर नियुक्त महिला कर्मी को 90 दिन के प्रसूति अवकाश का लाभ भी दिया जाएगा।

सहमत नहीं है महासंघ : वहीं इस संबंध में मप्र संविदा कर्मचारी-अधिकारी महासंघ भोपाल से मिल रही जानकारी के अनुसार वे सरकार के इन दिशा-निर्देशों से सहमत नहीं हैं। इससे तो 1 लाख 83 हजार संविदा कर्मियों में से सिर्फ 15-20 हजार कर्मियों को ही लाभ मिलेगा। बिना चयन परीक्षा के सीधे नियमित करने का मांग-पत्र सीएम को दिया है। यदि दिशा-निर्देशों में संशोधन नहीं किया जाता है तो हम 20 जून के बाद फिर आंदोलन करेंगे।