
उल्लू का विरोध कर जंगल का शेर बन जाती है चिड़िया
भोपाल। प्रख्यात रंगकर्मी अलखनंदन और शैलेंद्र कुमार की स्मृति में शहीद भवन में दो दिवसीय बालमन नाट्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन शनिवार को तीन कार्यक्रम आयोजित किए गए। रंगपर्व में इंदौर से आई डांस अकादमी की कोरियोग्राफर विशाखा बंसोड़ ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत तराना से की। इसमें उन्होंने तत्कार, तोड़े, टुकड़े और परन पेश किया। उन्होंने हाथ और चेहरे के भावों से विभिन्न मुद्राओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए बॉलीवुड फ्यूजन गीतों पर भी कथक प्रस्तुति दी। अंतिम प्रस्तुति में उन्होंने कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का बखान किया।
...और चिडिय़ा शेर बन गई
समारोह में दो नाट्य प्रस्तुतियां हुई। पहला नाटक प्रफुल्ल तिवारी के निर्देशन में 'और चिडिय़ा शेर बन गई' का मंचन हुआ। नाटक में दिखाया गया कि जंगल के देवता ऐलान कर देते हैं कि अब शेर ही जंगल का राजा नहीं होगा। हर जानवर को राजा बनने का मौका मिलेगा। जंगल में स्थिति बहुमत के हिसाब से शेर चुनने की बनती है।
उल्लू की संख्या ज्यादा होने पर उल्लू शेर बन जाता है। उल्लू सिर्फ रात में ही देख सकता है, इसलिए अन्य जानवर उसे पसंद नहीं रती। चिडिय़ा विरोध करती है। उल्लू उस पर हमला करवाता है, हमले में चिडिय़ा घायल हो जाती है। सभी जानवर बहुमत से चिडिय़ा को राजा बना देते है। नाटक से मैसेज यह दिया गया कि प्रकृति का जो नियम होता है उसे कभी भी बदलना नहीं चाहिए।
...अनोखा उपहार
वहीं, दूसरेनाटक में एक लड़की सरिता की कहानी को दिखाया गया है। सरिता जो दिव्यांग है, उसे एक हिन्दू परिवार ने पालपोसकर बड़ा किया है। असलम राखी के दिन उसे ठीक कराने के लिए डॉक्टर के पास ले जाता है। असलम कहता है कि यदि सरिता ठीक नहीं हुई तो भी वह उससे शादी करेगा। असलम डॉक्टर को दादा दादी के पास लेकर आता है और कहता है की अगर आप नाराज न हो तो मैं सरिता से शादी करना चाहता हूं। आखिर में सरिता से शादी करता है और इलाज करने के साथ ठीक हो जाती है। नाटक में यहीं मैसेज दिया गया है कि कोई भी दिव्यांग अपने आप को कमजोर न समझे अपने आप पर भरोसा रखे समय के साथ सब ठीक हो जाता है।
Published on:
02 Jun 2019 01:45 pm
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