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अब अपने ही इस गढ़ में फंस गई भाजपा! अभी दो और जगह खड़ी हो सकती है मुसीबत…

सूची को जारी करने में देरी बढ़ा रही नुकसान की संभावना...

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अब अपने ही इस गढ़ में फंस गई भाजपा! अभी दो और जगह खड़ी हो सकती है मुसीबत...

भोपाल। लोकसभा चुनावों के नजदीक आते ही सभी पार्टियों ने अपनी तैयारियां तो शुरू कर ही दी हैं। साथ ही पार्टियां अपने विपक्षियों की योजनाओं पर भी लगातार नजर बनाए हुई हैं।


जानकारों की मानें तो इसी के चलते कई बड़ी पार्टियां अपने उम्मीदवारों को अब तक समाने नहीं लाईं हैं, क्योंकि वे विपक्ष के उम्मीदवारों के संबंध में पहले जानकारी ले लेना चाहती हैं, जिससे वे किसी भी तरह के रिस्क से बच सकें।

वहीं इसी बीच कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शनिवार को भोपाल से अपनी पार्टी के पत्ते खोलते हुए बताया कि दिग्विजय सिंह भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।

भाजपा के लिए मुश्किल का समय...
राजनीति के जानकार डीके शर्मा की माने तो भाजपा जितनी देर सूची को जारी करने में लगाएगी उसे उतना ही नुकसान होने की संभावना है।

उनके अनुसार दिग्विजय के भोपाल से चुनाव लड़ने का मतलब साफ है कि ये सीट इस बार आसानी से भाजपा की झोली में नहीं जाने वाली, वहीं अब उनके सामने उतारने के लिए भाजपा के पास मुख्य रूप से केवल बाबूलाल गौर जैसे किसी कद्दावर नेता का ही आप्शन बचा हैं, जिनसे जीत की आशा कि जा सकती है।

वहीं दूसरी ओर भाजपा में भोपाल सीट को लेकर अब तक उत्पन्न हुए तनाव के बाद यदि भाजपा किसी ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारती है, जिसे लेकर पुराने नेता असहमत हैं, तो इसका खामियाजा भी उसे उठाना पड़ सकता है।

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ज्ञात हो कि इससे पहले कमलनाथ ने कहा था कि मैंने कमलनाथ से आग्रह किया है कि दिग्विजय सिंह प्रदेश की उस सीट से चुनाव लड़ें जहां से कांग्रेस 30 से 35 सालों से चुनाव नहीं जीत पाई है। कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कमलनाथ के बयान का समर्थन किया था।


यहां भी फंसेगी स्थिति...
शर्मा के अनुसार भोपाल तो एक सीट है, इसके अलावा भी प्रदेश में ग्वालियर और गुना जैसी सीटों पर देरी से उम्मीदवारों की घोषणा भाजपा को भारी पड़ सकती है।

उनका कहना है कि सामान्यत: ये देखा गया है कि जब कांग्रेस गुना जीतती है तो भाजपा के पास ग्वालियर आ जाता है। वहीं यदि कांग्रेस ग्वालियर जीतती है तो भाजपा के पास गुना का आप्शन रहता है। लेकिन इस बार भाजपा की लिस्ट की देरी उसे नुकसान कर सकती है।

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दरअसल जब भी मजबूत मुकाबला सामने आता है तो यदि कांग्रेस की ओर से सिंधिया गुना से आते है तो सिंधिया परिवार के वर्चस्व के चलते ग्वालियर से यशोधरा को उतारने की स्थिति में भाजपा ग्वालियर में कब्जा बरकरार रख सकतीं हैं। यदि कांग्रेस सिंधिया को ग्वालियर से उतारती है तो भाजपा यशोधरा को गुना से उतार कर अपनी सीट पक्की कर लेती है।

इस बार का पेंच: शर्मा के अनुसार इस बार लिस्ट में देरी भाजपा के लिए पेंच बन सकती है। क्योंकि यदि कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया को गुना से और ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे को ग्वालियर से उतारती है, तो भाजपा के लिए दोनों आप्शन बंद हो सकते हैं। क्योंकि माना जाता है कि यशोधरा या जिनकी चर्चा है माया सिंह सिंधिया परिवार से तालुक रखते हैं, ऐसे में वे किसी भी स्थिति में सिंधिया परिवार के विरुद्ध चुनाव में नहीं उतरेंगे। जिसका सीधा नुकसान भाजपा को होगा।

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जानकारों की मानें तो यदि भाजपा यशोधरा या माया सिंह को पहले ही गुना या ग्वालियर से अपना उम्मीदवार घोषित कर दे तो शायद सिंधिया परिवार की ओर से भी प्रियदर्शनी राजे को उनके विरुद्ध न उतारा जाए।