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बीजेपी विधायक राहुल सिंह लोधी को सुप्रीम कोर्ट से मिला सशर्त स्टे

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राहुल लोधी के निर्वाचन को किया था शून्य घोषित

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टीकमगढ़. टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक राहुल सिंह लोधी को सुप्रीम कोर्ट से थोड़ी राहत मिली है। निर्वाचन शून्य किए जाने के खिलाफ राहुल सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की थी जिस पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने राहुल सिंह को सशर्त स्टे दिया है। बता दें कि खरगापुर से बीजेपी विधायक राहुल सिंह लोधी के निर्वाचन को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शून्य घोषित कर दिया था। राहुल सिंह लोधी मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती के भतीजे हैं।

राहुल सिंह लोधी सशर्त विधायक
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के द्वारा निर्वाचन शून्य किए जाने के बाद खरगापुर विधायक राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहुल लोधी को सशर्त स्टे दिया है। कोर्ट ने जो सशर्त स्टे दिया है उसके मुताबिक राहुल लोधी को विधानसभा में होने वाली किसी भी प्रकार की वोटिंग का अधिकार नहीं होगा और न ही वो अविस्ताव प्रस्ताव के दौरान वोट कर पाएंगे।

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हाईकोर्ट ने शून्य किया था निर्वाचन
बता दें कि राहुल सिंह लोधी राहुल सिंह लोधी का निर्वाचन बीते दिनों मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शून्य घोषित कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ये भी कहा था कि भविष्य में राहुल सिंह को इस प्रकार की कोई जिम्मेदारी न सौंपी जाए। उनके खिलाफ पूर्व विधायक चंदा गौर की याचिका ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें नामांकन के दौरान जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में राहुल सिंह लोधी से हारी हुईं प्रत्याशी चंदा देवी गौर ने याचिका में बताया था कि चुनाव के वक्त राहुल सिंह लोधी ने दो बार नामांकन पत्र दाखिल किया था। पहले नामांकन में उन्होंने बताया था कि उनका आरएस कंस्ट्रक्शन कंपनी में भागीदार हैं जिसका मप्र राज्य ग्रामीण सड़क अधिकरण से अनुबंध है। लेकिन दूसरे नामांकन पत्र में उन्होंने लिखा कि उनकी और उनके परिवार की किसी भी कंपनी में भागीदारी नहीं है। लेकिन तब ये नहीं बताया था कि आरएस कंस्ट्रक्शन कंपनी ब्लैक लिस्टेड हो चुकी है। कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने प्रक्रिया के विपरीत जाकर लोधी का नामांकन पत्र मंजूर किया। इसलिए यह प्रक्रिया शून्य है। कोर्ट ने इस अनियमितता के लिए तत्कालीन रिटर्निंग ऑफिसर पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिये थे। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में राजपूत को इस प्रकार की कोई जिम्मेदारी न सौंपी जाए।

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