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15 लाख वोटर पहली बार चुनेंगे अपना नेता, इधर कांग्रेस के गढ़ में सेंध की कोशिशें शुरू

राज्य में हैं करीब ढाई करोड़ युवा मतदाता, वहीं छिंदवाड़ा में भाजपा-कांग्रेस के लिए स्थानीय मुद्दे और गुटबाजी बड़ी चुनौती...

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15 लाख वोटर पहली बार चुनेंगे अपना नेता, इधर गढ़ में सेंध की कोशिशें शुरू

भोपाल। प्रदेश में करीब ढाई करोड़ युवा वोटर हैं। इसमें 15 लाख वोटर पहली बार अपने मताधिकारों का प्रयोग करेंगे। इनको रिझाने के लिए भाजपा सरकार अपने 15 साल की योजनाएं गिना रही है।

वहीं, कांग्रेस के सामने 15 साल पुरानी अपनी सरकार के कार्यों से युवाओं को जोडऩा चुनौती है, इसलिए वह महंगाई, बेरोजगारी, व्यापमं घोटाला और विकास को चुनावी टूल के रूप में पेश कर सकती है। प्रदेश में 5.33 करोड़ से ज्यादा वोटर हैं। पुरुष वोटर की तुलना में 22 लाख महिला वोटर कम हैं।


किस आयु वर्ग के कितने वोटर
आयु वर्ग : पुरुष : महिला
18-19 : 874391 : 703662
20-29 : 7339386 : 6443393
30-39 : 6817833 : 6056813
40-49 : 512087 : 4788268
50-59 : 3299812 : 3058945

60-69 : 1768469 : 1777212
70-70 : 780065 : 905260
80 से ऊपर : 234113 : 343139
कुल : 26256156 : 24076692

इधर, कमलनाथ के गढ़ में सेंध लगाने में जुटी भाजपा...
वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा जिले में कांग्रेस और भाजपा दोनों की राह आसान नहीं है। यहां के सात विधानसभा क्षेत्रों में से चार पर भाजपा और तीन पर कांग्रेस का कब्जा है। 2008 में भी यही स्थिति थी। विधानसभा चुनाव 2003 की बात करें तो आठ विधानसभा क्षेत्र में से भाजपा के पास सात और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पास एक था। गौरतलब है कि 2008 में परिसीमन के बाद जिले में सात विधानसभा क्षेत्र रह गए हैं।

कमलनाथ के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद से क्षेत्र के कार्यकर्ता चुनाव को लेकर काफी उत्साहित हैं। वहीं, भाजपा कमलनाथ को उन्हीं के क्षेत्र में घेरने की रणनीति से काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने लिया जिले में आशीर्वाद
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भी इस जिले पर नजर है। उन्होंने जनआशीर्वाद यात्रा के माध्यम से छह विधानसभा क्षेत्र कवर किए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह मतदाताओं का मूड जानने के लिए कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं।

जिले के स्थानीय मुद्दे और गुटबाजी भाजपा-कांग्रेस दोनों को चुनौती दे रहे हैं। एससी-एसटी एक्ट के मामले में कई समाज के लोग नाराज हैं।

कब-कहां किसका कब्जा
विस क्षेत्र : 2008 : 2013
जुन्नारदेव : कांग्रेस : भाजपा
छिंदवाड़ा : कांग्रेस : भाजपा
चौरई : कांग्रेस : भाजपा
पांढुर्ना : भाजपा : कांग्रेस
अमरवाड़ा : भाजपा : कांग्रेस
परासिया : भाजपा : कांग्रेस
सौंसर : भाजपा : भाजपा

स्थानीय मुद्दे और गुटबाजी बड़ी चुनौती...
1. पेयजल संकट : मचागोरा बांध बनने के बाद भी पेयजल संकट सबसे बड़ा मुद्दा है। जिला मुख्यालय में एक दिन के अंतराल में पानी की सप्लाई की जा रही है। परासिया विधानसभा क्षेत्र में कई जगह तो 15-15 दिन के अंतराल से जलापूर्ति की जा रही है।
2. कोयला खदानें : परासिया और जुन्नारदेव में कई कोयला खदानें बंद होने से बेरोजगारी बढ़ी है। हालांकि, मुख्यमंत्री के जनआशीर्वाद यात्रा के दौरान केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने छह नई खदानें खोलने की घोषणा की है।
3. उच्च शिक्षा : उच्च शिक्षा के लिए जिले में लंबे समय से कॉलेज और विश्वविद्यालय की मांग हो रही है। जिले में एग्रीकल्चर और इंजीनियरिंग कॉलेज की जरूरत है। यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है।

4. उद्योग धंधे : मक्का और संतरा का बड़े पैमाने उत्पादन होता है, लेकिन कृषि आधारित कोई बड़ा उद्योग नहीं होने के कारण कच्चा माल दूसरे जिलों या प्रदेशों को भेजना पड़ता है। लोगों को न रोजगार मिल रहा है, न फसल के सही दाम।