
भोपाल। मध्यप्रदेश में 2003 के विधानसभा चुनाव में उमा भारती के नेतृत्व में भाजपा ने जीत का रिकार्ड कायम किया था। इसके बाद से लगातार विधानसभा चुनावों में कम हो रही भाजपा की सीटों को बढ़ाने के लिए उमा भारती ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नया सुझाव दिए। उमा ने कहा है कि इन सुझावों पर काम करेंगे तो मध्यप्रदेश की महिलाएं वोटों की बारिश कर देंगी और भाजपा 2003 से भी अधिक सीटों का रिकार्ड तोड़ देगी।
2003 के बाद से गिर रही हैं सीटें
2003 में दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा था और उमा भारती की अगुवाई में 230 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा को 173 सीटें मिली थीं और कांग्रेस 38 सीटों पर सिमट गई थी। तब बीजेपी की फायर ब्रांड नेता उमा भारती मुख्यमंत्री बनी थी। इसके बाद से लगातार विधानसभा चुनावों में भाजपा की सीटें गिरती जा रही हैं। 2008 में भाजपा 143 सीटें हासिल कर पाई। कांग्रेस ने 71 सीटें हासिल कर ली। 2013 में मोदी लहर में बीजेपी ने 165 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस 58 सीटों पर जीती। इसके बाद कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की जोड़ी ने 15 साल बाद कांग्रेस का वनवास खत्म कराया था। कांग्रेस की सीटें 58 से बढ़कर 114 पहुंच गई थी, जबकि बीजेपी 165 से लुढ़ककर 109 पर आ गई। हालांकि इसके बाद सिंधिया ने 22 विधायकों के साथ कांग्रेस का दामन छोड़ दिया और भाजपा में आ गए। इसके बाद से एक बार फिर शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है।
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उमा भारती के 12 ट्वीट
उमा भारती शराब के खिलाफ अपने अभियान पर हैं। वे इस समय ओरछा के बाद झांसी में हैं। उन्होंने 12 ट्वीट कर अपनी बात रखी है।
उमा ने कहा है कि शराब से नफ़रत और गंगा पर आस्था इस पर मेरी निजी स्वतंत्रता को भाजपा ने मुझे पूरा अधिकार दिया एवं मेरा पूरा सम्मान रखा। 1999 में जब हमने एनडीए बनाकर लोकसभा का चुनाव लड़ा तो कॉमन मिनिमम एजेंडा बना, जिसमें राम मंदिर का निर्माण नहीं था। लेकिन, हमने बीजेपी के प्लेटफ़ॉर्म से राम मंदिर के निर्माण पर अपनी आस्था पर स्वतंत्रता बनाए रखी।
उमा ने ट्वीट में कहा कि मैंने अटलजी के साथ कैबिनेट मिनिस्टर होते हुए भी राम का मंदिर, तिरंगा, घुसपैठ का विरोध, इस पर पूरे स्वतंत्रता एवं अधिकार से अपनी बात खुलेआम कही। जब मैं 12 साल की थी, तब से मोदीजी मेरे प्रति सम्मान एवं स्नेह दोनों दिखाते है। अमित शाहजी भी मेरी स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करते हैं।
उमा ने कहा कि जब अमित शाहजी राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तो मैंने 2019 के लोकसभा चुनाव से 6 महीने पहले ही चुनाव न लड़ने की घोषणा की, तो उन्होंने इसका पूर्ण सम्मान करते हुए मुझे भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था। मेरे ये 5 साल मेरी निजी साधना एवं गंगा के लिए समर्पित थे। इस बीच में जरूरत पड़ने पर मैंने मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश में भाजपा का जमकर प्रचार भी किया। बीच में अचानक कोरोना काल आया और शराब का मसला उठा।
अनैतिक है शराब नीति
भाजपा नेता ने कहा कि हम भाजपा के लोग आर्थिक अधिष्ठान के साथ सांस्कृतिक अधिष्ठान के प्रति भी सजग रहते है। मध्यप्रदेश की हमारी सरकार ने बनाई हुई वर्तमान की शराब नीति अनैतिक एवं जनहित के खिलाफ है। यह दुर्भाग्य है हमने ऐसी शराबनीति बनाई।
शिवराजजी के पास 8 महिने हैं
उमा भारती ने कहा कि जो मैंने शिवराज को सुझाव भेजे हैं, उसमें राजस्व की हानि बहुत कम एवं जनहित बहुत बड़ा है। शिवराजजी के पास में अभी 8 महीने हैं। मध्यप्रदेश में हमारी सरकार भारी मतों से बननी ही है।
तो टूट जाएंगे सारे रिकॉर्ड
पूर्व सीएम उमा भारती ने कहा कि यदि शिवराजजी ने यहां नियंत्रित एवं जनहितकारी शराब वितरण व्यवस्था कर दी तो महिलाओं के वोटों की ऐसी बरसात होगी कि 2003 का रिकॉर्ड टूट जाएगा। आज मैं झाँसी में हूँ एवं मेरा फिर आग्रह है कि मेरे, समाजसेवी, संतों के, संगठन के सुझावों पर शीघ्र ही शराबनीति बनाई जाए, क्योंकि सब जगह व्यग्रता का वातावरण है।
सभी सांसदों और विधायकों के लिए कही थी बात
उमा ने ट्वीट में कहा कि मैंने ओरछा की शराब की दुकान को लेकर जो टिप्पणी यहां के सांसद एवं विधायक को लेकर करी है वह केवल सिर्फ दो लोगों पर लागू नहीं होती, क्योंकि यह व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं है। यह बात तो पूरे प्रदेश पर लागू होती है, ग्रामीण क्षेत्र में पंच से लेकर सांसद तक और शहरी क्षेत्र में पार्षद से लेकर सांसद तक, यह तो जनप्रतिनिधियों की ही जिम्मेदारी थी कि वह महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा...। नौजवानों के स्वास्थ्य एवं भविष्य को ध्यान में रखते हुए इन दुकानों को ऐसे गलत स्थानों पर खुलने ही नहीं देते।
घिनौनी है मध्यप्रदेश की शराब नीति
उमा ने कहा कि वह जनप्रतिनिधि हैं, उन्होंने सरकार को चुना है, सरकार की बात उन्हें जनता तक नहीं बल्कि जनता की बात उन्हें सरकार तक पहुंचाना है। मध्यप्रदेश की वर्तमान की यह घिनौनी शराब नीति से यह साबित हो गया कि वह अपने कर्तव्य में फेल हो गए। अब जो नई शराब नीति आने वाली है, उसमें सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा इन जनप्रतिनिधियों की है, क्योंकि मध्यप्रदेश की जन भावनाएं शराब के खिलाफ हैं। मेरी अपील है कि नई शराब नीति में आप एक सशक्त पहरेदार की भूमिका निभाइए।
Updated on:
09 Feb 2023 04:51 pm
Published on:
09 Feb 2023 04:49 pm
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