
भोपाल/ नगर निगम के जोन कार्यालय आमजनता की शिकायत सुनवाई तो कर रहे हैं, लेकिन उनका निराकरण नहीं हो पा रहा। दरअसल जनता से जुड़े तमाम कामों में सिर्फ संपत्तिकर मामले में ही जोन के पास अधिकार और अमला है, बाकी में सिर्फ शिकायत बढ़ाने वाला कार्यालय बना हुआ है। यही वजह है कि सफाई, अतिक्रमण, अवैध होर्डिंग पर कार्रवाई, योजना प्रकोष्ठ, पार्किंग के साथ इंजीनियरिंग, पानी समेत 12 कामों में वार्ड व जोन में लगातार शिकायतों के बावजूद उचित निराकरण नहीं हो पा रहा।
दरअसल इन सभी कामों में निगम प्रशासन ने जोन को जोड़ तो रखा है, लेकिन कार्रवाई के अधिकार व अमला नहीं दिया। इन कामों के लिए जो अलग से शाखा बनाई गई है, वह इनके अधिन नहीं आती। यही वजह है कि जोन से बढ़ाई शिकायतों की सुनवाई नहीं करने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसे में न अवैध पार्किंग पर लगाम लग पा रही है और न ही अवैध होर्डिंग उतर पा रहे हैं। आमजन की पानी, सफाई, सीवेज से जुड़ी शिकायतें तक दूर नहीं हो पा रही है।
शाखाओं की ये हैं स्थिति
निगम में होर्डिंग की शाखा अलग है, लेकिन वहां सिर्फ एक या तो ही लोग नियुक्त है। पार्किंग सेल में भी यही स्थिति है। अतिक्रमण की टीम है और विधानसभावार प्रभारी भी नियुक्त है, लेकिन जोन को इसमें शामिल कर दिया है। सुबह की सफाई के साथ जोन की सफाई से जुड़ी शिकायतों का दूर कराने का जिम्मा भी जोन पर ही है। ऐसे में जोन और वार्ड का पूरा स्टॉफ इन अन्य कामों में लगा हुआ है।
अन्य कामों में जोड़ा, मूल काम नहीं हो रहा
स्थिति ये हैं कि संपत्तियों का हिसाब बनाने और उनकी दर निर्धारण करने के लिए नियुक्त लिपिक अतिक्रमण हटाने और होर्डिंग निकलवाने की टीम में शामिल हो रहा है। जोन व वार्ड के जिस कर्मचारी को अपने क्षेत्र में नए संपत्तिकर के खाते खोलकर वसूली करने सुबह से निकलना चाहिए या फिर नोटिस जारी करने चाहिए वह क्षेत्र की सीवेज और सफाई की स्थिति देखने निकल रहा है।
पूरे मामले में हैरानी ये हैं कि जोन और वार्ड से जुड़े अफसरों के अधिनस्त न तो सफाई का एएचओ आता है न ही सिविल या पानी का इंजीनियर। ऐसे में यदि ये कहीं दिक्कत देख भी लेते हैं या फिर जोन में पानी और सफाई से जुड़ी शिकायत आती भ्भी है तो जरूरी नहीं, इनके कहने पर एएचओ या दरोगा वह काम कर ही दें। निगम में इसके लिए अलग से व्यवस्था और पद बने हुए हैं और वे उसी क्रम में सुनवाई भी करते हैं।
जोन पर जिम्मा, लेकिन लिखित दखल नहीं, इसलिए व्यवस्था संचालन में दिक्कत
सफाई- इसके लिए स्वास्थ्य का अपर आयुक्त, उसके बाद उपायुक्त, जोन में सहायक स्वास्थ्य अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी, स्वच्छता निरीक्षक और दरोगा है। कोई भी जोन के प्रति उत्तरदायी नहीं है, लेकिन शिकायत जोन में आती है।
पानी- इसके लिए जलकार्य शाखा अलग है। इसमें जलकार्य अपर आयुक्त, चीफ इंजीनियर, कार्यपालन यंत्री, जोन में सहायक यंत्री, उपयंत्री हैं। जोन कार्यालय से इनका कोई लेना देना नही है, जोन में आमजन की शिकायत पर सुनवाई की गारंटी नहीं है।
सीवेज- इसके लिए सीवेज प्रकोष्ठ है और एक प्रभारी बना रखा है। एक अपर आयुक्त को इसका जिम्मा दिया है। जोन में शिकायत आती है, लेकिन सीवेज प्रकोष्ठ इसके अधिन नहीं है, दिक्कत दूर नहीं होती।
इंजीनियरिंग सेल- सिविल इंजीनियरिंग का विभाग अलग है। नगर यंत्री इसके इंचार्ज है, लेकिन लोग जोन में आते हैं।
जलकार्य- ये भी अलग शाखा है और इसका सिस्टम अलग है। जोन की ये सुनवाई नहंी करते। सीधे दखल नहीं होने से एई वाटर वक्र्स जोन के प्रति उत्तरदायी नहीं। ऐसे में आमजन की शिकायत दूर नहीं हो पाती।
नोट- इस तरह अन्य विभागों में भी स्थिति है।
जोन और वार्ड लोगों के करीब है इसलिए वहां लोग पहुंचते हैं। जोन के अधिकारियों को व्यवस्थाओं में जोड़ा हुआ है, सूचना संबंधित सेल-शाखा तक पहुंचती है तो शिकायत का निराकरण भी होता है। कोई परेशानी नहीं है। - कमल सोलंकी, अपर आयुक्त
Published on:
23 Nov 2019 11:12 am
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