
भोपाल। रेलवे यात्रियों को यदि सुविधाएं नहीं मिल पाए तो चुप होकर न बैठ जाएं। अपने हक की बात करें और आवाज उठाए। राजधानी के लोहिया सदन निवासी रघु ठाकुर के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था। रघु ठाकुर ने टिकट के साथ नाश्ता और खाना बुक किया था। टिकट के साथ इसका पैसा भी रेलवे ने ले लिया था। लेकिन जब नाश्ता आया तो सभी यात्रियों को दिया गया, रघु ठाकुर को नहीं दिया गया।
इसके बाद खाना भी आया और सभी को दिया गया लेकिन रघु ठाकुर को नहीं दिया गया। यह बार-बार आग्रह करते रहे कि उन्होंने टिकट के साथ ही नाश्ते और खाने का पैसा दिया है, जब ट्रेन की पेंट्रीकार का स्टाफ नहीं माना तो रेलवे के बड़े अधिकारियों से इसकी शिकायत की गई। तब भी उन्हें खाना नहीं मिला।
रघु ठाकुर शताब्दी एक्सप्रेस के इ-कोच में ग्वालियर से भोपाल यात्रा कर रहे थे। उन्होंने टिकट के साथ ही नाश्ता और खाना बुक किया था। खास बात यह है कि बार-बार कहने के बावजूद उन्हें यह सब नहीं दिया गया। यहां तक कि उन्हें पानी की बोतल तक नहीं दी गई।
उपभोक्ता आयोग में लगाई याचिका
रेलवे प्रशासन के व्यवहार से आहत भोपाल निवासी रघु ठाकुर ने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई थी। शुक्रवार को रेलवे को जिम्मेदार ठहराते हुए यात्री रघु ठाकुर को मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 10 हजार रुपए देने के आदेश दे दिए गए।
ऐसा हुआ था उस दिन
रघु ठाकुर ने सात साल पहले 2016 में जबलपुर रेलवे के जनरल मैनेजर, डीआरएम भोपाल और महाप्रबंधक उत्तर रेलवे के खिलाफ याचिका लगाई थी। रघु ठाकुर ने अपनी याचिका में लिखा था कि एक अप्रैल 2015 को शताब्दी एक्सप्रेस से एग्जीक्यूटिव क्लास में यात्रा कर रहे थे। रेलवे की ओर से नाश्ता, खाना और पानी उपलब्ध कराया जाना था। टिकट के साथ राशि भी ली गई थी, लेकिन कुछ भी उपलब्ध नहीं कराया गया। कोच अटेंडेंट की ओर से उसी कोच में बैठे अन्य यात्रियों को चाय, नाश्ता, उपलब्ध कराया जाता रहा, जब उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि मंत्री हैं, इसलिए नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। भोपाल तक पहुंचने के बाद भी उपभोक्ता को चाय और नाश्ता नहीं दिया गया।
रेलवे लगाई फटकार
रेलवे ने अपने तर्क में लिखा था कि रेलवे ने किसी यात्री से चाय व नाश्ता के लिए कितनी राशि ली है और कब और कहां लंच व डिनर देना है। यह नीतिगत मामला है। इसका निराकरण का क्षेत्राधिकार उपभोक्ता आयोग को नहीं है। इसके बाद आयोग ने रेलवे को कड़ी फटकार लगाई। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता को यात्रा के दौरान राशि लेने के बाद खान-पान की व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराकर सेवा में कमी की गई है। मामले में आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल, सदस्य सुनील श्रीवास्तव और प्रतिभा पांडेय की बेंच ने फैसला सुनाया। साथ ही रेलवे को निर्देश दिए कि दो माह के भीतर सेवा में कमी के लिए पांच हजार रुपए, मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए तीन हजार और वाद व्यय के लिए दो हजार रुपए वादी को दिए जाएं।
Updated on:
31 Dec 2022 06:09 pm
Published on:
31 Dec 2022 06:08 pm
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