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योगी आदित्यनाथ नहीं हैं असली ‘बुल्डोजर बाबा’, एमपी का यह नेता था ‘बुल्डोजर मंत्री’

bulldozer minister-योगी आदित्यनाथ पहले सीएम नहीं हैं, जिन्हें लोग बुल्डोजर बाबा कह रहे हैं, मध्यप्रदेश के इस नेता लेते थे फैसला आन द स्पॉट...।

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भोपाल

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Manish Geete

Mar 19, 2022

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भोपाल। उत्तर प्रदेश में अपराधियों के अवैध निर्माण पर बुल्डोजर चलाकर सुर्खियों में आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सभी 'बुल्डोजर बाबा' (bulldozer baba) बोलने लगे हैं। विधानसभा चुनाव में भी यह शब्द जमकर इस्तेमाल हुआ। लेकिन शायद आप यह नहीं जानते होंगे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (cm yogi adityanath) असली बुल्डोजर बाबा नहीं हैं। कोई और मंत्री हैं जो बुल्डोजर के नाम से चर्चित रह चुका हैं। जो मध्यप्रदेश के इस मंत्री को जानता है, वो उन्हें 'बुल्डोजर मंत्री' (bulldozer minister) ही कहता रहा है।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर (babulal gaur) को सभी बुल्डोजर मंत्री के नाम से जानते हैं। जब वे 90 के दशक में पटवा सरकार में नगरीय प्रशासन मंत्री थे तो उन्होंने प्रदेशभर में जमकर अतिक्रमण विरोधी अभियान को अंजाम दिया था। अतिक्रमण माफिया भी खौफ में रहते थे। वे किसी की नहीं सुनते थे। इसलिए लोग उन्हें 'बुल्डोजर मंत्री' ही कहने लगे थे।

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जमकर चलता था बुल्डोजर

पटवा सरकार में नगरीय प्रशासन मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रदेशभर में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर जमकर सुर्खियां बटोरी थीं। वे जहां भी अतिक्रमण होता था, बुल्डोजर के साथ खुद भी पहुंच जाते थे। कोई विरोध करता था तो तुरंत ही अतिक्रमण तोड़ने के आदेश दे देते थे। उनके इस अंदाज से अतिक्रमण माफिया में खौफ बढ़ गया था। अतिक्रमणकारी उनसे डरने लगे थे। खौफ का आलम यह था कि लोग खुद ही अपने अतिक्रमण हटाने लग गए थे।

कई रास्ते किए साफ

बाबूलाल गौर मार्च 1990 से दिसम्बर 1992 तक पटवा सरकार में नगरीय प्रशासन मंत्री थे। भोपाल में ऐसी कई जगह थीं, जहां अतिक्रमणकारियों का रुतबा था और उनके अतिक्रमण कोई नहीं हटा सकता था। बाबूलाल गौर ने ऐसे लोगों पर कार्रवाई की थी। भारत टॉकीज और भोपाल टॉकीज के भीड़भाड़ वाले इलाके में अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई हुई। आज कई सड़कें हैं जो चौड़ी हैं और खुली-खुली नजर आती है, वो बाबूलाल गौर की सख्त कार्रवाई का नतीजा है।


खास अंदाज था

बताया जाता है कि बाबूलाल गौर ने अतिक्रमणकारियों पर सख्ती का एक अलग ही अंदाज विकसित कर लिया था। वे अतिक्रमण हटाने के लिए टीम भेजते थे। लोग नहीं मानते थे तो बुल्डोजर मंगवा लेते थे। और बुल्डोजर का इंजन स्टार्ट करवा देते थे। बुल्डोजर का इंजन चालू हालत में देख अतिक्रमणकारी खुद ही अतिक्रमण हटाने लग गए थे।

वीआईपी रोड बाबूलाल की देन

रेत घाट इलाका ऐसा था जहां अतिक्रमण कर बनाई गई सैकड़ों झुग्गियां थीं। यहां से भी झुग्गियां ऐसी ही सख्ती से हटाई गई। यहां से अधिकारियों की सख्ती के बावजूद अतिक्रमण नहीं हट पा रहा था। ऐसे में बाबूलाल गौर ने अपने अंदाज में सख्ती की और पूरा अतिक्रमण हटा दिया गया। आज इसी स्थान पर वीआइपी रोड नजर आती है।