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ओमिक्रॉन का आर्थिक असर-नहीं सुधरे हालात तो बंद हो जाएंगे ये धंधे

कोरोना की तीसरी लहर का पीक समय जनवरी के अंतिम सप्ताह में आएगा। इसी भय से लोग होटल-रेस्टोरेंट में जाने से बच रहे हैं।

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ओमिक्रॉन का आर्थिक असर-नहीं सुधरे हालात तो बंद हो जाएंगे ये धंधे

ओमिक्रॉन का आर्थिक असर-नहीं सुधरे हालात तो बंद हो जाएंगे ये धंधे

भोपाल. एमपी में कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक ने लोगों को भयभीत कर दिया है, लोगों ने अब डर के मारे बाहर का खाना पीना भी कम कर दिया है, जिसका सीधा असर होटल और रेस्टोरेंटों पर पडऩे लगा है, चूंकि इस व्यवसाय से छोटे से लेकर बड़ा आदमी तक सभी जुड़े हंै। ऐसे में अगर इन हालातों में सुधार नहीं आया तो कई छोटी मोटी दुकानें बंद होने की संभावना भी है।

आशंका व्यक्त की जा रही है कि कोरोना की तीसरी लहर का पीक समय जनवरी के अंतिम सप्ताह में आएगा। इसी भय से लोग होटल-रेस्टोरेंट में जाने से बच रहे हैं। इससे खान-पान के कारोबार में गिरावट आ रही है।

मध्यप्रदेश सहित राजधानी भोपाल में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसकी तीसरी लहर ने आम आदमी के साथ उन व्यवसायियों के व्यवसाय पर भी असर डाला है, जो खान-पान के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। ग्राहकों की घटती संख्या और शासन-प्रशासन द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंधों से होटल-रेस्टोरेंट का व्यवसाय घटकर आधा यानी 50 प्रतिशत रह गया है। महामारी का रूप बढ़ेगा तो यह आंकड़ा और भी नीचे आ सकता है।

कारोबार से जुड़े जानकारों की माने तो होटल-रेस्त्रां व्यवसाय को एक बार फिर से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। दिनों दिन ग्राहकों की संख्या घट रही है। इतना ही नहीं जो लोग वीकेंड पर बाहर घूमने-खाने जाते थे, उनकी संख्या भी घटती जा रही है। होटल वालों ने चिंता व्यक्त की है कि अब उतना ही खाना-मिठाई-नमकीन तैयार किए जा रहे हैं जितनी की खपत हो सकें।

-1000 से अधिक होटल-रेस्टोरेंट राजधानी में
-1 लाख लोग जुड़े हैं होटल-रेस्टोरेंट व्यवसाय से
-5३ बार संचालित हो रहे हैं राजधानी भोपाल में
-500 से अधिक मावा-मिठाई और नमकीन की दुकानें
-11 बजे तक ही होटल-रेस्टोरेंट संचालित करने की अनुमति

लहर का असर कम, भय ज्यादा
कोरोना की तीसरी लहर का असर फिलहाल कम है, लेकिन लोगों में भय ज्यादा है। कारोबारी कृष्ण कुमार बांगड़ का मानना है कि होटल-रेस्टोरेंट में लगने वाली खाद्यान्न सामग्री की मांग में बहुत गिरावट आई है। स्कूल-कॉलेज, हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थी घर को लौटने लगे हैं। परिवार के लोग अब बाहर का खाना पसंद नहीं कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में व्यवसाय में काफी गिरावट आ गई है। मध्यप्रदेश टेंट एसोसिएशन के प्रवक्ता रिंकू भटेजा कहते हैं कि नाइट कफ्र्यू, शादियों में मेहमानों की संख्या घटने का असर सभी तरह के बाजारों में देखा जा रहा है।

महामारी प्रकोप से अधिकांश होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति में है। मौजूदा हालातों को देखते हुए कारोबारी अब सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि व्यवसाय शाम से शुरू होकर ३-4 घंटे चलता है। यहां रात 11 बजे तक ही होटल-रेस्टोरेंट खोलने की अनुमति है। उनका कहना है कि रात 10 से ही बंद की तैयारी करना पड़ता है। जो ग्राहक होटल में बैठे है, उन्हें रात 11 बजे के पहले बाहर करना होता है। कई ग्राहकों के ऑर्डर कैंसिल करना पड़ता है। मिठाई कारोबारी मोहन शर्मा घंटे वाला बताते हैं कि उद्योग को लगभग तीन वर्षों से लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर ने बेचैनी पैदा कर दी है। होटल-रेस्टोरेंट व्यवसाय पहले से ही घाटे में चल रहा है। कई प्रतिष्ठान आर्थिक संकट के चलते बंद हो गए हैं। आगे भी भय बना हुआ है। ग्राहकों की संख्या आधी रह गई है।
- तेजकुलपाल सिंह पाली, अध्यक्ष, भोपाल होटल एंड रेस्टोरेंट

महामारी के चलते प्रतिबंधों का भय तो बना हुआ है। 40 से 50 प्रतिशत तक बिजनेस डाउन हुआ है। खर्चे भी लगे हुए हैं। इससे होटल-रेस्टोरेंट व्यवसाय प्रभावित हुआ है।
- मुरली हरवानी, होटल-रेस्टोरेंट व्यवसायी