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टॉप तैराक बन गई तालाब से मछली पकड़कर पेट भरने वाली मानसी

पिता के साथ तालाब में मछली पकड़ते हुए सीखा खेल का हुनर, एक सपना, बस जीतना है सोना

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तालाब में मछली पकड़ते हुए सीखा खेल का हुनर

भोपाल. खेलो इंडिया यूथ गेम्स में इस बार कैनो स्लैलम के मुकाबले 6 और 7 फरवरी को महेश्वर (खरगोन) में खेले जाएंगे। इस खेल में मध्यप्रदेश के चार खिलाड़ी मानसी बाथम, प्रद्युम्न राठौड़, भूमि बघेल और विशाल वर्मा अपनी चुनौती पेश करेंगे। इस बार 14 साल की मानसी पर सभी की निगाहें होंगी. खेलो इंडिया के सिलेक्शन ट्रायल में वह टॉप पोजिशन पर रही थीं। पेट भरने के लिए अपने पिता के साथ मछली पकड़ने जानेवाली मानसी ने इस दौरान तैराकी का हर गुर भी खुद ही सीख लिया।

मानसी ने अपना बचपन पिता राजेश बाथम के साथ नाव में बिताया। वह रोज सुबह 6 से 9 बजे तक पिता के साथ मछली पकड़ती थीं। इस दौरान तैराकी का हर गुर खुद ही सीख लिया। वर्ष 2017 में हार्ट अटैक से पिता की मौत हो गई। परिवार की जिम्मेदारी मां-भाई पर आ गई। एक वक्त ऐसा आया, जब मानसी को लगा कि अब वह पढ़ाई भी नहीं कर पाएगी, लेकिन हालात बदले। 10वीं में पढऩे वाली मानसी ने बताया कि मेरा बचपन कश्ती में ही बीता है तो कभी पानी से डर नहीं लगा।

जर्मनी से मिलीं बोट
मानसी ने बताया, मेरी हर शाम तालाब किनारे बीतती थी। भाई ने कहा कि कैनो स्लैलम खेलो। मैंने टेस्ट पास कर प्रैक्टिस की। पिछले साल नेशनल में सिल्वर मेडल जीता। मालाबार फेस्टिवल में गोल्ड मिला। 2015-16 में मप्र कयाकिंग-कैनोइन एसोसिएशन को जर्मनी से पुरानी बोट मिली थीं, उन्हीं से हम अभ्यास कर रहे हैं।

पहले फुटबॉल खेलते थे, किस्मत से बने बॉक्सर
इधर आगरा जिले के ग्राम बाग फराना श्मशाबाद रोड के 17 वर्षीय बॉक्सर अमर राठौर की भी अलग कहानी है. वे 10 साल की उम्र से फुटबॉल खेलने में जुट गए थे। बाद में दोस्त की सलाह पर बॉक्सिंग में कदम रखा और पलट कर नहीं देखा। वे नेशनल जूनियर, स्कूल और अंडर-14 जैसी स्पर्धाओं में एक-एक गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। अमन का सपना है कि वे सेना और हरियाणा के युवा खिलाडिय़ों की तरह खुद को तैयार करें। उनके लिए मौजूदा लक्ष्य यूथ कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल लाने का है। भोपाल आए अमन का कहना है कि खेलो इंडिया से निकले खिलाड़ी देश का नाम दुनिया में ऊंचा करने का माद्दा रखते हैं।