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जिस एजेंसी ने लिया काम, उसने भी दूसरे को ठेके पर दे दिया काम

कुत्तों की नसबंदी का मामला

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जिस एजेंसी ने लिया काम, उसने भी दूसरे को ठेके पर दे दिया काम

भोपाल। राजधानी में कुत्तों की नसबंदी मामले में नया तथ्य सामने आया है। नगर निगम ने चेन्नई की जिस नवोदय संस्था को नसबंदी का काम दिया है, उसने यह काम भोपाल की ही एक अन्य संस्था को दे दिया। यानी नवोदय ने काम तो लिया, लेकिन वह खुद न करते हुए दूसरे से काम करवा रही है। इतना ही नहीं कुत्तों की नसबंदी की मॉनिटरिंग का सैद्धांतिक शेड्यूल तो है लेकिन इसे फॉलो नहीं किया जाता। कांग्रेसी पार्षदों के एक औचक निरीक्षण में ये साबित भी हुआ है।

ऐसे में ये पता करना मुश्किल है कि नसबंदी हुई भी है या नहीं। भोपाल में कुत्तों की नसबंदी का काम चेन्नई की नवोदय संस्था ने चैरिटेबल वेलफेयर सोसायटी को दे दिया है। यानी काम लेने के बाद नवोदय का सीधे इससे कोई मतलब नहीं है। सोसायटी की ओर से इस पूरे काम को नीलम कौर को-ऑर्डिनेट कर रही हैं। कौर का कहना है कि 2013 में हमने ही इस काम के लिए इनिशिएटिव लिया था, लेकिन खर्च काफी था और टेंडर में भाग नहीं ले सकते थे, इसलिए नवोदय ने भाग लिया। उसे काम मिला, लेकिन हम इसे कर रहे हैं।

रोजाना 40 कुत्तों के ऑर्गन नहीं जांचते डॉक्टर्स

इस एजेंसी को भुगतान करने के लिए निगम की ओर से डॉक्टर्स की टीम बनाई है। नगर निगम के पशु चिकित्सक डॉ. एसके श्रीवास्तव के साथ दो अन्य डॉक्टर व एक चैरिटेबल वेलफेयर सोसायटी का सदस्य रहता है। दावा है कि संस्था रोजाना 40 कुत्तों की नसबंदी करती है और ऑर्गन की जांच डॉक्टर की टीम कर उसे अनुमोदित करती है। हालांकि कांग्रेसी पार्षदों ने जब नसबंदी केंद्र पर औचक निरीक्षण किया तो वहां काफी पुराने कुत्ते और ऑर्गन मिले थे। रजिस्टर में भी एंट्री नहीं थी और मामला निगम परिषद में भी उठा था।

एक काम किया नहीं, फिर दे दी दूसरी जिम्मेदारी

गणेश मंदिर से बोर्ड ऑफिस बीआरटीएस सर्विस रोड का काम जिस सरमन इंडिया कंपनी ने बीते करीब आठ माह से भुगतान नहीं होने की बात पर बंद रखा है, नगर निगम ने इसी कंपनी को बीआरटीएस पैचवर्क का काम भी दे दिया। पूरे नौै करोड़ रुपए में यह काम दिया गया है। ऐसे में आशंका है कि कहीं इस काम को भी शुरू करने के बाद भुगतान नहीं होने की बात पर अधूरा न छोड़ दिया जाए। अरेरा कॉलोनी से लेकर शंकर नगर, बोर्ड ऑफिस तक के लोगों को बीआरटीएस की भीड़ भरी रोड से बचाने सर्विस रोड का काम शुरू किया था। सरमन इंडिया कंपनी के संचालकों का कहना है कि उनका करीब डेढ़ करोड़ रुपए का चेक पास नहीं किया, जिससे काम रोका है। ऐसे में नया काम वे कैसे शुरू करेंगे और भुगतान में देरी हुई तो काम रोकेंगे नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं ली।