17 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पूर्व सीएम शिवराज का हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र, लिखा- छात्रों को माफ कर दें

मामले में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखते हुए संबंधित छात्रों को माफ करने का अनुरोध किया है।

3 min read
Google source verification
news

पूर्व सीएम शिवराज का हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र, लिखा- छात्रों को माफ कर दें

ग्वालियर में कुलपति की जान बचाने के लिए जज की कार छीनकर इलाज कराने ले गए छात्रों पर केस दर्ज होने के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की एंट्री हो गई है। इस मामले शिवराज ने जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है। पत्र के जरिए उन्होंने चीफ जस्टिस से संबंधित छात्रों को माफ करने का अनुरोध किया है।

शिवराज सिंह चौहान द्वारा लिखे गए पत्र में कहा है कि कार छीनकर ले जाने वाले छात्रों का भाव किसी तरह का द्वेष या आपराधिक कार्य करने का नहीं था। उन्होंने उच्च न्यायाल से स्वत: संज्ञान लेने की बात कही है। साथ ही छात्रों के भविष्य को देखते हुए दर्ज प्रकरण को वापस लेकर छात्रों को क्षमा करने का भी अनुरोध किया है।

यह भी पढ़ें- CM के आदेश पर अमल : धर्मगुरुओं ने पेश की मिसाल, जुमे की नमाज से पहले खुद हटाए लाउडस्पीकर


शिवराज ने चीफ जस्टिस को लिखा पत्र

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा जबलपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में कहा है कि समाचार पत्रों के माध्यम से एक प्रकरण मेरे संज्ञान में आया है जिसपर मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। निजी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर रणजीत सिंह का दिल्ली से झांसी जाते समय ट्रेन में अचानक स्वास्थ्य खराब बिगड़ गया और उनके साथ यात्रा कर रहे कुछ छात्रों ने उन्हें इलाज के लिए ग्वालियर स्टेशन पर ही उतार लिया। इसके बाद वो छात्र बीमार कुलपति को लेकर रेलवे स्टेशन से बाहर आए, यहां उन्होंने न्यायाधीश की उपयोग में आने वाली कार की चाबी छीनकर उसी कार से कुलपति को अस्पताल ले गए, ताकि उन्हें शीघ्र चिकित्सकीय सुविधा दिलाई जा सके। हालांकि, इलाज के दौरान कुलपति जी को बचाया नहीं जा सका। हालांकि, इस मामले में पुलिस ने दो छात्रों पर डकैती की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।


पूर्व सीएम ने आगे कहा कि महोदय, चूंकि ये एक अलग तरह का मामला है, जिसमें पवित्र उद्देश्य के साथ अपराध किया गया है। मामले में दोनों छात्र हिमांशु और सुकृत ने मानवी आधार पर सहयोग और जान बचाने की अभिप्राय से ये अपराध किया है। छात्रों का भाव किसी तरह का द्वेश या आपराधिक कार्य करने का नहीं था। चूंकि ये 1 अपराध है, लेकिन क्षमता योग कृत भी है। अतः मेरा निवेदन है कि, माननीय उच्च न्यायालय सोता संज्ञान लेकर दोनों छात्रों के भविष्य को देखते हुए दर्ज प्रकरण को वापस लेकर छात्रों को क्षमा करने की कृपा करें।

यह भी पढ़ें- इस गांव में आने से डरते हैं लोग, यहां कोई शादी भी नहीं करता, गंभीर है वजह


ये है मामला

आपको बता दें कि शिवपुरी स्थित पी.के यूनिवर्सिटी के 68 वर्षीय पूर्व वाइस चांसलर रणजीत सिंह यादव दिल्ली से झांसी जा रहे थे। इसी दौरान अचानक ट्रेन में उनकी तबीयत बिगड़ गई। उसी ट्रेन से ABVP से जुड़े कुछ छात्र भी सफर कर रहे थे। उनकी तबीयत बिगड़ती देख छात्रों ने उन्हें ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर उतरवा लिया और इलाज के लिए रेलवे स्टेशन से बाहर ले आए। यहां स्टेशन के बाहर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की गाड़ी खड़ी थी और ड्राइवर गाड़ी से बाहर चाबी हाथ में लिये खड़ा था। छात्रों ने जल्द से जल्द कुलपति को इलाज दिलाने के उद्देश्य से गाड़ी के ड्राइवर के हाथ से चाबी छीनी और जबरदस्ती उसी गाड़ी से वीसी को इलाज के लिए जयारोग्य अस्पताल ले गए। हालांकि कुछ देर इलाज के दौरान ही जयारोग्य के डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।