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सावधान! एसबीआइ के मोबाइल ऐप योनो से भी ठगी, जानिए कैसे किया फर्जीवाड़ा

बैंक ऐप की फर्जी लिंक भेजकर व्यवसायी के खाते से 2.37 लाख रुपए उड़ाए, साइबर सेल ने नालंदा से दो आरोपियों को दबोचा

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बैंक ऐप की फर्जी लिंक

भोपाल. सावधान! अब राष्ट्रीयकृत बैंकों के आधिकारिक एप के नाम से भी ठगी होने लगी है. दरअसल साइबर बदमाश डार्कवेब के जरिये बैंकों के फर्जी एप की लिंक खरीद लेते हैं जोकि बैंकों के वास्तविक एप की तरह ही दिखते हैं, जिससे लोग इनके झांसे में आ जाते हैं। ऐसे ही एक मामले में एसबीआइ द्वारा संचालित मोबाइल ऐप योनो की फर्जी लिंक और इसी की तरह दिखने वाले ऐप से भोपाल के एक व्यवसायी के खाते से 2.37 लाख रुपए उड़ाने वाले दो साइबर ठगों को राज्य साइबर सेल की टीम ने बिहार के नालंदा जिले से दबोचा है।

आरोपियों ने 12 अक्टूबर 2022 को व्यवसायी के मोबाइल पर मैसेज भेजकर ऐप के जरिये आधार और पैन कार्ड अपडेट करने का झांसा दिया। व्यवसायी ने इस लिंक से फर्जी ऐप को ओपन कर बैंक खाते से संबंधित जानकारी साझा कर दी। कुछ देर बाद साइबर ठगों ने उनके खाते से 2.37 लाख रुपए उड़ा दिए।

फरियादी ने इसकी शिकायत राज्य साइबर सेल में की थी। एडीजी राज्य साइबर सेल योगेश देशमुख के निर्देश पर गठित टीम ने बैंक के फर्जी ऐप समेत अन्य जानकारी निकाली और नालंदा के नूरसराय से दो आरोपियों मंटू यादव (22) और नंदन कुमार (20) को गिरफ्तार किया। आरोपी मंटू यादव झारखंड के गिरीडीह जिले का तो नंदन नूरसराय जिले का ही मूल निवाासी है। इनके पास से फर्जी नाम से ली गईं तीन सिम, तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन, फर्जी बैंक लिंक और वॉट्स ऐप के स्क्रीन शॉट और ठगी की राशि में 14 हजार रुपए जब्त किए गए हैं।

डार्कवेब से हासिल की थी ऐप लिंक
आरोपियों से की गई पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिये डार्कवेब से बैंक के फर्जी ऐप की लिंक हासिल की थी। इस लिंक पर दी गई जानकारी को ये ठग आसानी से देख सकते थे। इसी के आधार पर ठगी को अंंजाम दिया गया। निरीक्षक महेश लिल्हारे ने बताया कि आरोपियों ने खाते से निकाली गई राशि को सीधे हासिल नहीं किया, बल्कि इसके जरिये गोल्ड लोन फाइनेंस कंपनी की राशि का भुगतान किया गया। इसके बाद कई और बैंक खातों के जरिये ये राशि उन तक तक पहुंची। साइबर सेल जांच कर रही है कि किस व्यक्ति के गोल्ड लोन की राशि इस ठगी की रकम से चुकाई गई है। जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसियों को गुुमराह करने के लिए ठग कई बैंक खातों से राशि हासिल करते हैं। इसके लिए अज्ञात लोगों के पहचान-पत्रों के आधार पर सिम लेने के साथ ही बैंक खाते भी खुलवाए जाते हैं। इसके एवज में राशि का भी भुगतान होता है।

3 से 4 हजार में फर्जी ऐप की लिंक
जांच में पता चला कि वॉट्सऐप और टेलीग्राम के कई ग्रुप्स में डार्कवेब के जरिये बैंकों के फर्जी ऐप की लिंक तीन से चार हजार रुपए में मुहैया होती है। ये ऐप बैंकों के वास्तविक ऐप की तरह ही दिखते हैं, जिससे लोग इनके झांसे में आ जाते हैं। आरोपी साइबर ठगी के बाद न केवल सिम तोडकऱ फेंक देते थे, बल्कि बैंक खातों का भी उपयोग कुछ समय के लिए बंद कर देते थे।