12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

दो राज्यों के 1300 वर्ग किमी में चीतल, चिंकारा, नीलगायों का शिकार करेंगे एमपी के चीते

cheetah- एमपी के कूनो नेशनल अभयारण्य के 2 चीतों को गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ दिया गया है।

2 min read
Google source verification
cheetah will hunt in 1300 sq km of two states

cheetah will hunt in 1300 sq km of two states

cheetah - एमपी के कूनो नेशनल अभयारण्य के 2 चीतों को गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को चीते प्रभाष और पावक को यहां छोड़ा। उन्होंने बताया कि मई में बोत्सवाना से लाए जा रहे 4 चीतों को भी गांधी सागर अभ्यारण्य में ही छोड़ा जाएगा। एमपी के ये चीते जल्द ही राजस्थान तक जा सकेंगे। गांधी सागर अभयारण्य में चीतों के शिकार के लिए सैंकड़ों चीतल, चिंकारा, नीलगायों और जंगली सुअरों को यहां लाया जा चुका है। भविष्य में अभयारण्य का दायरा भी बढ़ाया जाएगा जिससे चीते करीब 1300 वर्ग किमी एरिया में घूम सकेंगे।

चीतों को मध्यप्रदेश की आबोहवा रास आ गई है जिससे इनकी ग्रोथ रेट भी सबसे ज्यादा हो गई है। चीतों को लाने के साथ ही गांधी सागर में सड़क और एयर कनेक्टीविटी बढ़ाई जा रही है।

कूनो से गांधी सागर अभ्यारण्य लाए गए चीतों को फिलहाल 16 वर्ग किलोमीटर के बाड़े में रखा जाएगा। खेमला में 8900 हेक्टेयर क्षेत्र में 3 बाड़े बनाए गए हैं। इसके बाद रावलकुडी के 64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में चीतों को रखा जाएगा। अभी इन्हें खुला जंगल नहीं मिलेगा। चीतों को बाड़े में रखकर निगरानी की जाएगी।

यह भी पढ़े :दो दोस्तों के साथ कार में घूमने निकली भोपाल की एयर होस्टेस, फिर इस हाल में मिली…

प्रभास और पावक एक ही मां की संतान

प्रभास और पावक चीते एक ही मां की संतान है। इन दोनों को फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से कूनो लाया गया था। अब ये प्रदेश के माहौल में रचबस गए हैं। इनके शिकार के लिए गांधी सागर में करीब 150 चीतल, 70 चिंकारा, 50 जंगली सुअर और 50 नीलगाय लाई गई हैं। चीतों को पानी के लिए जगह-जगह पोखर बनाए गए हैं।

राजस्थान जाएंगे चीते

गांधी सागर अभयारण्य राजस्थान की सीमा से लगा है। इसके पूर्व में कोटा जिले का रावतभाटा और भैंसरोड़गढ़ सेंचुरी है जबकि उत्तर में चित्तौड़गढ़ जिले की सीमा है। दोनों राज्य एक अंतरराज्यीय चीता संरक्षण क्षेत्र बनाने पर सहमत हो चुके हैं।
गांधी सागर का दायरा बढ़ाकर 1300 वर्ग किलोमीटर तक करने की तैयारी है। इस प्रकार जल्द ही चीतों को बड़ा दायरा मिलेगा।