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सीएम बोले चित्रगुप्त प्रकटोत्सव पर एेच्छिक अवकाश, मंदिर परिसर में बनाएंगे ऑडिटोरियम

नेवरी स्थित चित्रगुप्तधाम के लोकार्पण और प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की घोषणा, बोले कायस्थ समाज रचनात्मक समाज...

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CM shivraj singh

भोपाल. चित्रगुप्त प्रकटोत्सव पर एेच्छिक अवकाश घोषित किया जाएगा, साथ ही मंदिर परिसर में सरकार की ओर से ऑडिटोरियम अथवा जो भी समाज के लोग चाहेंगे वह निर्माण शासन की ओर से किया जाएगा। इसे लेकर समाज के लोगों के साथ सहमति बनाएंगे और जो भी समाज कहेगा उस पर अमल करते हुए कार्य करेंगे।

यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार शाम को नेवरी स्थित नवनिर्मित चित्रगुप्तधाम के लोकार्पण समारोह के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि कायस्थ समाज एक रचनात्मक समाज है। कोई भी चीज बनाना आसान काम नहीं है, लेकिन समाज ने इतने कम समय में भव्य मंदिर बना दिया।

शासन की ओर से भी इसमें हर संभव सहयोग किया जाएगा। इसके पहले राजा रामकिशन पार्वती बाई ट्रस्ट के अध्यक्ष कैलाश नारायण सारंग ने अपने उद्बोधन के दौरान मुख्यमंत्री से मांग की थी, कि भगवान चित्रगुप्त प्रकटोत्सव के दौरान सरकारी अवकाश घोषित किया जाए।

कार्यक्रम के दौरान सारंग ने निर्माण कार्य में सहयोग देने वाले कई कार्यकर्ताओं को बुलाकर मुख्यमंत्री के पैर पड़वाए। इस मौके पर रविनंदन सहाय, सांसद आलोक संजर, शशिभाई सेठ सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

सारंग ने पहले जनसंघ, फिर भाजपा फिर हम जैसे कार्यकर्ता बनाए
मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन के दौरान छात्र राजनीति के किस्से भी सुनाए, साथ ही कायस्थ समाज के वरिष्ठ लोगों के सहयोग के बारे में भी उन्होंने बताया उन्होंने कैलाश सारंग की तारीफ करते हुए कहा कि सारंग ने पहले जनसंघ, फिर भाजना और फिर हम जैसे कार्यकर्ता बनाए है। उन्होंने कहा कि कुशाभाऊ ठाकरे जीते जागते महापुरुषों में से एक थे, वहीं स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी मेरे मन में आग पैदा करते हैं।

विश्वास सारंग को बबलू कहकर किया संबोधित

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सहकारिता राज्यमंत्री विश्वास सारंग को बबलू कहकर कई बार संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समाज की जो भी मांग है, अथवा मंदिर परिसर में ऑडिटोरियम अथवा जो भी बनाना है, इस संबंध में मैं बबलू से बात कर लूंगा, और जो भी समाज की मांग होगी उसे पूरा करेंगे। एेच्छिक अवकाश को लेकर भी चर्चा कर सहमति बनाएंगे।

एकात्मता लाने के लिए बनाया मप्र गान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी राज्यों को अपने-अपने राज्य, भाषा पर गर्व है, होना भी चाहिए,किसी को पंजाबी, किसी को मराठी, किसी को बिहारी तो किसी को गुजराती, लेकिन मप्र एेसा राज्य है, जहां गर्व के भाव दिखाई नहीं देता था, क्योकि हमारी कोई अलग से भाषा नहीं है। इसलिए गर्व का भाव आए और एकत्मता बनाने के लिए मप्र गान बनाया है।

आपको देखकर तो अच्छे-अच्छों की लू उतर जाती है
कार्यक्रम खत्म होने के बाद मप्र गान के रचियता और वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आपको लू लगी होगी, वैसे आपको देखकर तो अच्छे-अच्छो की लू उतर जाती है।

उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि इस मंदिर का निर्माण में कैलाश और शिव का महता योगदान है, और मनकामेश्वर मंदिर में आपकी जो भी कामना हो वह पूरी हो।

चित्रगुप्त स्तुति के लिए हुए खड़े
कार्यक्रम की शुरुआत में मंच से कलाकारों द्वारा चित्रगुप्त स्तुति का गायन किया गया, इस दौरान मंच पर सभी अतिथि और दर्शक दीर्घा में लोग कुर्सियों पर बैठे थे। जब स्तुति को थोड़ी देर हो गई, तब अचानक विश्वास सारंग ने सभी को खड़े होने का ईशारा किया, इसके बाद मंच पर अतिथि और दर्शक दीर्घा में लोग खड़े हुए।

विधि विधान से हुई स्थापना
इसके पहले दिन में मंदिर परिसर में विधि विधान के साथ देव प्रतिमाओं की स्थापना की गई। यहां चित्रगुप्त दरबार, राम दरबार, मां दुर्गा, राधाकृष्ण और साईबाबा की प्रतिमाओं की स्थापना हुई। मुख्यमंत्री ने भी यहां आकर दर्शन किए।