
10-10 लाख रुपए
भोपाल। कोरोनाकाल मे अनाथ हुए भोपाल के 19 बच्चों को अब भविष्य की उड़ान भरने के लिए सहारे की जरूरत नहीं होगी। प्रधानमंत्री केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत उन्हें शामिल किया गया है। 19 में 3 बच्चे अक्षिता, हर्षिल सैनी और सलोनी भारतीय 18 वर्ष के होने वाले हैं। उन्हें योजना से मिलने वाली राशि भविष्य संवारने में मदद करेगी। बाकी बच्चों को उम्र कम है। 23 वर्ष की उम्र में उन्हें 10 10 लाख रुपए मिलेंगे।
इसी उम्र में वे राशि निकाल सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश भर में ऐसे बच्चों को चिट्ठी लिखी। पत्र के कुछ अंश पढ़कर भी सुनाए और भरोसा दिलाया कि वे अकेले नहीं है पूरा देश उनके साथ है। उन्होंने बच्चों से आगे बढ़ने और अच्छा भविष्य गढ़ने की अपील भी की।
अक्षिता को फीस का संकट नहीं
अक्षिता की उम्र 16 साल है। वह पढ़ाई में होशियार हैं। बुआ कल्पना शुक्ला अक्षिता व उसकी बहन (20) की देखभाल करती हैं। नई योजना से अक्षिता अपना भविष्य संवार सकेगी।
अनाथ बच्चों को जरूरतें पूरी करने हर माह मिलेंगे 4 हजार
कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पीएम केयर्स फॉर 'चिल्ड्रन' योजना के तहत मदद जारी की। पिछले साल लॉन्च इस योजना का मकसद ऐसे बच्चों की मदद करना है, जिन्होंने कोरोना के कारण 11 मार्च, 2020 से 28 फरवरी, 2022 के बीच माता-पिता या अभिभावक खो दिया हो। योजना के तहत बच्चों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हर माह 4 हजार रुपए दिए जाएंगे। पाच लाख तक के मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान हेल्थ कार्ड मिलेगा उच्च शिक्षा और प्रॉफेशनल कोर्स के लिए एजुकेशन लोन की सुविधा होगी और 23 साल की उम्र होने पर 10 लाख रुपए दिए जाएंगे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ऐसे बच्चों को संबोधित कर प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम केवर्स फॉर चिल्ड्रन कोरोना प्रभावित बच्चों की मुश्किलें कम करने का छोटा सा प्रयास है। यह इस बात का प्रतिबिंध है कि हर देशवासी पुरी संवेदनशीलता से इन बच्चों के साथ है।
प्रधानमंत्री ने लिखा बच्चों को यह पत्र...
मैं प्रधानमंत्री नहीं, आपके परिवार का सदस्य
आज मैं प्रधानमंत्री नहीं, अपने परिवार के एक सदस्य के रूप में आपको पत्र लिख रहा हूँ। दो आ वर्षों में कोरीना की विभीषिका में दुनिया भर के लोगों ने अपने को खोया है। आज मेरी मां की कुछ बातें याद आ रही हैं। वे बचपन में मुझे बताया करती थी। 100 साल पहले भी ऐसी त्रासदी से मेरा परिवार गुजर चुका है। जब पूरा विश्व महामारी की चपेट में था तो उन्होंने अपनी मां (मेरी नानी) को खो दिया था। उनका पूरा जीवन माँ के आंचल के बिना गुजरा सोचिए, कैसे उनका लालन-पालन हुआ होगा। इसलिए आपके अंतर्मन के द को मैं समझ सकता हूं. जब अभिभावक साथ नहीं हैं तो आपकी जिम्मेदारिया बढ़ गई है। आपके परिजन के तौर पर आपको विश्वास दिलाता हूं आप संघर्षों में अकेले नहीं है, पूरा देश आपके साथ है।
Published on:
31 May 2022 03:12 pm
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