
CID Pursues Recovery of ₹6689 Crore Belonging to Sahara in MP (PC: Patrika)
Sahara- रूपेश मिश्रा, भोपाल. सहारा समूह में फंसे 6689 करोड़ रुपए की वापसी को लेकर प्रदेश के 9.66 लाख निवेशकों के लिए राहतभर खबर है। अच्छे रिटर्न के वादे में जीवनभर की गाढ़ी कमाई निवेश करने वाले पीडि़तों की सुनवाई अब स्पीड पकड़ेगी। पुलिस मुख्यालय में पिछले 4 साल से धूल खा रही सहारा Sahara के निवेशकों की 75 शिकायतों की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआइडी) ने जांच शुरू कर दी। सीआइडी ने इन शिकायतों का डेटा तैयार किया। अफसर खुद पीडि़तों तक पहुंचे और ब्योरा जुटाया। इतना ही नहीं, सीआइडी ने जिलों में शिकायतों की जांच के लिए 12 टीमें भी भेजी हैं।
खास यह कि टीकमगढ़, विदिशा, गुना, अशोकनगर, सागर, मैहर समेत कई जिलों में अब तक 100 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी तकरीबन ट्रैस कर ली है। अब सीआइडी उन निवेशकों की मदद कर रही है, जिन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जारी सहारा रिफंड पोर्टल पर अप्लाई ही नहीं किया। उनसे अप्लाई करवाया जा रहा है। इससे निवेशकों के लिए दो तरह से रिफंड के रास्ते खुलेंगे। एक तो केंद्र की मदद से निवेश का हिस्सा मिल जाएगा। दूसरा, बाकी रकम की वापसी के लिए सीआइडी जांच के बाद की कार्रवाई काम आएगी।
मुनाफा देकर निवेशकों के पैसे नहीं लौटाने वाली सहारा समेत उसकी अन्य कंपनियों की प्रदेश भर के जिलों में दर्ज शिकायतों की जांच के लिए सीआईडी ने 12 टीमें जिलों में भेजी है। ये टीमें तस्दीक करेंगी कि शिकायत कब की और तब से अब तक इस पर क्या-क्या किया गया। जिलेवार की रिपोर्ट तैयार होगी। अब तक 4 जिलों टीकमगढ़, विदिशा, अशोकनगर और दमोह के 11 केसों में ठगे गए 42 करोड़ के मामले की जांच भी सीआइडी ने शुरू की है।
ईओडब्ल्यू पहले से ही कर रही 312 एकड़ जमीन के सौदे की जांच
पुलिस की विशेष शाखा सीआइडी देखेगी कि कंपनियां कहां-कहां चल रही हैं। उनकी संपत्तियां कहां-कहां हैं। बता दें, पहले से ही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) 312 एकड़ के सहारा जमीन गड़बड़झाले की जांच कर रही है। इन जमीनों का सौदा औने-पौने दाम में किया गया, बाद में ये रुपए पैसा सहारा-सेबी के ज्वाइंट खाते में भेजने के बजाय सहारा की अन्य कंपनियों में भेजे।
पहले चरण में राशि मिली, 90 प्रतिशत निवेशकों के रुपए अब भी फंसे
सुप्रीम कोर्ट ने 29 मार्च 2023 को आदेश दिया कि सहारा- सेबी खाते से 5,000 करोड़ रुपए निवेशकों को लौटाए जाएं। तब केंद्र सरकार ने सीआरसीएस (सहारा रिफंड पोर्टल) शुरू किया। वर्ष 2025-26 में पहले चरण में निवेशकों को 50 हजार रुपए तक का भुगतान किया गया। नई व्यवस्था में 10 लाख रुपए तक के क्लेम के लिए आवेदन/री-सबमिशन की प्रक्रिया तय की गई। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन और 30 दिन की जांच के बाद 45 दिन में भुगतान का लक्ष्य रखा। लेकिन मप्र में अब भी 90 फीसदी से ज्यादा निवेशकों के रुपए नहीं लौटाए जा सके हैं। अब सीआइडी जांच के दौरान यही प्रक्रिया निवेशकों से करा रही है।
केएमजे चिटफंड: लोगों को दोगुना मुनाफा देने का वादा कर निवेशकों से रुपए बटोरे और भाग निकली।
परिवार डेयरी चिटफंड: डेयरी व कृषि क्षेत्र में निवेश के नाम पर लोगों को रिटर्न का झांसा दिया।
सक्षम चिटफंड: डेयरी- रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर अच्छे मुनाफे का वादा किया। निवेशकों से रु. बटोरे और भाग खड़ी हुई।
प्रमुख बिंदु
एमपी में सहारा के 9.66 लाख निवेशक
इनमें से सिर्फ 1.55 लाख आवेदन ही प्रक्रिया में
6689 करोड़ रुपए फंसे हैं
355 करोड़ रुपए ही अब तक लौटाए
123 एफआईआर सहारा के खिलाफ दर्ज की गई पिछले 6 साल में
4 साल से धूल खा रहीं 75 शिकायतें
(स्रोत: विधानसभा में पेश आंकड़े।)
Published on:
11 Apr 2026 07:41 am
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