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चार साल में जागरुकता तो बढ़ी, पर स्वच्छ भोपाल के लिए सामूहिक प्रयासों की दरकार

इंदौर से सीखें सबक : करोड़ों खर्च करने के बाद भी नगर निगम को नहीं मिल सकी पूरी सफलता

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भोपाल.गांधी जयंती पर स्वच्छता अभियान को चार साल हो गए हैं, भोपाल लगातार दो साल सफाई मंे देश का दूसरा स्वच्छ शहर बन रहा है, लेकिन एक्सपट्र्स का कहना है कि लोगों में जागरुकता तो बढ़ी है, लेकिन धरातल पर वैसी सफाई और गंदगी करने वालों के मन में डर नहीं बन पाया। निगम प्रशासकों को एक बार इंदौर जाना चाहिए और उस तरह की व्यवस्था लागू करना चाहिए। गौरतलब है कि स्वच्छता अभियान के तहत कचरा परिवहन को लेकर करोड़ों की मशीनें खरीदी गईं। दस ट्रांसफर स्टेशन बनाए गए थे और अभियान पर 700 करोड़ से अधिक का खर्च हुआ।

शहर में सफाई के स्थानीय एंबेसेडर
जितेंद्र परमार- एक एनजीओ के माध्यम से शहर में सेनिटेशन को लेकर काम कर रहे हैं। मोहल्ला समितियों को बनवाने के साथ ही निगम के संबंंधित अफसरों से इनके बीच संवाद की कोशिश करते हैं। शौचालय बनवाने में तकनीकी मदद देते हैं।
मनीषा श्रीवास्तव, नेहरू नगर स्थित गंगानगर कॉलोनी निवासी हैं। गृहिणी होने के बावजूद क्षेत्र में बढ़ रहे गंदगी के ढेर को खत्म कराने और लोगों को वहां कचरा नहीं फेंकने के संकल्प के साथ काम शुरू किया। आज वह स्थान साफ करा दिया। अब लोगों को गंदगी से मुक्ति मिल गई।
हनीफा शेख, साठ क्वार्टर मोहल्ला समिति बनाकर अपनी कॉलोनी में सफाई के प्रति जागरुकता का काम कर रही है। इन्होंने पूरे स्लम एरिया में व्यक्तिगत शौचालय बनवाने और सामुदायिक शौचालय का सही उपयोग कराने लगातार काम किया है।


बीते चार साल में लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरुकता बढऩा भी बड़ी बात है। पुराना शहर है और नई आदतों में ढलने में थोड़ा समय लगता है। इस बार हम पूरी तरह से नंबर एक के लिए तैयार है।
आलोक शर्मा, महापौर

भोपाल एवं 400 पंचायतों में कचरे से बनेगी खाद
राजधानी समेत सभी 51 जिले 2 अक्टूबर से खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) हो गए। अब स्वच्छ भारत मिशन के तहत बड़े जिलों की पांच हजार से अधिक आबादी वाली करीब ४०० ग्राम पंचायतों में १५ से २० लाख रुपए की लागत से जैविक खाद (नाडेफ) सुखता गड्ढा और किचन गार्डन बनाया जाएगा। भोपाल की खजूरी सड़क, दीपड़ी, झिरनिया, छान, बिलखिरिया, भानपुर, बरखेड़ा नाथू, आदमपुर छावनी, नीलबड़, नजीराबाद, गुनगा, बर्राई, आदमपुर छावनी व अचारपुरा सहित दो दर्जन ग्राम पंचायतों सहित प्रदेश की करीब ४०० बड़ी पंचायतें शामिल होंगी। यहां कचरे से जैविक खाद बनाई जाएगी। इस योजना के तहत भोपाल की २३ पंचायतों का चयन किया गया है। इसमें पंचायत ही घरों से कचरा उठाने की व्यवस्था करेगी।
ट्रेन के बायो टॉयलेट में लगेंगे एयर प्रेशर, यात्रियों को बदबू से मिलेगी निजात
रेल यात्रियों को अब ट्रेन के डिब्बों में लगे बायो टॉयलेट की बदबू परेशान नहीं करेगी। इसके लिए रेलवे ने बायोटॉयलेट में एयर प्रेशर (वेंचुरी) उपकरण लगाने की योजना तैयार की है। यह उपकरण टॉयलेट के अंदर लगाया जाएगा जो पानी के साथ हवा को भी बायो टॉयलेट से बाहर करने का काम करेगा। इससे बदबू बाहर निकलती रहेगी। दरअसल वर्तमान में बायो टॉयलेट की गंदगी तो पानी के साथ बाहर निकल जाती है, लेकिन पूरी तरह पैक होने के चलते हवा नहीं निकल पाती। उल्लेखनीय है कि बायो टॉयलेट पूरी तरह पर्यावरण फ्रेंडली है। इनका प्रयोग करने पर मलमूत्र सीधे ट्रैक पर नहीं गिरता।