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महाकुंभ भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौत पर सीएम मोहन की बड़ी घोषणा, मृतकों के परिजन को 2 लाख मुआवजा देगी सरकार

Devotees Death in Maha Kumbh : महाकुंभ 2025 में संगम तट पर हुई भगदड़ में करीब 30 श्रद्धालुओं की जान गई है। इनमें एमपी के भी 4 श्रद्धालु बताए जा रहे हैं। इस ह्रदय विदारक घटना पर सीएम मोहन ने दुख व्यक्त किया है। साथ ही, मृतकों के परिजन को 2 लाख मुआवजा देने की घोषणा की है।

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Devotees Death in Maha Kumbh

Devotees Death in Maha Kumbh : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ 2025 में बुधवार तड़के मौनी अमावस्या में अमृत स्नान से पहले संगम तट पर हुई भगदड़ में देश के अलग-अलग राज्यों के जान गवाने वाले लगभग 30 श्रद्धालुओं में से एमपी के भी 4 श्रद्धालुओं की जान गई है। इस हृद्य विदारक घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का भी बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मां गंगा से दिवंगतों की पुण्य आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की करबद्ध प्रार्थना की। साथ ही घोषणा की कि, हादसे में जान गवाने वाले मध्य प्रदेश वासियों के परिजन को अतिरिक्त 2 लाख मुआवजा राशि देने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मृतिका हुकुमबाई लोधी के साथ साथ अन्य मृतकों के परिजन को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत करने की घोषणा की है। जिला प्रशासन द्वारा भी नियमानुसार शोकाकुल परिवारों की हर संभव मदद भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि, उत्तर प्रदेश सरकार से समन्वय कर पार्थिव देह को एम्बुलेंस से गृह ग्राम लाने की व्यवस्था की गई है।

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हेल्पलाइन नंबर जारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में मध्य प्रदेश के श्रद्धालुओं को दुर्घटनाग्रस्त होने पर उनकी तत्काल सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 0755-2708055 एवं 0755-2708059 (वल्लभ भवन, सिचुएशन रूम, भोपाल) स्थापित किया गया है। जरूरतमंद व्यक्ति दिन में किसी भी समय इन नंबरों पर कॉल कर वांछित सहायता ले सकते हैं।

भगदड़ में एमपी के इन 4 लोगों की हुई मौत

मध्य प्रदेश से मौनी अमावस्या में अमृत स्नान को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का जत्था प्रयागराज पहुंचा। यहां भगदड़ में 4 की मौत हो गई। इसके अलावा, 3 लोग लापता भी बताए जा रहे हैं। मृतकों में ग्वालियर के टेकनपुर निवासी कामता पाल, रायसेन के गैरतगंज के मोहनलाल अहिरवार (45) और इटारसी उमेश सराठे (48) की मौत की पुष्टि परिजन ने की। वहीं छतरपुर की सुनवाहा गांव की रहने वाली हुकुम बाई लोधी परिवार के 15 लोगों के साथ महाकुंभ में स्नान करने आई थीं। भगदड़ में उनकी मौत हो गई, जबकि बेटी दीपा (19) घायल हैं। बकस्वाहा के बुजुर्ग दपंती हरि साहू (58) और शकुंतला (55) एक अन्य लापता हैं। इधर, चित्रकूट के तरौहा के एक व्यस्त ने बहनोई चंद्रपाल कुशवाहा की मौत की जानकारी दी है।

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पुलिस ने गाली देकर भगाया

पत्रिका से बातचीत में छतरपुर की लक्ष्मी ने बताया कि पुलिस वालों की वजह से देवरानी हुकुमबाई की मौत हुई। 11 बजे रात पुलिस आई और लाठी से जगाया और कहा जाओ डुबकी ले लो। हमने मना किया कि हम सुबह डुबकी लेंगे या दोपहर में। लेकिन, पुलिस वालों ने गाली देकर भगा दिया। हम जैसे ही नहाने के लिए आगे बढ़े तभी कुछ लोग सामने से भागते हुए आ गए और धक्कामुक्की करने लगे। देवरानी का हाथ उनकी बेटी से छूटा और वो दोनों नीचे गिर। इस घटनाक्रम में देवरानी की मौत हो गई।

क्या है संगम नोज

संगम नोज पर ही यमुना, गंगा और सरस्वती का मिलन होता है। इस स्थान को कुंभ स्नान के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस जगह का आकार नोज (नाक) की तरह है। यहां सबसे आगे तिकोने क्षेत्र में बने घाट पर लोग सबसे ज्यादा पहुंचते हैं। हर बार कुंभ में इस क्षेत्र में घाट का आकार बढ़ा दिया जाता है। इस बार यहां दो लाख लोगों के प्रतिघंटे स्नान की व्यवस्था की गई थी।

क्यों मची भगदड़

-ब्रह्म मुहूर्त में नहाने के लिए घाट पर श्रद्धालुओं ने रात में ही कब्जा जमा लिया था।
-हर कोई करना चाहता था त्रिवेणी में स्नान, बैरिकेटिंग तोड़ी।
-वीआइपी मूवमेंट के कारण बार-बार रास्ते बंद होने से खीज।
-नहाने के बाद निकलने का अलग रास्ता जाम होने से ऊहापोह।

इन पर हो अमल

टाइम स्लॉट: कुंभ में आने वाला व्यस्त संगम नोज पहुंचकर मुहूर्त का इंतजार करता है। ऐसे में टाइम स्लॉट लागू कर लोगों को भेजें।
बेरिकेडिंग: पौराणिक महत्व के कारण संगम नोज पर बेरिकेडिंग नहीं की जाती। भीड़ को रोकने के लिए बेरिकेडिंग हो।

अन्य घाटों का प्रचार: लोग सिर्फ संगम नोज का महत्व जानते हैं। अन्य घाटों के महत्व के बारे में उन्हें जानकारी दी जानी चाहिए।

प्रयागराज में श्रद्धालुओं का प्रवेश रोका

रीवा. मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में शाही स्नान करने के लिए पहुंची करोड़ों की भीड़ में मची भगदड़ के बाद प्रयागराज में श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया गया है। रीवा और सतना के करीब 20 से ज्यादा प्वाइंट्स पर हजारों वाहनों को खड़ा कराकर श्रद्धालुओं से जो जहां हैं वहीं रुकने की अपील की जा रही। रीवा के चाकघाट बार्डर में करीब 30 कि.मी लंबा जाम है तो सतना के चित्रकूट बॉर्डर पर कई जगह वाहन खड़े कराए गए हैं।

अधिकारियों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। यात्रियों के लिए खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था कराई जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के चलते रेलवे प्रशासन ने मंगलवार को आनंद विहार से रीवा आने वाली और रीवा से आनंद विहार जाने वाली ट्रेन को रद्द कर दी थी। इधर, छतरपुर में महाकुंभ जाने वाली ट्रेनों पर पथराव के चलते आंबेडकर नगर-प्रयागराज को अस्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है। रेलवे स्टशनों पर जिला पुलिस बल की टीम को 24 घंटे के लिए तैनात किया गया है।

एक लाख से अधिक श्रद्धालु फंसे

प्रयागराज जा रहे श्रद्धालुओं को चाकघाट बॉर्डर पर रोक दिया गया था। यहां करीब एक लाख श्रद्धालु फंस गए थे। प्रशासन ने कुंभ यात्रियों के लिए रैन बसेरा बनाया था, जो कम पड़ गया। श्रद्धालुओं की संख्या देख समीप ही स्थित विवाह घर को खुलवाया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को ठहराया गया है। साथ ही अलग-अलग स्थानों पर उनके रुकने की व्यवस्था कराई गई है।